बच्चा नहीं होने पर महिला की जांच पहले, पुरुष की बारी आई तो दूरी! टेस्ट से क्यों बचते हैं पुरुष?

इनफर्टिलिटी को सिर्फ महिलाओं की समस्या मान लिया जाता है, जबकि पुरुषों से जुड़े कारण भी वजह बन सकते हैं. WHO के आंकड़ों के अनुसार, बांझपन के मामलों में पुरुषों से जुड़े कारण लगभग एक-तिहाई मामलों में पाए जाते हैं. कई केस में पुरुषों में स्पर्म काउंट काफी कम होता है, जिससे बच्चा कंसीव नहीं हो पाता है

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अभिषेक पांचाल

  • नई दिल्ली,
  • 26 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:00 PM IST

जब शादी के बाद लंबे समय तक बच्चा नहीं होता, तो परिवार की नजरें महिला की तरफ उठने लगती हैं. यही माना जाता है कि बच्चा कंसीव न होने का कारण महिला का बांझपन है. अधिकतर केस में टेस्ट कराने और इलाज शुरू करने की सलाह भी सबसे पहले महिला को ही दी जाती है, लेकिन कई मामलों में इनफर्टिलिटी की समस्या महिला में नहीं बल्कि पुरुष में होती है, लेकिन इसका पता इसलिए नहीं चल पाता कि पुरुष अपने टेस्ट कराने से बचते हैं. जब कभी डॉक्टर किसी पुरुष को स्पर्म टेस्ट कराने के लिए कहते हैं, तो कई बार वह झिझकने लगते हैं. कुछ पुरुष जांच कराने के लिए तैयार नहीं होते, तो कुछ कई दिनों तक अस्पताल या आईवीएफ सेंटर में टेस्ट कराने आते ही नहीं है. 

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टेस्ट में देरी से इलाज समय पर नहीं हो पाता. पुरुष आईवीएफ सेंटर में आने से बचने लगते हैं और कई बार बोलने पर टेस्ट के लिए आते हैं. आईवीएफ सेंटर के डॉक्टरों का भी कहना है कि बांझपन की समस्या पुरुषों में भी बहुत बढ़ गई है. ऐसे में समय पर टेस्ट कराना जरूरी है. 

बांझपन का कारण पुरुष की समस्या भी

क्रिस्टा IVF की फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. निधि सहरावत बताती हैं कि इनफर्टिलिटी को सिर्फ महिलाओं की समस्या मान लिया जाता है, जबकि पुरुषों से जुड़े कारण भी वजह बन सकते हैं. WHO के आंकड़ों के अनुसार, बांझपन के मामलों में पुरुषों से जुड़े कारण लगभग एक-तिहाई मामलों में पाए जाते हैं. कई केस में पुरुषों में स्पर्म काउंट काफी कम होता है, जिससे बच्चा कंसीव नहीं हो पाता है. इसकी पहचान के लिए स्पर्म टेस्ट किया जाता है.

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स्पर्म टेस्ट से क्या पता चलता है?

दिल्ली IVF हॉस्पिटल्स की सीनियर IVF एक्सपर्ट डॉ. आस्था गुप्ता बताती हैं कि पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या कम होना, उनकी गति में कमी, बनावट में असामान्यता के कारण भी महिला को बच्चा कंसीव नहीं हो पाता है. इसका पता लगाने के लिए ही सीमेन एनालिसिस टेस्ट किया जाता है. जब पुरुषों को इस टेस्ट को कराने की सलाह देते हैं, तो वह इससे बचते हैं या कई दिनों के बाद टेस्ट कराते हैं. 

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इनफर्लिटी टेस्ट में देरी से क्या होता है? 

कोकून हॉस्पिटल, चंडीगढ़ की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. प्रियंका शर्मा के मुताबिक,बच्चा कंसीव अगर नहीं हो रहा है तो पति-पत्नी दोनों की शुरुआत से जांच जरूरी है. अगर पुरुष की जांच में देरी होती है, तो समस्या की पहचान और इलाज में काफी समय लग सकता है. ऐसे में ये जरूरी है कि अगर डॉक्टर किसी पुरुष को टेस्ट के लिए बोल रहे हैं तो उनको जल्द से जल्द करा लेना चाहिए. देरी होने से कपल के रिश्ते भी बिगड़ने का रिस्क रहता है. 

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टेस्ट से क्यों बचते हैं पुरुष? 

डॉ. प्रियंका कहती हैं कि स्पर्म टेस्ट को शर्म या मर्दानगी से जोड़कर देखा जाता है. इस कारण पुरुष इसको कराने से बचते हैं, जबकि सच ये है कि  यह भी दूसरे मेडिकल टेस्ट की तरह एक सामान्य जांच है, जिसका मकसद समस्या को समझना और सही इलाज तक पहुंचना है. ऐसे में जरूरी है कि पुरुष भी समय पर अपना टेस्ट कराएं. 

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