भारतीय सिनेमा में नाना पाटेकर का नाम एक ऐसे अदाकार के तौर पर लिया जाता है जिनकी दमदार एक्टिंग, कड़क आवाज और स्क्रीन प्रेजेंस का हर कोई कायल है. 'क्रांतिवीर', 'तिरंगा' और 'वेलकम' जैसी फिल्मों में अपने संजीदा और गुस्सैल किरदारों से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले नाना पाटेकर को भले ही इंडस्ट्री में 'बैड बॉय' या सीरियस एक्टर के तौर पर देखा जाता हो, लेकिन जब-जब उन्होंने रोमांटिक फिल्मों का रुख किया, तब-तब दर्शकों को एक अलग ही जादू देखने को मिला.
उनका सहज अंदाज और सादगी से भरा प्यार पर्दे पर इतना सच्चा लगता है कि देखने वाला भावुक हो जाए. आइए जानते हैं नाना पाटेकर की उन 5 बेहतरीन रोमांटिक फिल्मों के बारे में, जिन्होंने प्यार के अहसास को एक नए नजरिए से पेश किया.
तड़का: लव इज कुकिंग (2022)
साल 2022 में जी5 (ZEE5) पर आई फिल्म 'तड़का' एक बेहद खूबसूरत और मजेदार रोमांटिक कॉमेडी है, जिसका निर्देशन प्रकाश राज ने किया था. यह मशहूर मलयालम फिल्म 'सॉल्ट एन' पेपर' का रीमेक है. कहानी तुकाराम (नाना पाटेकर) और मधुरा (श्रिया सरन) की है, जो एक रॉन्ग नंबर के जरिए एक-दूसरे के करीब आते हैं. अपनी झिझक के कारण वे आमने-सामने मिलने के बजाय अपनी जगह सिद्धार्थ (अली फजल) और निकोल (तापसी पन्नू) को भेजते हैं, जिसके बाद गलतफहमियों और हंसी का एक जबरदस्त दौर शुरू होता है.
इस फिल्म में नाना पाटेकर का सादगी भरा रोमांस इरफान खान की 'द लंचबॉक्स' की याद दिलाता है और लंबे समय बाद उन्हें ऐसे हल्के-फुल्के रोमांटिक अंदाज में देखना फैंस के लिए किसी तोहफे से कम नहीं था.
वजूद (1998)
1998 में रिलीज हुई फिल्म 'वजूद' कोई साधारण लव स्टोरी नहीं है, बल्कि यह एक सिरफिरे आशिक के जुनून और बदले की कहानी है. फिल्म में नाना पाटेकर ने मल्हार अग्निहोत्री का किरदार निभाया था, जो एक क्लर्क होने के साथ-साथ एक बेहतरीन थिएटर आर्टिस्ट भी है. उसे अपने साथ काम करने वाली अपूर्वा (माधुरी दीक्षित) से प्यार हो जाता है, लेकिन वह अपूर्वा की सिर्फ इंसानियत और दयालुता को अपना प्यार समझ बैठता है.
इस एकतरफा मोहब्बत में वह इस कदर अंधा हो जाता है कि जुर्म की राह पर निकल पड़ता है. नाना पाटेकर ने इस फिल्म में दुख, गुस्सा और एकतरफा प्यार के दर्द को इतने जीवंत तरीके से पर्दे पर उतारा है कि यह उनके करियर की सबसे यादगार परफॉर्मेंस में से एक बन गई.
वेडिंग एनिवर्सरी (2017)
शेखर एस. झा के निर्देशन में बनी फिल्म 'वेडिंग एनिवर्सरी' एक अलग तरह के अहसास और ठहराव की कहानी है. फिल्म में कहानी (माही गिल) अपने पति निर्भय (प्रियांशु चटर्जी) के साथ अपनी शादी की सालगिरह मनाने गोवा जाती है, लेकिन पति के काम में फंस जाने के कारण उसे अकेले ही रुकना पड़ता है. अपना वक्त काटने के लिए वह अपने पसंदीदा लेखक नागार्जुन (नाना पाटेकर) की किताब पढ़ने लगती है, और कहानी में मोड़ तब आता है जब अचानक लेखक नागार्जुन खुद उसके दरवाजे पर पहुंच जाते हैं.
दोनों के बीच की बातचीत और मुलाकातों का दौर बेहद दिलचस्प है. नाना पाटेकर का शांत स्वभाव और माही गिल के साथ उनकी सहज केमिस्ट्री इस फिल्म को सुस्त दोपहर में ताजी हवा के झोंके की तरह महसूस कराती है.
गुलाम-ए-मुस्तफा (1997)
गैंगस्टर वर्ल्ड, बंदूकें और एक अनकहा प्यार- इन सब चीजों को अगर किसी फिल्म में सबसे खूबसूरती से पिरोया गया है, तो वह है 'गुलाम-ए-मुस्तफा'. 1997 में आई इस सुपरहिट फिल्म में नाना पाटेकर और परेश रावल की जुगलबंदी को काफी सराहा गया था. भले ही यह विशुद्ध रूप से एक रोमांटिक फिल्म न हो, लेकिन कविता (रवीना टंडन) के लिए मुस्तफा (नाना पाटेकर) की आंखों में दिखने वाला सम्मान और प्यार बिना शब्दों के ही सब कुछ बयां कर देता है.
नाना पाटेकर ने एक कड़क गैंगस्टर के अंदर छिपे हुए सच्चे आशिक के किरदार को इतनी ईमानदारी से निभाया कि यह फिल्म आज भी लोगों के दिलों के करीब है.
हॉर्न 'ओके' प्लीज (2009)
2009 में आई फिल्म 'हॉर्न 'ओके' प्लीज' एक हल्की-फुल्की और अनोखी लव स्टोरी है, जिसमें नाना पाटेकर के साथ रिमी सेन और मुजम्मिल इब्राहिम मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे. फिल्म में नाना पाटेकर ने गोविंदा नाम के एक करोड़पति ट्रक ड्राइवर का किरदार निभाया है, जो अपनी जिंदगी में सिर्फ प्यार बांटने पर यकीन रखता है. कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब एक लड़का अजय (मुजम्मिल इब्राहिम) अपनी गर्लफ्रेंड सिया (रिमी सेन) को पाने के लिए गोविंदा से मदद मांगता है, और बाद में पता चलता है कि सिया की जुड़वां बहन रिया खुद गोविंदा की पत्नी है. कमजोर स्क्रिप्ट के बावजूद नाना पाटेकर का नैचुरल चार्म और उनकी कॉमेडी टाइमिंग पूरी फिल्म को संभाल लेती है.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क