बीते कुछ सालों से हार्ट की बीमारियां बढ़ गई है. हार्ट अटैक के केस भी काफी आ रहे हैं. दिल की बीमारियों के इलाज के दौरान लोगों को दो मेडिकल टर्म बहुत सुनने को मिलते है. इनमें एक का नाम है एंजियोग्राफी और दूसरे का नाम एंजियोप्लास्टी है. लेकिन कई लोग इन दोनों को एक ही चीज मानते हैं, लेकिन इनमें बड़ा अंतर होता है. एंजियोग्राफी क्या होती है और एंजियोप्लास्टी से कैसे अलग है इस बारे में डॉक्टर ने बताया है.
कोरोनरी एंजियोग्राफी एक ऐसा टेस्ट है जिसमें X-रे और कॉन्ट्रास्ट डाई का इस्तेमाल करके यह देखा जाता है कि किसी व्यक्ति की दिल की नसों में खून कितनी अच्छी तरह बह रहा है. यह टेस्ट हार्ट की नसों में रुकावट या उनके सिकुड़ने का पता लगाने के लिए किया जाता है. आसान भाषा में कहें तो हार्ट में ब्लॉकेज का पता लगाने के लिए एंजियोग्राफी की जाती है. इससे पता चलता है कि हार्ट की नस में कितना ब्लॉकेज है.
कब करते हैं डॉक्टर एंजियोग्राफी
राजीव गांधी अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग में डॉ अजीत कुमार बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति सीने में दर्द, बेचैनी, सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों के साथ अस्पताल आता है तो पहले उसका, ईसीजी करते हैं. कुछ मामलों में स्ट्रेस टेस्ट या फिर इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम किया जाता है. अगर ये नॉर्मल नहीं हैं तो फिर एंजियोग्राफी की जाती है. जिन लोगों को हार्ट वॉल्व की बीमारी है, हार्ट फेलियर है या पहले कभी हार्ट अटैक आ चुका है तो उनकी भी एंजियोग्राफी की जाती है.
इसमें डॉक्टर एक पतली ट्यूब, जिसे कैथेटर कहते है उसको हाथ की कलाई या जांघ की नस के जरिए दिल तक पहुंचाते हैं.
इसके बाद एक विशेष डाई शरीर में डाली जाती है. यह डाई एक्स-रे में दिखाई देती है और डॉक्टर को यह देखने में मदद करती है कि दिल की नसों में कहीं रुकावट तो नहीं है. यह प्रोसेस आमतौर पर 30 मिनट से लेकर 1 घंटे तक चल सकता है. कई मरीजों को टेस्ट के दिन ही छुट्टी दे दी जाती है, तो कुछ को एक दिन अस्पताल में भी डॉक्टरों की निगरानी में रहना पड़ता है.
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एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी में क्या अंतर है?
अगर आपके घर की पानी की पाइप में रुकावट आ जाए, तो सबसे पहले यह पता लगाया जाएगा कि समस्या कहां है. यह काम एंजियोग्राफी करती है. यह बताती है कि हार्ट की नसों में ब्लॉकेज कहां है और कितना है. अगर ब्लॉकेज 70 फीसदी से ज्यादा है तो डॉक्टर आमतौर पर एंजियोप्लास्टी करने की सलाह देते हैं. इसमें एक छोटे गुब्बारे की मदद से हार्ट की नसों में स्टेंट डालकर उसको फैलाया जाता है. स्टेंट एक जाली जैसी धातु की छोटी नली होती है, जो हार्ट की नस को खुला रखने में मदद करती है. हार्ट में स्टेंट डालने को ही एंजियोप्लास्टी कहते हैं. वहीं, ब्लॉकेज का पता लगाने के लिए जो टेस्ट होता है उसको एंजियोग्राफी कहा जाता है.
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क्या एंजियोग्राफी सुरक्षित है?
डॉ कुमार कहते हैं कि एंजियोग्राफी सुरक्षित प्रक्रिया मानी जाती है. हालांकि, हर मेडिकल प्रक्रिया की तरह यह भी हर मरीज के लिए नहीं होती है जब लक्षण ज्यादा हों और ईसीजी या इको में हार्ट में गड़बड़ लगे तो एंजियोग्राफी की जाती है. डॉ कुमार कहते हैं कि लोगदिल की बीमारियां को नजरअंदाज भी कर देते हैं. ऐसे में यह जरूरी है कि अगर किसी व्यक्ति क सीने में दर्द या सांस फूलने जैसे लक्षण हैं तो नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है.
आजतक हेल्थ डेस्क