KBC 18: चाय बेचने वाले की बेटी, जिसे भाई 5 साल तक समझता रहा अनजान, छलक पड़ा संघर्षों का दर्द

कौन बनेगा करोड़पति 18 के बीते एपिसोड में एक चाय बेचने वाली की बेटी हॉट सीट पर पहुंची. उन्होंने अपना जबरदस्त गेम दिखाया और 12 लाख के सवाल तक पहुंचीं.

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KBC 18 में चाय वाले की बेटी (Photo: YT/ KBC India) KBC 18 में चाय वाले की बेटी (Photo: YT/ KBC India)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:21 PM IST

KBC 18: अमिताभ बच्चन के शो 'कौन बनेगा करोड़पति 18' के बीते एपिसोड में महाराष्ट्र के अमरावती की रहने वाली प्रगति दिनेश कल्पेकर हॉट सीट पर बैठीं. अमरावती के डिविजनल इन्फॉर्मेशन ऑफिस में जूनियर क्लर्क के तौर पर काम करने वाली प्रगति शो में अपने पिता और छोटे भाई के साथ आई थीं. वह 12 लाख रुपये के सवाल तक पहुंचीं, लेकिन 'कोमागाता मारू' से जुड़े सवाल पर उनका गेम खत्म हो गया.

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एक चाय बेचने वाले की बेटी प्रगति ने अपने परिवार के संघर्षों और डॉक्टर बनने के अपने पुराने सपने के टूटने से लेकर IFS ऑफिसर बनने की चाहत तक के सफर के बारे में बात की. आखिर में प्रगति ने 5 लाख रुपये जीते.

प्रगति दिनेश कल्पेकर की कहानी
प्रगति KBC 18 में अपने पिता और छोटे भाई के साथ आई थीं. उन्होंने बताया कि मुंबई आना और शो में शामिल होना किसी बड़े शहर में जाने का उनका पहला अनुभव था. उनके पिता चाय की दुकान चलाते हैं, जबकि प्रगति अब अमरावती में सरकारी डिविजनल इन्फॉर्मेशन ऑफिस में जूनियर क्लर्क के तौर पर काम करती हैं.

उन्होंने उन आर्थिक मुश्किलों के बारे में भी बात की जिनका सामना उनके परिवार को उनके और उनके भाई के बड़े होने के दौरान करना पड़ा था. उनके माता-पिता ने उनकी पढ़ाई को प्राथमिकता दी और प्रगति को उनके नाना-नानी के घर रहने के लिए भेज दिया. इस वजह से भाई-बहन साथ बड़े नहीं हो पाए और उनके छोटे भाई को तब तक यह पता ही नहीं चला कि उसकी कोई बहन है, जब तक कि वह लगभग पांच साल का नहीं हो गया.

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प्रगति ने बताया कि उन्होंने कभी डॉक्टर बनने का सपना देखा था और MBBS कोर्स में दाखिला पाने की उम्मीद में NEET की तैयारी की थी. हालांकि, उन्हें MBBS में सीट नहीं मिल पाई और इसके बजाय BDS में दाखिला लेना पड़ा. अपने कई दोस्तों को MBBS कोर्स में जाते देखकर उन्हें निराशा हुई.

उन्होंने कहा, 'मैं बहुत उदास थी. इतनी नाकामियों के बाद अपना आत्मविश्वास वापस पाना मुश्किल हो जाता है.' प्रगति ने उस मुश्किल दौर से उबरने में मदद के लिए अपने छोटे भाई को श्रेय दिया. उन्होंने कहा, 'मेरे छोटे भाई ने एक बड़े भाई की तरह मेरा मार्गदर्शन किया और मुझे दूसरे एग्जाम की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया.' पढ़ने की शौकीन प्रगति ने कहा कि वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं और आगे चलकर IFS ऑफिसर बनना चाहती हैं.

प्रगति कल्पेकर 12 लाख रुपये तक पहुंचीं
प्रगति ने हॉट सीट पर शानदार खेल दिखाया और बिना किसी लाइफलाइन का इस्तेमाल किए 25,000 रुपये तक पहुंच गईं. हालांकि 12 लाख का सवाल उनका गलत हो गया. प्रगति से पूछा गया: कनाडा के इमिग्रेशन नियमों को चुनौती देने के लिए 1914 में कोमागाटा मारू जहाज किसने किराए पर लिया था?

ऑप्शन थे:

A. सोहन सिंह भकना
B. लाला हर दयाल
C. बाबा गुरदित सिंह
D. करतार सिंह सराभा

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प्रगति के '50:50' लाइफलाइन बची थी, लेकिन प्रगति ने उसका इस्तेमाल न करने का फैसला किया और ऑप्शन D, करतार सिंह सराभा को चुना. लेकिन, सही जवाब बाबा गुरदित सिंह था.

12 लाख रुपये वाला सवाल गलत होने के बाद, प्रगति की जीती हुई रकम घटकर 5 लाख रुपये रह गई, और आखिर में उन्हें यही रकम मिली.

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