एक्ट्रेस रानी मुखर्जी ने अपने शानदार करियर में एक और उपलब्धि हासिल की है. शुक्रवार को मेलबर्न के इंडियन फिल्म फेस्टिवल (IFFM) के तहत फेडरेशन स्क्वायर में आयोजित एक खास समारोह में, ऑस्ट्रेलिया की ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने बॉलीवुड स्टार रानी मुखर्जी को 'ऑनररी डॉक्टर ऑफ़ लेटर्स' (D.Litt.) की उपाधि से सम्मानित किया. यह सम्मान पाते ही रानी इमोशनल हो गईं और उनकी आंखों में आंसू आ गए, जिससे यह पल और भी खास बन गया.
यह प्रतिष्ठित सम्मान भारतीय सिनेमा में मुखर्जी के लगभग तीन दशकों के योगदान के साथ-साथ महिलाओं, बच्चों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए उनकी लगातार वकालत को मान्यता देता है. इस इवेंट का एक वायरल वीडियो सामने आया है जिसमें मुखर्जी भावुक होकर अपने आंसू पोंछती हुई दिखाई दे रही हैं.
सम्मान पाने वाली दूसरी एक्टर
इस सम्मान के साथ, 48 वर्षीय रानी मुखर्जी शाहरुख खान के बाद ला ट्रोब यूनिवर्सिटी का सर्वोच्च सम्मान पाने वाली दूसरी भारतीय फिल्म हस्ती बन गई हैं. खान को 2019 में सिनेमा और समाज सेवा में उनके योगदान के लिए यूनिवर्सिटी ने सम्मानित किया था और बाद में ला ट्रोब ने उनके नाम पर एक PhD स्कॉलरशिप की घोषणा की थी.
रानी मुखर्जी ने क्या कहा?
इस सम्मान पर बात करते हुए, मुखर्जी ने इस मानद डॉक्टरेट को अपने जीवन के सबसे विनम्र पलों में से एक बताया. अपने सफर को याद करते हुए, एक्ट्रेस ने बताया कि कैसे सिनेमा उनके परिवार और देश को गौरवान्वित करने का जरिया बना.
उन्होंने कहा, 'जब मैं छोटी बच्ची थी, तो बाकी लोगों की तरह मैं भी अपने परिवार और देश का नाम रोशन करना चाहती थी. मुझे नहीं पता था कि यह कैसे करना है, लेकिन मुझे पता था कि अगर मैं किसी चीज में अच्छा करने की पूरी कोशिश करूंगी, तो मेरे माता-पिता खुश होंगे. सिनेमा इसे हासिल करने का जरिया बन गया.'
रानी मुखर्जी ने कहा, 'मैं अपने करियर की शुरुआत से ही जोखिम लेने वाली रही हूं! मैंने हमेशा ऐसी फिल्में चुनी हैं जिन्होंने सबसे पहले मेरे दिल पर असर डाला है!! ऐसी कहानी जिसे सुनाया जाना जरूरी हो! ऐसी कहानी जो प्रेरित और सशक्त बनाए.'
एक्ट्रेस ने अपनी फिल्मों के असर पर बात करते हुए कहा कि अगर उनके काम से एक भी इंसान भारत और यहां की महिलाओं को बेहतर ढंग से समझ पाया है, बातचीत को बढ़ावा मिला है या लोगों में एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति जगी है, तो उन्हें लगता है कि उन्होंने सिर्फ एक एक्ट्रेस होने से कहीं बड़ी जिम्मेदारी निभाई है.
वहीं ला ट्रोब यूनिवर्सिटी के चांसलर माननीय जॉन ब्रम्बी AO ने सिनेमा और समाज में मुखर्जी के योगदान की तारीफ करते हुए कहा कि उनके काम ने मनोरंजन से आगे बढ़कर सामाजिक न्याय, समानता और सबको साथ लेकर चलने (इनक्लूज़न) जैसे मुद्दों पर बातचीत शुरू की है.
रानी मुखर्जी का फिल्मी करियर
अपने करियर के दौरान, मुखर्जी ने 'ब्लैक', 'नो वन किल्ड जेसिका', 'हिचकी', 'मर्दानी' फ्रैंचाइजी और 'मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे' जैसी फिल्मों के जरिए महिलाओं के अधिकार, जेंडर जस्टिस, दिव्यांगों को शामिल करने और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को उजागर किया है. यह सम्मान स्वीकार करते हुए मुखर्जी ने इसे भारत और दुनिया भर में मौजूद अपने दर्शकों को समर्पित किया.
उन्होंने कहा, "मैं गर्व के साथ यह सम्मान न सिर्फ रानी मुखर्जी के तौर पर, बल्कि एक ऐसी भारतीय के तौर पर भी स्वीकार करती हूं जिसे ऑस्ट्रेलिया में अपनी संस्कृति और अपने सिनेमा का जश्न मनाते हुए देखकर गर्व महसूस हो रहा है.' स्पीच के दौरान एक्ट्रेस भावुक हो गईं और उन्होंने यह सम्मान अपनी बेटी को डेडिकेट किया और कहा आदिरा, 'मैं तुमसे प्यार करती हूं.'
इस बीच, एक्ट्रेस को आखिरी बार 'मर्दानी 3' में देखा गया था. अभिराज मीनावाला द्वारा निर्देशित और यश राज फिल्म्स के तहत आदित्य चोपड़ा द्वारा प्रोड्यूस की गई 'मर्दानी 3' में वह एक बार फिर सख्त IPS ऑफिसर शिवानी शिवाजी रॉय के रोल में नजर आईं, जो इस फ्रैंचाइजी की पहचान बन चुका है. उनके साथ जानकी बोदीवाला और मल्लिका प्रसाद भी अहम भूमिकाओं में हैं.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क