11 सितंबर 2001 का वो मंजर इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो चुका है. इस खौफनाक आतंकी हमले की 25वीं बरसी पर दुनिया एक बार फिर उन बेगुनाह पीड़ितों को याद कर रही है जिन्होंने अपनी जान गंवाई, और उन जांबाज हीरोज को नमन कर रही है जिन्होंने अपनी परवाह किए बिना दूसरों को बचाया. 9/11 की इस दुखद घटना ने न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की रफ्तार और सोच को बदलकर रख दिया.
बीते 25 सालों में कई बेहतरीन फिल्ममेकर्स ने इस घटना की बारीकियों, उस दिन के खौफ और उसके बाद के संघर्ष को पर्दे पर उतारने की कोशिश की है. ऐसे में हम आपको ऐसी अहम डॉक्यूमेंट्रीज, सीरीज और फिल्म बताएंगे. जो हमें इस घटना को करीब से समझने का मौका देती हैं.
टर्निंग पॉइंट: जेनरेशन 9/11 (Turning Point: Generation)
नेटफ्लिक्स की यह डॉक्यूमेंट्री सीरीज उन युवाओं की कहानी बयां करती है जिनकी जिंदगी 25 साल पहले हुए इस हादसे से पूरी तरह बदल गई. इसमें उन बच्चों के दर्द को दिखाया गया है, जिन्होंने उस दिन अपने माता-पिता को खो दिया, साथ ही उन पत्रकारों और सैनिकों की आपबीती भी शामिल है जो 'आतंक के खिलाफ जंग' और अफगानिस्तान से वापसी के दौर से प्रभावित रहे.
The Heroism and Resiliency of 9/11
71 वर्षीय गैरी सिनेसे की आवाज में सजी यह डॉक्यूमेंट्री दिखाती है कि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद भी इंसानियत और हिम्मत कैसे जीत सकती है. आर्काइवल फुटेज, पर्सनल एक्सपीरियंस और सिनेमाई सीन्स के मेल से बनी यह फिल्म संदेश देती है कि बड़े से बड़े नुकसान के बावजूद एकजुटता और बहादुरी ही उम्मीद का असली जरिया बनती हैं.
इनसाइड द प्रेसिडेंट्स वॉर रूम (Inside the President's War Room)
जब तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश एक स्कूल में बच्चों के बीच बैठे थे और उन्हें हमले की खबर दी गई थी, वो दृश्य हर किसी के दिमाग में ताजा है. Apple TV की यह डॉक्यूमेंट्री दिखाती है कि उस खबर के बाद अगले 12 घंटों तक अमेरिकी सत्ता के शीर्ष कार्यालय के अंदर क्या-क्या हुआ. 80 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति बुश, डिक चेनी, कोंडोलीजा राइस और कॉलिन पॉवेल जैसे दिग्गजों के इंटरव्यू इस डॉक्यूमेंट्री को बेहद खास बनाते हैं.
द लूमिंग टावर (The Looming Tower)
लॉरेंस राइट की पुलित्ज़र पुरस्कार विजेता किताब पर आधारित यह 10 एपिसोड की सीरीज 1990 के दशक में ओसामा बिन लादेन और अल-कायदा के उभार को दर्शाती है. जेफ डेनियल्स (71), एलेक बाल्डविन (68) और पीटर सार्सगार्ड (55) के एक्टिंग से सजी यह सीरीज दिखाती है कि कैसे FBI और CIA के बीच की आपसी खींचतान ने इस भीषण त्रासदी का रास्ता तैयार किया था.
जीरो डार्क थर्टी (Zero Dark Thirty)
साल 2012 में आई कैथरीन बिगलो की फिल्म 'जीरो डार्क थर्टी' ने न केवल उस खास रात की घटना को पर्दे पर जीवंत किया, बल्कि 9/11 हमलों के बाद ओसामा बिन लादेन की एक दशक तक चली तलाश की पूरी कहानी बयां की.
ऑस्कर के लिए नामांकित होने के साथ-साथ यह फिल्म विवादों में भी घिरी रही. फिल्म में दो हेलिकॉप्टरों की मदद से ओसामा के ठिकाने पर की गई छापेमारी को बेहद शानदार ढंग से दिखाया गया है.
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (World Trade Center)
दिग्गज निर्देशक ओलिवर स्टोन के निर्देशन में बनी यह फिल्म साल 2006 में रिलीज हुई थी. इसकी कहानी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के मलबे के नीचे फंसे दो पुलिस अधिकारियों के इर्द-गिर्द घूमती है.
माई नेम इज खान (My Name Is Khan)
हिंदी सिनेमा में भी इस विषय को लेकर बेहद सफल और प्रभावकारी फिल्में बनाई गई हैं, जिनमें शाहरुख खान की 'माय नेम इज खान' प्रमुख हैं. 'माई नेम इज खान' की कहानी 9/11 हमलों के बाद अमेरिका में रहने वाले मुसलमानों की दुर्दशा और चुनौतियों पर आधारित थी. अपने समय की इस सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में ये शुमार है. इस फिल्म को लेकर भारत में विवाद भी हुआ था.
रेन ओवर मी (Reign Over Me)
साल 2007 में पर्दे पर आई फिल्म 'रेन ओवर मी' का निर्देशन माइक बाइंडर्स ने किया था. इस फिल्म की भावुक कर देने वाली कहानी एक ऐसे इंसान के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसने 9/11 के भयानक हमलों में अपनी पत्नी को हमेशा-हमेशा के लिए खो दिया था.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क