ना VFX-ना खर्चे करोड़ों, 39 साल पहले रामानंद सागर ने कैसे बनाई रामायण? हिट हुआ देसी जुगाड़

रामानंद सागर ने 39 साल पहले रामायण टीवी शो बनाया जो बिना महंगे VFX और कंप्यूटर ग्राफिक्स के आज भी लोकप्रिय है. उन्होंने देसी जुगाड़ और क्रिएटिविटी से कठिन दृश्यों को स्क्रीन पर जीवंत किया.

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रामानंद सागर की रामायण आज भी हिट (Photo: Social Media) रामानंद सागर की रामायण आज भी हिट (Photo: Social Media)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 05 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:15 AM IST

39 साल पहले रामानंद सागर ने रामायण बनाकर लोगों को ऐसा गिफ्ट दिया, जो सालों बाद भी उनके दिलों में बसी हुई है. उस शो से पहले और बाद में अनेकों रामायण बनीं. लेकिन रामानंद सागर के विजन और उनके प्रेजेंटेशन की कोई बराबरी नहीं कर पाया. डायरेक्टर ने ये शो बनाने में ना ही करोड़ों का बजट पानी की तरह बहाया और ना ही फिजूल खर्ची की.

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उस वक्त ऐसी कोई तकनीक नहीं थी, जिसके दम पर विजअल्स को ग्रैंड दिखाया जा सके. ना महंगे कैमरे और हाईटेक VFX थे. डायरेक्टर ने बिना आधुनिक VFX और कंप्यूटर ग्राफिक्स के ऐसी रामायण बनाई थी, जो आज भी रेलेवेंट लगती है.

कैसे बनी थी रामानंद सागर की रामायण?
रामानंद सागर और उनकी टीम ने क्रिएटिविटी और देसी जुगाड़ के दम पर मुश्किल से मुश्किल सीन्स को स्क्रीन पर सच करके दिखाया. शो के स्पेशल इफेक्ट्स की कहानी मैजिकल है. रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर के मुताबिक, उस समय स्पेशल इफेक्ट्स के लिए कंप्यूटर का यूज नहीं होता था. ज्यादातर काम कैमरे और कुछ खास तकनीकों की मदद से होते थे. जानते हैं कैसे मेकर्स ने बिना तकनीक के हिट शो बनाया.
 
रूई यूज कर दिखाया कोहरा
सीन में बादलों का इफेक्ट देने के लिए कैमरा या कांच के आगे रूई लगाई जाती थी. वहीं कोहरा और धुंध दिखाने के लिए सेट पर अगरबत्ती और धूप यूज किया जाता था.

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मिनिएचर का हुआ इस्तेमाल
सीन में बड़े-बड़े पहाड़ दिखाने के लिए मिनिएचर (किसी बड़ी चीज का छोटा प्रतिरूप) तैयार किया जाता था. 10 से 15 फीट तक के छोटे मॉडल बनाए जाते थे. फिर कैमरा ट्रिक के खेल से इन्हें असली पहाड़ों जैसा दिखाया जाता था.

शिव तांडव सीन के पीछे क्या ट्रिक?
शिव तांडव का सीन स्लाइड प्रोजेक्टर की मदद से तैयार किया गया था. बैकग्राउंड में छोटे ग्रहों के मॉडल रखे गए थे और स्लाइड्स के जरिए पूरा दृश्य बनाया गया था.

कैमरा ट्रिक का खेल
देवी-देवताओं और रावण के पुष्पक विमान वाले सीन को कैमरे की ट्रिक और तारों की मदद से तैयाार किया गया. एक्टर्स को इन वायर्स की मदद से हवा में उड़ता हुआ दिखाकर बैकग्राउंड प्लेट से जोड़ा गया था. कई सीन्स के लिए प्लास्टर-ऑफ-पेरिस (POP), बांस, घास-फूस और लकड़ी के बने प्रॉप्स यूज किए गए थे.

तीर-धनुष इफेक्ट्स के लिए खास मशीन
रामायण के वॉर सीन बनाने में काफी मेहनत लगी. इसके लिए SEG 2000 नाम की एक नई मशीन का यूज किया गया था. तब ये मार्केट में नई आई थी. तीरों की टक्कर और उससे निकलने वाली चिंगारी, दिव्य अस्त्रों के इफेक्ट्स दिखाने के लिए इसका इस्तेमाल हुआ. मैकेनिकल इफेक्ट्स और ग्लास मैटिंग जैसी तकनीकों का भी सहारा लिया गया. उस दौर में आधुनिक CGI और कंप्यूटर VFX नहीं थे, लेकिन कैमरा ट्रिक्स, ऑप्टिकल और मैकेनिकल इफेक्ट्स के जरिए कई मुश्किल दृश्य तैयार किए जाते थे. युद्ध के दृश्यों में भव्यता को स्क्रीन पर दिखाने के लिए करीब 2,000 जूनियर कलाकारों को बुलाया गया था. 

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कुंभकरण को कैसे मारा?
रामायण में कुंभकरण का वध दिखाना काफी टफ रहा था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सीन के लिए कुंभकरण के चेहरे का मोल्ड तैयार गया था. कटे हुए हाथ और शरीर के हिस्सों को दिखाने के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस से नकली अंग बनाए गए थे. 

कहां हुई थी शो की शूटिंग?
रामायण की शूटिंग के लिए रामानंद सागर ने गुजरात के उमरगांव (उमरगाम) को चुना था. इसी जगह अयोध्या, लंका, मिथिला और किष्किंधा के सेट बने. एक ही जगह पर अलग-अलग राज्यों और राजमहलों के सेट बनाकर शूटिंग की जाती थी.  

प्रेम सागर के मुताबिक, शूटिंग के लिए कोई फिक्स कॉलशीट या तय शेड्यूल नहीं होता था. अगर रामानंद सागर रात 3 बजे कोई सीन लिखकर पूरा करते थे, तभी शूटिंग शुरू की जाती थी. 

कितना था रामायण का बजट?
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रामायण के हर एपिसोड का बजट करीब 9 लाख रुपये था. उस समय के हिसाब से ये एक महंगा टीवी शो था.

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