घर के किसी कोने में पड़ी एक साधारण सी झाड़ू को देखकर शायद ही किसी के मन में उड़ने का ख्याल आता हो. उसका रिश्ता सदियों से धूल, सफाई और घरेलू कामकाज से रहा है लेकिन इंसानी कल्पना ने इस बेहद मामूली चीज को एक ऐसा रूप दिया कि वही झाड़ू कभी मध्यकालीन चुड़ैलों की सवारी का जरिया बनी, कभी जादुई दुनिया में पहुंचने का माध्यम और कभी किसी युवा लड़की की आजादी का प्रतीक. झाड़ू की यह यात्रा इसलिए भी इतनी दिलचस्प है क्योंकि यह सिर्फ झाड़ू की कहानी नहीं है बल्कि इस बात का प्रमाण है कि इंसान अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में भी कल्पना के कितने असीम संसार तलाश लेता है.
भारतीय लोकविश्वास और मान्यताओं में झाड़ू को देवी लक्ष्मी और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है क्योंकि उसका संबंध सफाई और घर से दरिद्रता दूर करने की धारणा से जुड़ा है. यही वजह है कि भारतीय परंपराओं में झाड़ू को लक्ष्मी से जुड़ी शुभ वस्तु माना गया है.
झाड़ू और जादू का यह अनोखा रिश्ता खासतौर पर यूरोपीय लोकविश्वासों में गहरा दिखाई देता है. मध्यकालीन यूरोप में चुड़ैल या जादूगरनियों को लेकर कई तरह की रहस्यमयी कहानियां प्रचलित हैं, जिनमें उनके उड़ने, रात में रहस्यमयी यात्राएं करने और जादुई शक्तियों के इस्तेमाल का जिक्र मिलता है. 15वीं और 16वीं सदी तक यूरोपीय कला और साहित्य में चुड़ैलों के उड़ने की ये छवियां आम होने लगीं. यहीं से वह लोकप्रिय दृश्य उभरा जिसे आज हम तुरंत पहचान लेते हैं. नुकीली टोपी पहने एक चुड़ैल और हवा में तैरती हुई झाड़ू. इसने आगे चलकर किताबों और लोकसंस्कृति में गहरी जड़ें जमाईं.
इस जुड़ाव को समझने के लिए झाड़ू के घरेलू और स्त्री संसार से उसके पुराने संबंध को देखना भी जरूरी है. लंबे समय तक घर की सफाई और व्यवस्था का काम महिलाओं के घरेलू श्रम से जुड़ा रहा. दूसरी ओर, यूरोपीय समाज में चुड़ैल की छवि अक्सर ऐसी महिला के रूप में भी गढ़ी गई जो सामाजिक, धार्मिक या लैंगिक मानकों की तय सीमाओं से बाहर खड़ी दिखाई देती थीं. इस संदर्भ में झाड़ू का प्रतीकात्मक अर्थ दिलचस्प हो जाता है. जो वस्तु घर के भीतर व्यवस्था और सफाई से जुड़ी थी. वही लोककल्पना में घर की चौखट पार कर आसमान में उड़ने लगी.
सिर्फ यूरोपीय लोककथाएं ही नहीं रूस की लोककथाओं में बाबा यागा जैसी जादुई चरित्रों से लेकर डिज्नी की क्लासिक फिल्म Fantasia तक झाड़ू ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है. फैंटासिया में जब मिकी माउस एक साधारण झाड़ू को जादू से जिंदा कर देता है और वह पानी की बाल्टियां ढोते-ढोते बेकाबू हो जाती है, यह दृश्य आज भी दुनियाभर के दर्शकों के जेहन में ताजा है. समय के साथ झाड़ू कभी डरावनी लोककथाओं का हिस्सा बनी तो कभी डिज्नी के एनिमेशन में हास्य और रोमांच का तड़का रही.
लेकिन झाड़ू की सांस्कृतिक कहानी यहीं नहीं थमती. 20वीं सदी के आधुनिक साहित्य और सिनेमा ने इस पारंपरिक रूप से डरावनी या रहस्यमयी छवि को बिल्कुल नए और सकारात्मक अर्थ दिए. फैंटेसी की दुनिया ने इसे केवल भय या जादू तक सीमित न रखकर रोमांच और स्वतंत्रता से जोड़ा.
फिल्मों ने आगे चलकर इसे और आयाम दिया. डिज्नी की 1940 की फिल्म Fantasia में The Sorcerer’s Apprentice में मिकी माउस जादू के जरिए झाड़ू में जान डाल देता है. झाड़ू उसके आदेश पर पानी ढोने लगती है, लेकिन मिकी जल्द ही समझ जाता है कि जादू को नियंत्रित करना इतना आसान नहीं. देखते ही देखते साधारण झाड़ू हास्य और जादुई रोमांच का हिस्सा बन जाती है.
20वीं सदी में फैंटेसी साहित्य और सिनेमा ने झाड़ू की इस पारंपरिक छवि को एक और दिशा दी. वह सिर्फ भय, अंधविश्वास या जादू की वस्तु नहीं रही. वह रोमांच, स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और बड़े होने की प्रक्रिया का प्रतीक भी बनने लगी.
इस बदलाव का खूबसूरत उदाहरण जापानी लेखिका ईको कडोनो के 1985 के उपन्यास पर आधारित हायाओ मियाजाकी की 1989 की फिल्म Kiki's Delivery Service है. किकी एक युवा जादूगरनी है, लेकिन उसकी दुनिया में जादू का अर्थ किसी को डराना या नुकसान पहुंचाना नहीं है. सफल जादूगरनी बनने की परंपरा के तहत उसे एक साल के लिए अपना घर छोड़कर नए शहर में रहना और अपनी पहचान बनाना है. उसकी झाड़ू उसे सिर्फ आसमान में उड़ने की शक्ति नहीं देती. वह उसे घर से बाहर निकलने, जिम्मेदारियां संभालने और अपने दम पर खड़े होने की यात्रा पर ले जाती है.
किकी की उड़ान इसलिए खास है क्योंकि वह कल्पना और वास्तविक जीवन के बीच की दूरी को मिटा देती है. यहां झाड़ू पर उड़ना किसी जादुई दुनिया से पलायन नहीं, बल्कि वास्तविक दुनिया में अपनी जगह बनाने का रूपक है. मियाजाकी ने जादूगरनी और झाड़ू की सदियों पुरानी छवि से भय को लगभग निकाल दिया और उसकी जगह बचपन से युवावस्था की ओर बढ़ने, आत्मविश्वास खोने और फिर उसे वापस पाने की कहानी रख दी.
इसके कुछ साल बाद जे.के. रोलिंग की Harry Potter सीरीज ने झाड़ू को वैश्विक पॉप कल्चर में एक बिल्कुल नई पहचान दे दी. 1997 में प्रकाशित Harry Potter and the Philosopher's Stone से शुरू हुई इस जादुई दुनिया में झाड़ू उड़ने का साधन तो है ही, लेकिन उससे कहीं ज्यादा है. Nimbus 2000 और Firebolt जैसी झाड़ू यहां लगभग किसी आधुनिक स्पोर्ट्स कार या हाई-परफॉर्मेंस मशीन की तरह दिखाई देती हैं तेज, तकनीकी और अपने मालिक की पहचान का हिस्सा. और फिर आता है क्विडिच. इस काल्पनिक खेल ने झाड़ू को सिर्फ जादुई परिवहन के साधन से निकालकर खेल, प्रतिस्पर्धा, कौशल और रोमांच के केंद्र में ला खड़ा किया. हैरी के लिए झाड़ू पर उड़ना सिर्फ जादू नहीं, उसकी प्रतिभा और खेल की दुनिया से जुड़ने का माध्यम भी है.
दिलचस्प बात यह है कि किकी और हैरी दोनों के पास झाड़ू है, लेकिन उनके लिए उसका अर्थ बिल्कुल अलग है. किकी की झाड़ू उसे आत्मनिर्भरता, जिम्मेदारी और जीवन के संघर्षों से जोड़ती है, जबकि हैरी की झाड़ू उसे खेल, दोस्ती, प्रतिस्पर्धा और एक असाधारण जादुई दुनिया में ले जाती है. एक के लिए वह बड़े होने की यात्रा है, दूसरे के लिए रोमांच की.
यही झाड़ू की सांस्कृतिक यात्रा का सबसे दिलचस्प पहलू है. एक ऐसी वस्तु जिसका मूल काम जमीन पर पड़ी धूल को हटाना है, वह इंसानी कल्पना में जमीन से ऊपर उठ गई. लोकविश्वासों में उसने जादू का रूप लिया, यूरोपीय कल्पनाओं में चुड़ैलों की सवारी बनी, Fantasia में जादू के अनियंत्रित असर का हिस्सा बनी, Kiki's Delivery Service में आत्मनिर्भरता और आजादी की उड़ान बनी और हैरी पॉटर में खेल और रोमांच का आधार.
शायद झाड़ू की सबसे खूबसूरत कहानी यही है कि इंसान ने उसे जमीन पर पड़ी धूल साफ करने के लिए बनाया, लेकिन कल्पना ने उसी पर बैठकर आसमान की यात्रा शुरू कर दी. एक मामूली घरेलू वस्तु ने आखिरकार हमें यह याद दिलाया कि जादू हमेशा किसी दूसरी दुनिया से नहीं आता. कभी-कभी वह हमारे अपने घर के किसी कोने में पड़ी एक साधारण सी चीज से भी जन्म ले सकता है.
रितु तोमर