'13.5 करोड़ लोगों का फ्री इलाज, कैंसर की दवाएं 70% सस्ती!' हेल्थ वेल्थ सम‍िट में बोलीं अनुप्रिया पटेल

इंडिया टुडे के 'HealthWealth Summit 2026' में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने सरकार के हेल्थकेयर विजन का पूरा कच्चा-चिट्ठा रखा. उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत अब तक 13.5 करोड़ लोगों का इलाज हो चुका है. साथ ही उन्होंने खानपान की गलत आदतों और बढ़ते स्क्रीन एडिक्शन पर गहरी चिंता जताई.

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HealthWealth Summit 2026: केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने गिनाई सरकार की उपलब्धियां HealthWealth Summit 2026: केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने गिनाई सरकार की उपलब्धियां

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 29 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:57 PM IST

आजतक हेल्थ वेल्थ समिट के मंच पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने देश के हेल्थकेयर सिस्टम, आयुष्मान भारत योजना के आंकड़ों, कैंसर की दवाओं के घटे दामों और युवाओं की बिगड़ती लाइफस्टाइल पर बेबाक अंदाज में बात की. आइए जानते हैं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने क्या क्या बताया. 

हेल्थकेयर पर सरकार के फोकस पर शुरुआत करते हुए अनुप्रिया पटेल ने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य को अपनी नीतियों के केंद्र में रखा है. साल 2015 में स्वास्थ्य का जो बजट 37,000 करोड़ रुपये था, वह अब बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है. 'अमृत' फार्मेसियों के जरिए लोगों को भारी डिस्काउंट पर दवाइयां मिल रही हैं और सरकार हेल्थ खर्चों का एक बड़ा हिस्सा खुद उठा रही है.

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मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर 

देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या दोगुनी हो चुकी है. एम्स (AIIMS) की संख्या 7 से बढ़कर 23 हो गई है. इसके साथ ही यूजी (UG) और पीजी (PG) की मेडिकल सीटें भी लगातार बढ़ाई जा रही हैं. सरकार का लक्ष्य हेल्थकेयर का विकेंद्रीकरण करना है, ताकि लोगों को इलाज के लिए अपने शहरों से बाहर या दिल्ली न भागना पड़े.

आयुष्मान भारत से 13.5 करोड़ लोगों को मिला इलाज

योजनाओं के आंकड़े रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत लगभग 62 करोड़ लोगों को कवर किया जा रहा है, जिसमें से 13.5 करोड़ लोगों को अब तक मुफ्त इलाज मिल चुका है. इसके अलावा पीपीपी (PPP) मोड पर मुफ्त डायलिसिस की सुविधा भी दी जा रही है. ट्रेड मार्जिन को तर्कसंगत बनाकर सरकार ने कैंसर की 137 दवाओं के दाम 70% तक कम कर दिए हैं.

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आयुष्मान भारत में गड़बड़ी या ओवरबिलिंग? 

योजना में शिकायतों और ओवरबिलिंग के मुद्दों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने इसमें 27 नई मेडिकल स्पेशियलिटीज और पुरानी बीमारियों को भी शामिल किया है. अस्पतालों में मरीजों की मदद के लिए 'आयुष्मान मित्र' तैनात हैं.

सरकार ने एक डेडिकेटेड हेल्पलाइन नंबर 14555 जारी किया है, जिस पर कॉल करके लाभार्थी इलाज से इनकार या ओवरबिलिंग की शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

इसके अलावा जिला स्तर पर डीएम (DM), सीएमओ (CMO) या पोर्टल के जरिए भी शिकायत की जा सकती है. सरकार ऐसे मामलों में तुरंत एक्शन लेती है और इलाज से मना करने या तय से ज्यादा पैसे वसूलने वाले कई अस्पतालों की मान्यता (Empanelment) रद्द कर चुकी है. फर्जीवाड़े को रोकने के लिए पुख्ता तंत्र बनाया गया है.

डायबिटीज और बीपी बढ़ने की वजह हमारी 'बिगड़ती लाइफस्टाइल'

देश में तेजी से बढ़ रही डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या पर चिंता जताते हुए अनुप्रिया पटेल ने लोगों को आईना दिखाया. उन्होंने कहा कि आज खानपान की आदतें बदल चुकी हैं. लोग ताजे घर के खाने के बजाय पैक्ड फूड और बेमौसम की चीजें खा रहे हैं. तंबाकू और अल्कोहल का सेवन बढ़ रहा है. लोगों को अपने भोजन में चीनी, नमक और तेल का इस्तेमाल कम करना चाहिए.

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गांवों और शहरों में बने 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' स्वास्थ्य के पहले संपर्क बिंदु के रूप में बेहतरीन काम कर रहे हैं. सरकार स्क्रीनिंग तो कर रही है, लेकिन लोगों को भी अपनी सेहत की जिम्मेदारी खुद लेनी होगी.

स्क्रीन एडिक्शन नशे से खतरनाक

युवाओं को कड़ी चेतावनी देते हुए केंद्रीय मंत्री ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी और स्क्रीन टाइम पर बड़ा प्रहार किया. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इंस्टेंट फूड डिलीवरी पर निर्भर रहने के बजाय घर के बने सादे और हेल्दी खाने को प्राथमिकता दें.

उन्होंने ये भी कहा कि आज के दौर में खाना खाते वक्त फोन देखना या स्क्रीन स्क्रॉल करना आम हो गया है. लोग यह तक भूल जाते हैं कि वे कितना खा रहे हैं. अनुप्रिया पटेल ने सख्त लहजे में कहा कि खाना खाते समय और परिवार के साथ बैठते समय फोन को बिल्कुल दूर रखें, दिन में कम से कम 15 मिनट फोन से दूरी बनाना कोई मुश्किल काम नहीं है.

उन्होंने चेतावनी दी कि ज्यादा स्क्रीन टाइम एकाग्रता को कमजोर करता है और स्ट्रेस-एन्ग्जायटी को बढ़ावा देता है. उन्होंने स्क्रीन एडिक्शन की तुलना तंबाकू, शराब और ड्रग्स जैसे खतरनाक नशों से करते हुए इसे युवाओं के लिए एक बढ़ती हुई बड़ी समस्या बताया. दिमाग को आराम देने के लिए स्क्रीन से ब्रेक लेना बेहद जरूरी है.

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सत्र के अंत में युवाओं के नाम अपना संदेश देते हुए अनुप्रिया पटेल ने कहा कि यदि आप खुद से प्यार करते हैं, तो हेल्दी खाइए, अच्छी नींद लीजिए और स्क्रीन से दूर रहिए.

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