पिछले 24 साल से फिल्मों में अलग-अलग किरदार निभा रहे मनु ऋषि चड्ढा अब अपनी इमेज बदलने की तैयारी में हैं. नेटफ्लिक्स की पीरियड वॉर ड्रामा ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में वह पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और कारगिल युद्ध के मास्टरमाइंड माने जाने वाले परवेज मुशर्रफ के रोल में नजर आ रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि जिस एक्टर को अक्सर कॉमिक और इम्प्रोवाइजेशन वाले किरदारों में देखा गया, उन्होंने मुशर्रफ को बेहद ठहरे हुए अंदाज में निभाया है.
‘हर कोई मुझे मनु ऋषि ही बनाकर बुलाता था’
मनु ऋषि कहते हैं कि लंबे समय से उन्हें एक ही तरह के रोल मिल रहे थे. उन्होंने बताया कि ‘ओये लकी! लकी ओये!’ के बाद मेकर्स ने उन्हें लगातार इम्प्रोवाइजेशन के लिए बुलाना शुरू कर दिया. उनके मुताबिक, कई बार वह एक ही फिल्म में लेखक और एक्टिंग दोनों का काम कर रहे थे, लेकिन पैसे सिर्फ एक काम के मिलते थे.
स्क्रीन से उनका कहना है कि एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्हें एक्टिंग करना ही बोरिंग लगने लगा था. वह बोले कि उन्हें हर जगह 'मनु ऋषि वाला मनु ऋषि' ही चाहिए था.
मुशर्रफ के लिए पहले यूट्यूब खंगाला
मुशर्रफ का किरदार मिलने के बाद मनु ऋषि का पहला काम था उनके वीडियो देखना. लेकिन बाद में उन्होंने नवाजुद्दीन सिद्दीकी से भी बात की. नवाज ने उन्हें बताया कि ‘मंटो’ करते वक्त उनके पास मंटो का कोई वीडियो रेफरेंस नहीं था- सिर्फ तस्वीर और लिखित सामग्री थी. इससे मनु ऋषि को भी समझ आया कि सिर्फ मुशर्रफ की नकल करने के बजाय उनके अंदर के इंसान को पकड़ना जरूरी है.
एक्टर ने मुशर्रफ के पुराने वीडियो देखकर एक खास बात नोटिस की- उन्हें लगता था कि वह सच बोल रहे हैं, जबकि सामने वाले जानते थे कि वह झूठ बोल रहे हैं. मनु ऋषि के मुताबिक, यही विरोधाभास किरदार को समझने की सबसे अहम कुंजी था.
‘मैंने अपने सारे पॉज को हथियार बना लिया’
मनु ऋषि ने बताया कि मुशर्रफ को निभाने के लिए उन्हें अपनी स्वाभाविक ऊर्जा को कंट्रोल करना पड़ा. उन्होंने कहा कि किरदार में ठहराव और सही वॉल्यूम बेहद जरूरी था. स्क्रिप्ट पढ़ते हुए उन्होंने तय किया कि हर डायलॉग से पहले थोड़ा रुकेंगे. उनके शब्दों में- मैंने अपने सारे पॉज को हथियार बना लिया.
शूटिंग के दौरान वह मॉनिटर भी नहीं देखते थे. उन्हें लगता कि कहीं गलती हो गई तो डायरेक्टर से माफी मांग लेते, लेकिन डायरेक्टर उन्हें भरोसा दिलाते कि परफॉर्मेंस सही जा रही है. मनु ऋषि ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह शूटिंग के दौरान नर्वस रहते हैं और जब वह नर्वस नहीं होते, तब उनसे बड़ी गड़बड़ियां हो जाती हैं.
अगली बार मुशर्रफ को ‘जिंदा’ करेंगे!
जब उनसे पूछा गया कि अगर मुशर्रफ की जिंदगी के किसी और हिस्से पर काम करने का मौका मिले तो क्या करेंगे, तो मनु ऋषि ने सीधे इतिहास की किताब खोलने के बजाय अपनी कल्पना की उड़ान भर दी. उन्होंने मजाक में कहा कि वह मुशर्रफ को जिंदा दिखाएंगे, जहां वह अपनी गलतियों को समझ रहे हैं. इसके बाद कहानी में दाऊद इब्राहिम को भारत वापस लाने का ट्विस्ट भी होगा और आखिर में दाऊद आजमगढ़ में दफन होने की बात करेगा.
मनु ऋषि का मानना है कि इतिहास को हूबहू दोहराने के बजाय फिक्शन के जरिए उसके सच को दिखाना ज्यादा दिलचस्प हो सकता है. जिस अभिनेता को सालों तक कॉमेडी और इम्प्रोवाइजेशन के डिब्बे में रखा गया, वह अब मुशर्रफ बनकर उसी डिब्बे का ढक्कन खोलते नजर आ रहे हैं.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क