बाहर से सब कुछ ठीक दिखने के बावजूद क्या कोई अपनी जिंदगी से खुश है? अच्छी नौकरी, कमाई और अपने सपनों को पूरा करने की चाह के बीच आज जेन जी कई तरह की परेशानियों से जूझ रहे हैं. अमेरिका में जेन जी की जिंदगी को लेकर सामने आए नए आंकड़े भी कुछ ऐसी ही तस्वीर दिखाते हैं. जहां पहले के मुकाबले कम जेन जी अपनी जिंदगी को अच्छा मान रहे हैं, वहीं बुजुर्गों में संतुष्टि का स्तर बढ़ा है.
क्या कहते हैं आंकड़े?
अमेरिकी रिसर्च इंस्टीट्यूट गैलप के मुताबिक, अमेरिका में 18 से 29 साल के सिर्फ 44% युवा अपनी जिंदगी को बेहतर मानते हैं और ‘थ्राइविंग’ की कैटेगरी में आते हैं. साल 2010 में यह आंकड़ा 64% था. यानी 16 साल में इसमें 20 प्रतिशत अंकों की गिरावट आई है.
कोविड के दौरान साल 2020 में ये आंकड़ा गिरकर 39% तक पहुंच गया था. इसके बाद 2023 में इसमें सुधार हुआ और ये 51% हो गया, लेकिन फिर गिरावट दर्ज की गई.
मेंटल हेल्थ भी चिंता का विषय
जेन जी की मेंटल हेल्थ से जुड़ा एक और आंकड़ा ध्यान खींचता है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में 18 से 29 साल के 27% युवा डिप्रेशन से जूझ रहे हैं या इसके लिए इलाज करा रहे हैं. साल 2019 के मुकाबले यह आंकड़ा 11% अंक बढ़ा है.
इसके अलावा, सिर्फ 64% युवाओं ने बताया कि उन्होंने पिछले दिन खुशी महसूस की. वहीं, केवल 28% ने कहा कि पिछले सात दिनों में वे हर दिन एक्टिव और प्रोडक्टिव महसूस कर रहे थे.
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बुजुर्गों में पिक्चर अलग
जेन जी के मुकाबले अमेरिका के बुजुर्ग अपनी लाइफ को लेकर ज्यादा संतुष्ट नजर आ रहे हैं. 65 साल और उससे ज्यादा उम्र के 53% लोग ‘थ्राइविंग’ की कैटेगरी में आते हैं. साल 2008 में ये आंकड़ा 38% था. यानी इस एज में जिंदगी से संतुष्टि बढ़ी है और ये रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है.
इन आंकड़ों में दो पीढ़ियों के बीच का फर्क साफ दिखाई देता है. जहां बुजुर्गों में जिंदगी से संतुष्टि बढ़ी है, वहीं युवा पहले के मुकाबले अपनी जिंदगी को लेकर कम पॉजिटिव नजर आ रहे हैं. हालांकि, ये आंकड़े अपने आप में गिरावट की वजह नहीं बताते, लेकिन इतना जरूर दिखाते हैं कि जेन जी की खुशी और मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी है.
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