अतुल सुभाष सुसाइड केस में पत्नी-सास गिरफ्तार... जानें- दोषी साबित हुई तो निकिता को कितनी होगी सजा?

अतुल सुभाष के सुसाइड केस में बेंगलुरु पुलिस ने पत्नी निकिता, सास निशा और साले अनुराग को गिरफ्तार कर लिया है. कोर्ट ने तीनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. इन पर अतुल को सुसाइड के लिए उकसाने का केस दर्ज किया गया है. ऐसे में जानते हैं कि अगर इन्हें दोषी ठहराया जाता है तो कितनी सजा हो सकती है.

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अतुल सुभाष केस में पुलिस ने पत्नी-सास और साले को गिरफ्तार कर लिया है. अतुल सुभाष केस में पुलिस ने पत्नी-सास और साले को गिरफ्तार कर लिया है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 3:01 PM IST

बेंगलुरु में काम करने वाले AI इंजीनियर अतुल सुभाष की सुसाइड मामले में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है. बेंगलुरु पुलिस ने रविवार को अतुल की पत्नी निकिता सिंघानिया, सास निशा सिंघानिया और साले अनुराग सिंघानिया को गिरफ्तार कर लिया. अतुल ने अपनी मौत के लिए पत्नी निकिता और ससुराल वालों को ही जिम्मेदार ठहराया था.

पुलिस ने निकिता को गुरुग्राम, जबकि सास निशा और साले अनुराग को यूपी के प्रयागराज से गिरफ्तार किया है. तीनों को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

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अतुल ने 9 दिसंबर को खुदकुशी कर ली थी. उन्होंने लगभग डेढ़ घंटे का वीडियो और 24 पन्नों का सुसाइड नोट भी छोड़ा था. अतुल ने इसमें पत्नी और ससुराल वालों पर झूठे केस लगाकर जबरदस्ती पैसे वसूलने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था.

अतुल ने क्या इल्जाम लगाए थे?

अतुल और निकिता की शादी 2019 में हुई थी. लेकिन शादी के सालभर बाद से ही दोनों अलग-अलग रह रहे थे. अतुल ने सुसाइड नोट में आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी निकिता ने शुरुआत में सेटलमेंट के लिए 1 करोड़ रुपये मांगे थे. बाद में इसे बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये कर दिया था. 

अतुल ने ये भी कहा कि उनकी पत्नी ने नाबालिग बेटे की ओर से केस दायर किया था और हर महीने 2 लाख रुपये का गुजारा भत्ता देने की मांग की थी.

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24 पन्नों के सुसाइड नोट में अतुल ने बताया कि निकिता और उसके परिवार वालों ने उनपर घरेलू हिंसा, हत्या, दहेज प्रताड़ना समेत 9 केस दर्ज करवा दिए थे. अतुल ने ये भी बताया कि शादी के बाद से ही निकिता और उसके परिवार वाले किसी न किसी बहाने से उनसे पैसे मांगते थे.

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पत्नी और ससुराल वालों की गिरफ्तारी क्यों?

अतुल के वीडियो और सुसाइड नोट के आधार पर बेंगलुरु पुलिस ने निकिता और उसके परिवार वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया था.

अतुल का मामला सामने आने के बाद ही निकिता और उसके परिवार वाले घर छोड़कर भाग गए थे. रविवार को भी जौनपुर में इनके घर पर ताला लगा था. 

बेंगलुरु पुलिस ने निकिता के घर के बाहर कई नोटिस भी लगा दिए थे. पुलिस ने शुक्रवार को निकिता को समन जारी कर तीन दिन के भीतर पेश होने का नोटिस दिया था. इसके बाद निकिता, उसकी मां, भाई और चाचा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी भी दाखिल की थी.

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दोष साबित हुआ तो कितनी सजा?

बेंगलुरु पुलिस ने BNS की धारा 108 और 3(5) के तहत केस दर्ज किया है. धारा 3(5) कहती है कि जब कई सारे व्यक्ति मिलकर एक ही इरादे से कोई अपराध करते हैं तो उसमें सबकी जिम्मेदारी बराबर की होती है. 

वहीं, धारा 108 आत्महत्या के लिए उकसाने पर लगाई गई है. अगर कोई व्यक्ति किसी को आत्महत्या करने के लिए उकसाता है तो दोषी पाए जाने पर उसे 10 साल की जेल की सजा हो सकती है. इसके साथ ही जुर्माने का प्रावधान भी है.

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उकसाने की बात कैसे साबित होगी?

अतुल ने तो अपने वीडियो और सुसाइड नोट में मौत के लिए पत्नी निकिता और ससुराल वालों को जिम्मेदार ठहराया है. इसी आधार पर केस दर्ज किया गया है. लेकिन अब अतुल के परिवार वालों को साबित करना होगा कि निकिता और ससुराल वालों ने उसे प्रताड़ित किया था, जिसने उसे आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया.

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हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह के मामले में अहम टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि प्रताड़ना को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं कहा जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी तभी पाया जा सकता है, जब इस बात के पुख्ता सबूत हों. सिर्फ प्रताड़ना का आरोप काफी नहीं है. 

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा कि सुसाइड के लिए उकसाने का इरादा साफ होना चाहिए. सिर्फ प्रताड़ना किसी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराने के लिए काफी नहीं है. आरोप लगाने वाले को ऐसे सबूत पेश करने होंगे, जिससे साबित हो सके कि उस व्यक्ति के कारण ही कोई व्यक्ति आत्महत्या करने के लिए मजबूर हुआ.

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