'कौन बनेगा करोड़पति 18' इस समय चर्चा में बना हुआ है. शो की हॉट सीट पर अब CRPF के डिप्टी कमांडेंट मनोज कुमार यादव पहुंचे. इस दौरान अमिताभ बच्चन संग बातचीत में उन्होंने अपनी जर्नी शेयर की. उन्होंने बताया कि एक दफा दुश्मनों संग मुठभेड़ में उनकी जान बाल-बाल बची थी.
कितनी मुश्किल होती है फौजी की जिंदगी?
KBC में CRPF ऑफिसर मनोज कुमार यादव ने बताया कि वो उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के रहने वाले हैं. लेकिन फिलहाल वो हरियाणा के गुरुग्राम में CRPF इंटेलिजेंस स्कूल में CRPF डिप्टी कमांडेंट के तौर पर तैनात हैं.
अमिताभ बच्चन ने मनोज से पूछा कि उन्होंने कब सोचा कि उन्हें फौज में जाना चाहिए? इसपर उन्होंने जवाब दिया- मेरा जो बचपन रहा है, वो मेरी नानी के घर ज्यादा बीता है. मेरी नानी की फैमिली में नाना, मामा समेत सभी लोग फौज में थे. उनको जब मैं देखता था कि वो लोग जब घर आते थे और गांव के लोगों का उनके लिए जो सम्मान था, तो वो देखकर मुझे लगता था कि इस वर्दी में जादू तो है.
'फिर लगा कि हमारे लिए जो सबसे बेस्ट ऑप्शन है... जो वर्दी का चार्म देखा, उन लोगों का सम्मान देखा... वर्दी पहनने के बाद जो प्राइड फील होता है...उस प्राइड को मैं खुद फील करना चाहता था, इसलिए मैंने सेना जॉइन की.'
मनोज ने आगे बताया कि उन्होंने श्रीनगर में 79वीं बटालियन, झारखंड में कोबरा (कमांडो बटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन), अहमदाबाद में 100वीं आर.ए.एफ. (रैपिड एक्शन फोर्स) और झारखंड में 157वीं बटालियन में सेवा दी है.
इतनी मुश्किल होती है ट्रेनिंग
जब अमिताभ बच्चन ने उनसे कोबरा (CoBRA) की सर्वाइवल ट्रेनिंग के बारे में पूछा, तो मनोज ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान जवानों को अपनी लिमिट्स को पुश करने और कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने के हुनर को परखने की शिक्षा दी जाती है. उन्हें कभी-कभी जंगल में अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है, जहां उन्हें अचानक मिलने वाली चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, ताकि वो हर समय लड़ाई के लिए तैयार रहें.
जब अमिताभ बच्चन ने मनोज से पूछा कि क्या जिंदा रहने के लिए उन्हें सांप भी खाने पड़ते हैं, तो मनोज ने बताया कि यह भी उनकी ट्रेनिंग का ही एक हिस्सा है, क्योंकि जवानों को बिना खाने और पानी के भी मुश्किल परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए हमेशा तैयार रहना पड़ता है.
मनोज ने झारखंड के अपने कार्यकाल का एक किस्सा भी साझा किया, जहां उन्हें एक जंगल में दुश्मनों के खिलाफ लड़ाई लड़नी पड़ी थी. उन्होंने बताया कि वो आम गाड़ियों में उस जगह पहुंचे जहां दुश्मन छिपा हुआ था और उन्होंने खुद को गाड़ियों के पिछले हिस्से में छिपा रखा था. उस जगह पहुंचने के बाद उन्होंने दुश्मनों को सरेंडर करने के लिए कहा था, लेकिन इसके जवाब में उन्होंने गोलियां चलानी शुरू कर दीं. इस मुठभेड़ के दौरान मनोज की दाहिनी आंख में एक छर्रा (स्प्लिंटर) लग गया था. आंख के रेटिना पर चोट लगने पर वो अपनी आंख भी खो सकते थे. उन्होंने बताया कि वो एनकाउंटर उनके लिए जानलेवा भी साबित हो सकती थी.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क