बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले में फिर एक बार कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम सामने आया है. उसके हमलावर राजस्थान से पकड़े गए हैं. इतने समय में बॉलीवुड के कई कलाकारों पर हमले हुए हैं. जब भी किसी फिल्म स्टार को धमकी मिलती है या उसे पर हमला होता है तो लॉरेंस बिश्नोई का नाम सामने आ जाता है, जो अभी अहमदाबाद की साबरमती जेल में बंद है.
पुलिस सूत्रों की माने तो लॉरेंस बिश्नोई अभी हाई सिक्योरिटी जोन मे कैद है और कोई भी व्यक्ति उसे मिल नहीं सकता. उसकी सुरक्षा को लेकर उसे ऐसी जगह रखा गया है जहां पर वो किसी और कैदी से भी मिल ना पाए. साल 2023 से लॉरेंस बिश्नोई साबरमती जेल में बंद है जहां पर उसे किसी से मिलने की अनुमति नहीं है सिर्फ और सिर्फ कानूनी सहायता के लिए उसके वकील और कानूनी टीम उसको मिल सकती है.
साबरमती जेल में कैद है लॉरेंस बिश्नोई
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साल 2023 में किए ऑर्डर के मुताबिक लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती जेल से केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी के बगैर बाहर नहीं निकाला जा सकता. यानी कि अगर किसी पुलिस को उसकी पूछताछ करनी है तो NIA कोर्ट से मंजूरी लेनी पड़ती है और उसके बाद साबरमती जेल में आकर ही वो पूछताछ कर सकते हैं.
किसी भी राज्य की पुलिस को लॉरेंस बिश्नोई की कस्टडी केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी के बगैर नहीं मिल सकती. कुछ समय पहले राजस्थान पुलिस ने आकर लॉरेंस से पूछताछ की थी इसके अलावा अभी तक किसी और राज्य की पुलिस पूछताछ करने के लिए अहमदाबाद नहीं आई.
बाबा सिद्दीकी हत्याकांड मामले के वक्त भी माना जा रहा था कि मुंबई पुलिस लॉरेंस बिश्नोई की कस्टडी के लिए आएगी पर ऐसा कुछ उसे वक्त भी नहीं हुआ था और अब फिर एक बार टाइगर श्रॉफ मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का हाथ सामने आया है. अब देखना ये होगा कि क्या इस बार मुंबई पुलिस अहमदाबाद जाकर लॉरेंस से पूछताछ करेगी या फिर उसकी कस्टडी के लिए कोर्ट से और केंद्रीय गृह मंत्रालय से मंजूरी मांगेंगे.
क्या है CRPC 268 का नोटिफिकेशन?
केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 268 के तहत साल 2023 मे गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को लेकर आदेश जारी किया है, जिसमें लॉरेंस को लेकर कई पाबंदियां लागू हो जाती है. ये धारा केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) को ये शक्ति देती है कि वो किसी विशिष्ट कैदी को जेल से बाहर ले जाने या अन्य राज्य की पुलिस को उसकी हिरासत देने पर रोक लगा सके.
अगस्त 2023 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ये आदेश जारी किया था, जिसे हर साल एक वर्ष के लिए आगे बढ़ाया जाता है. इसका उद्देश्य लॉरेंस बिश्नोई को किसी भी तरह के बाहरी खतरे या विरोधी गैंग के हमलों से बचाना है. इसी आदेश की वजह से दूसरे राज्य की पुलिस को बिना गृह मंत्रालय की अनुमती के लॉरेंस बिश्नोई की कस्टडी नहीं मिल सकती. कोर्ट मे चल रहे सभी मामलों मे उसे सिर्फ वीडियो कॉन्फ्रंस से पेश किया जाता है.
ब्रिजेश दोशी