अभी तक कोरोना वायरस से बचे हुए लोगों के लिए आई बुरी खबर

वैज्ञानिकों ने ओमिक्रॉन के BA.1 वैरिएंट के खिलाफ कोविशील्ड वैक्सीन की क्षमता को लेकर भी चिंता जाहिर की है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों को कोविशील्ड के दोनों डोज मिले हैं और वे पहले कभी संक्रमण का शिकार नहीं हुए हैं, ओमिक्रॉन BA.1 वैरिएंट के खिलाफ उनकी न्यूट्रलाइजिंग पावर बहुत कम देखी गई है, उन लोगों के मुकाबले जो इंफेक्शन से रिकवर हुए हैं और दोनों डोज ले चुके हैं.

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ओमिक्रॉन को बेअसर करने के लिए काफी नहीं Covishield, नई स्टडी में खुलासा (Photo: Getty Images) ओमिक्रॉन को बेअसर करने के लिए काफी नहीं Covishield, नई स्टडी में खुलासा (Photo: Getty Images)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 2:05 PM IST
  • ओमिक्रॉन BA.1 वैरिएंट के खिलाफ कोविशील्ड कम असरदार!
  • ओमिक्रॉन के खिलाफ कोविशील्ड की क्षमता ने बढ़ाई चिंता

कोरोना वायरस का ओमिक्रॉन वैरिएंट अभी भी पूरी दुनिया के लिए खतरा बना हुआ है. इस बीच वैज्ञानिकों ने ओमिक्रॉन के BA.1 वैरिएंट के खिलाफ कोविशील्ड वैक्सीन की क्षमता को लेकर भी चिंता जाहिर की है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों को कोविशील्ड के दोनों डोज मिले हैं और वे पहले कभी संक्रमण का शिकार नहीं हुए हैं, ओमिक्रॉन BA.1 वैरिएंट के खिलाफ उनकी न्यूट्रलाइजिंग पावर बहुत कम देखी गई है. ऐसे लोगों में इंफेक्शन से रिकवर हो चुके और कोविशील्ड की दोनों डोज लेने वालों के मुकाबले ज्यादा खतरा देखा गया.

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ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (ICMR-NIV) द्वारा कंडक्ट की गई स्टडी जल्द से जल्द बूस्टर डोज लेने की जरूरत की ओर इशारा करती है. इस रिसर्च के लिए कोविशील्ड की दूसरी डोज के 180 दिन बाद 24 कोरोना संक्रमित व्यक्तियों के सीरम सैंपल कलेक्ट किए गए. साथ ही, 17 ऐसे लोगों के सैम्पल भी लिए जिन्हें कोरोना नहीं हुआ था और वे कोविशील्ड की दोनों डोज ले चुके थे. इन लोगों में कोविशील्ड की दोनों डोज लेने के बाद भी ओमिक्रॉन का संक्रमण पाया गया.

तीसरे ग्रुप में ऐसे लोगों को शामिल किया गया था जो कोविशील्ड वैक्सीन के दोनों डोज लेने के बाद SARS-CoV-2 के संपर्क में आए थे. इस ग्रुप में लोगों के सीरम सैंपल इंफेक्शन के संपर्क में आने के 14-30 दिन बाद कलेक्ट किए गए थे. इनमें से केवल 21 मामलों में कंपलीट जीनोम को फिर से प्राप्त किया जा सका.

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ओमिक्रॉन के खिलाफ सबसे कम एंटीबॉडीज
शोधकर्ताओं ने पाया कि सभी सैम्पल्स ने ओमिक्रॉन के मुकाबले B.1, बीटा और डेल्टा वैरिएंट को ज्यादा प्रभावी ढंग से बेअसर किया. हालांकि सीरम सैम्पल में ओमिक्रॉन के खिलाफ एंटीबॉडी का औसत सबसे कम 0.11 पाया गया. जबकि अन्य मामलों में इसका औसत 11.28 और 26.25 था.

6 महीने में घट जाती हैं एंटीबॉडीज
एक वैज्ञानिक के मुताबिक, सर्वाधिक म्यूटेशन वाला ओमिक्रॉन वैक्सीनेट हो चुके लोगों में डेल्टा या अन्य वैरिएंट्स के मुकाबले इम्यून से बच निकलने में ज्यादा माहिर है. इससे पहले नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरलॉजी ने एक स्टडी के बाद ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर कहा था कि कोविड वैक्सीन के डबल डोज का एंटीबॉडीज लेवल छह महीने के बाद कम होने लगता है.

इस स्टडी के लिए लोगों को तीन ग्रुप्स में बांटा गया था. पहले ग्रुप में उत्तर प्रदेश के 18 ऐसे लोगों को शामिल किया गया था जिन्होंने पहला डोज कोविशील्ड का और दूसरा डोज कोवैक्सीन का लिया था. जबकि दूसरे और तीसरे ग्रुप में ऐसे 40 लोगों को रखा था जिन्होंने कोविशील्ड या कोवैक्सीन के ही दोनों डोज लिए थे. इसमें बताया गया कि कोविशील्ड के बाद कोवैक्सीन की दूसरी डोज देने पर डेल्टा या अन्य 'वैरिएंट ऑफ कन्सर्न' के खिलाफ अच्छा रिस्पॉन्स दिया. हालांकि कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ सभी ग्रुप्स में न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी लेवल में कमी देखी गई.

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