'रावण' ने पूरा ट्रेलर लूट लिया... लेकिन क्या इसका मतलब ये है कि 'राम' कमजोर पड़ गए? सोशल मीडिया पर इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है. नितेश तिवारी की 'रामायण' का ट्रेलर रिलीज होते ही यश के रावण अवतार की हर तरफ चर्चा शुरू हो गई. कई लोग कह रहे हैं कि ट्रेलर में यश ने रणबीर कपूर को ओवरशैडो कर दिया. लेकिन क्या सच में कहानी इतनी सी है? शायद नहीं.
ट्रेलर का मकसद क्या था?
हर बड़े ट्रेलर का एक मकसद होता है- दर्शकों के मन में उत्सुकता पैदा करना. और अगर कहानी में सबसे बड़ा खतरा रावण है, तो जाहिर है कि उसकी मौजूदगी सबसे ज्यादा असरदार दिखाई जाएगी.
यश का रौद्र रूप, भारी आवाज, विशाल स्क्रीन प्रेजेंस और आक्रामक बॉडी लैंग्वेज पहली नजर में ध्यान खींचती है. यही वजह है कि ट्रेलर के बाद सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा भी रावण की हो रही है. कई समीक्षाओं और दर्शकों की शुरुआती प्रतिक्रियाओं में भी यश की स्क्रीन प्रेजेंस को ट्रेलर की सबसे बड़ी ताकत बताया गया.
राम का किरदार कभी 'लाउड' नहीं रहा
अब दूसरी तरफ भगवान राम के चरित्र को देखिए. वाल्मीकि रामायण हो, रामचरितमानस हो या टीवी पर दिखाई गईं रामायणें- राम का व्यक्तित्व हमेशा मर्यादा, धैर्य, करुणा और संयम का प्रतीक रहा है. वह हर बात पर गुस्सा नहीं करते, ऊंची आवाज में नहीं बोलते और अपनी शक्ति का प्रदर्शन भी कम ही करते हैं.
यानी अगर ट्रेलर में रणबीर कपूर शांत, स्थिर और कम संवादों में नजर आए हैं, तो यह किरदार की मूल प्रकृति के अनुरूप भी माना जा सकता है.
विलेन अक्सर ट्रेलर में ज्यादा याद रह जाता है
सिनेमा का इतिहास भी यही कहता है. 'शोले' में गब्बर, 'मिस्टर इंडिया' में मोगैंबो, 'पद्मावत' में अलाउद्दीन खिलजी और 'केजीएफ' में अधीरा जैसे किरदारों ने ट्रेलर में खूब सुर्खियां बटोरी थीं. इसका मतलब यह नहीं था कि फिल्म का हीरो कमजोर था. बल्कि एक दमदार खलनायक ही नायक की जीत को और बड़ा बनाता है.
ताजा उदाहरण के तौर पर धुरंधर को भी देखा जा सकता है. हमजा अली मजारी बने रणवीर सिंह पर पहले पार्ट में काफी सवाल उठे थे. कहा गया कि ल्यारी के किंग रहमान डकैन का किरदार निभा रहे अक्षय खन्ना ने उन्हें आउटशाइन कर दिया. लेकिन फिल्म के दूसरे पार्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया था. फिल्म ने बता दिया कि कब... क्यों.. क्या...और कैसे किया गया था.
रामायण की पूरी कथा भी इसी संघर्ष पर टिकी है. अगर रावण कमजोर लगे, तो राम की विजय उतनी प्रभावशाली महसूस नहीं होगी.
एक ट्रेलर पूरी फिल्म नहीं होता
दिलचस्प बात यह है कि ट्रेलर रिलीज से पहले रणबीर कपूर खुद कह चुके हैं कि यश का रावण पारंपरिक प्रस्तुति से अलग होगा. वहीं यश ने भी रणबीर की कास्टिंग का समर्थन करते हुए उनके समर्पण की तारीफ की थी. यानी मेकर्स शुरुआत से ही रावण को एक प्रभावशाली और मजबूत प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित करना चाहते थे.
आज सोशल मीडिया के दौर में 3 मिनट का ट्रेलर ही पूरी फिल्म का फैसला करने लगा है. लेकिन ट्रेलर सिर्फ कहानी की झलक दिखाता है, पूरी यात्रा नहीं. कई बार ट्रेलर का सबसे दमदार किरदार फिल्म में वैसा असर नहीं छोड़ पाता और कई बार शांत दिखने वाला किरदार पूरी फिल्म खत्म होने के बाद सबसे ज्यादा याद रह जाता है.
'रामायण' के ट्रेलर को लेकर भी कुछ दर्शकों ने यश की तारीफ की है, तो कुछ ने रणबीर की बैलेंस एक्टिंग को किरदार के अनुकूल माना है. ऑनलाइन रिएक्शन्स अभी भी बंटी हुई हैं.
फैसला ट्रेलर नहीं, फिल्म करेगी
यश का रावण ट्रेलर में प्रभावशाली लगा, इसमें शायद ही किसी को संदेह हो. लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकाल लेना कि रणबीर का राम फीका पड़ गया है, अभी जल्दबाजी होगी.
आखिरकार रामायण सिर्फ रावण की दहाड़ की कहानी नहीं है, बल्कि राम के धैर्य, मर्यादा और धर्म की भी कहानी है. और इन किरदारों की असली परीक्षा ट्रेलर में नहीं, बल्कि पूरी फिल्म में होगी.
तब तक आप अपनी राय देने के लिए स्वतंत्र हैं.
आरती गुप्ता