बचपन में कम मीठा, तो 50 साल बाद भी सेहत को फायदा! इस बीमारी का खतरा कम

नई स्टडी में पाया गया है कि बचपन में कम मीठा खाने वाले लोगों में लिवर और इंट्राहेपेटिक बाइल डक्ट कैंसर का खतरा कम होता है. यह रिसर्च 64,761 ब्रिटेन के लोगों पर की गई, जिसमें शुरुआती 1,000 दिनों के खानपान का प्रभाव दिखाया गया है.

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मीठा खाता बच्चा मीठा खाता बच्चा

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 31 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:00 PM IST

बच्चे को ज्यादा मीठा खिलाना उसकी सेहत को बिगाड़ सकता है. एक नई स्टडी के मुताबिक, जिन लोगों ने बचनप में कम मीठा खाया उनमें आगे चलकर कई तरह के कैंसर का जोखिम कम देखा गया. स्टडी में जन्म से लेकर शुरुआत के हजार दिनों तक भी मीठा कम खाने की बात की गई है. रिसर्च के मुताबिक, इतने दिनों तक कम मीठा खाने से 50 साल की उम्र के बाद भी सेहत को फायदा मिलता है.  यह रिसर्च नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में प्रकाशित की गई है. 

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इस रिसर्च को 64,761 लोगों पर किया गया खा, जो ब्रिटेन में 1951 से 1956 के बीच पैदा हुए थे.  शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन में चीनी की राशनिंग व्यवस्था को एक तरह के  प्रयोग के तौर पर इस्तेमाल किया. सितंबर 1953 में चीनी की राशनिंग खत्म हुई थी. इससे पहले पैदा हुए बच्चों के शुरुआती जीवन में चीनी और इससे बनने वाली मीठी चीजों की उपलब्धता कम थी, जबकि बाद में पैदा हुए बच्चों को इसकी उपलब्धता ज्यादा मिली. रिसर्च में पता चला कि 1951 से 1956 के बीच जो लोग पैदा हुए थे उनमें कई तरह के कैंसर का रिस्क कम था.

 रिसर्च में बताया गया है कि शुरुआती 1,000 दिन शरीर के विकास और मेटाबॉलिक प्रोग्रामिंग के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. इस दौरान जो खानपान रहा है उसका असर पूरे जीवन पर पड़ता है. 

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किन कैंसर का खतरा कम मिला?

स्टडी में सबसे मजबूत संबंध लिवर और इंट्राहेपेटिक बाइल डक्ट कैंसर के साथ देखा गया. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि चीनी खाना सीधे तौर पर इन कैंसर की वजह है या चीनी छोड़ने से कैंसर से बचाव की गारंटी मिल जाती है. यह भी देखा जाता है कि व्यक्ति जीवन में कैंसर के दूसरे रिस्क फैक्टर के दायरे में रहता है या नहीं, जैसे स्मोकिंग, प्रदूषण और शराब का सेवन

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बाद में भी कम मीठा खाने की रही आदत

इस अध्ययन का एक दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि जिन लोगों ने बचपन में कम मीठा खाया उन्होंने बाद की जिंदगी में भी कम मीठा खाया. इससे विशेषज्ञों का अनुमान है कि बचपन में बहुत मीठे स्वाद की आदत न पड़ने से आगे चलकर व्यक्ति को कम मीठा खाना सामान्य लग सकता है. यानी शुरुआती खानपान सिर्फ शरीर ही नहीं, स्वाद की पसंद को भी प्रभावित कर सकता है.

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क्या कहते हैं AIIMS के डॉक्टर

दिल्ली AIIMS में पीडियाट्रिक विभाग में डॉ. हिमांशु भदानी बताते हैं कि रिसर्च में जो जानकारी दी गई है वह ठीक है. बचपन में कम मीठा खाना बच्चे के लिए भी फायदेमंद है और आगे चलकर कई बीमारियों के रिस्क को भी कम करता है, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि बच्चों को हर तरह की चीनी से दूर रखा जाए. फल और दूध में मौजूद चीनी से खास नुकसान नहीं है. माता-पिता की चिंता मुख्य रूप से एडेड या फ्री शुगर को लेकर होनी चाहिए. बच्चों को बार-बार मिठाई, चॉकलेट, मीठे बिस्किट, केक और शुगर वाले पेय देने की आदत कम करना ज्यादा जरूरी है.

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