बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का का 75 साल की उम्र में गुरुवार सुबह निधन हो गया. इसके बाद उनसे जुड़े पुराने विवाद फिर चर्चा में हैं. सबसे बड़ा मामला तनुश्री दत्ता के आरोपों का रहा, जिसमें पुलिस और अदालत ने नाना के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं पाए. 2023 में वाराणसी का थप्पड़ वीडियो और 2026 में अभिनेत्री मधु का सुनाया पुराना किस्सा भी याद किया जा रहा है. दूसरी तरफ किसानों के लिए उनका सामाजिक काम भी उनकी पहचान रहा.
नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ फिल्मों और दमदार अभिनय तक सीमित नहीं रही. कभी गंभीर आरोप लगे, कभी शूटिंग का वीडियो वायरल हुआ और कभी किसी सह कलाकार ने उनके काम करने के पुराने तरीके पर अनुभव साझा किया. इन घटनाओं की प्रकृति और संदर्भ अलग हैं, इसलिए इन्हें एक ही तरह का आरोप मानना सही नहीं होगा.
तनुश्री दत्ता का MeToo आरोप
नाना से जुड़ा सबसे बड़ा और लंबे समय तक चर्चा में रहा विवाद अभिनेत्री तनुश्री दत्ता का है. मामला 2008 की फिल्म 'Horn Ok Pleassss' की शूटिंग से शुरू हुआ. तनुश्री ने आरोप लगाया कि एक गाने की शूटिंग के दौरान नाना ने उनसे गलत व्यवहार किया और डांस स्टेप सिखाने के बहाने उन्हें गलत तरीके से छुआ. उनका कहना था कि गाना पहले उनके सोलो परफॉर्मेंस के तौर पर तय था, लेकिन बाद में नाना को भी इसमें शामिल किया गया.
तनुश्री के मुताबिक, उन्होंने शूटिंग के दौरान असहज स्टेप और नाना के साथ इंटीमेट डांस करने से मना कर दिया. इसके बाद वह सेट छोड़कर अपनी वैनिटी वैन में चली गईं. वह करीब तीन घंटे वैन के अंदर रहीं और बाद में शूटिंग पैकअप कर दी गई. सेट से निकलते समय तनुश्री के स्टाफ और मीडियाकर्मियों के बीच झड़प की बात भी सामने आई थी.
2018 में मीटू आंदोलन के दौरान तनुश्री ने करीब 10 साल पुराने इस मामले को फिर सार्वजनिक किया और नाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई. मामले में निर्देशक राकेश सारंग, कोरियोग्राफर गणेश आचार्य और निर्माता समी सिद्दीकी के नाम भी सामने आए. तनुश्री का आरोप था कि विरोध के बाद उनके साथ बदसलूकी हुई और उनकी कार पर हमला किया गया. एमएनएस ने उस समय इन आरोपों में अपनी भूमिका से इनकार किया था.
नाना ने इन आरोपों से लगातार इनकार किया. उनके वकील ने कहा था कि 2008 की घटना वैसी नहीं हुई थी, जैसा तनुश्री बता रही थीं. नाना की ओर से यह भी कहा गया कि सेट पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और आरोपों में कोई सच्चाई नहीं थी.
जांच के बाद 2019 में मुंबई पुलिस ने बी समरी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की. पुलिस को आरोप साबित करने लायक ठोस सबूत नहीं मिले. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि घटना के समय मौजूद 13 गवाहों ने नाना द्वारा यौन उत्पीड़न की पुष्टि नहीं की. फिर मामला अदालत पहुंचा. मार्च 2025 में मुंबई की मजिस्ट्रेट अदालत ने तनुश्री की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया था. अदालत ने 2008 के आरोपों को समय सीमा से जुड़ा माना और 2018 की घटना को लेकर भी नाना के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं पाए.
शूटिंग के दौरान फैन को थप्पड़ मारने का वीडियो
दूसरा बड़ा विवाद नवंबर 2023 में आया. वाराणसी में फिल्म 'Journey' की शूटिंग के दौरान करीब 10 सेकेंड का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें नाना एक युवक के सिर पर थप्पड़ मारते दिखे. शुरू में इसे सेल्फी लेने आए फैन को मारने का मामला बताया गया. इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी जमकर आलोचना हुई. निर्देशक अनिल शर्मा ने सफाई दी कि मामला वैसा नहीं था, जैसा समझा जा रहा था. नाना ने भी वीडियो जारी कर बताया कि सीन की रिहर्सल चल रही थी, जिसमें एक लड़के को उनके पास आना था और उन्हें उसे थप्पड़ मारना था. उन्होंने युवक को टीम का सदस्य समझा और सीन के हिसाब से थप्पड़ मार दिया. बाद में पता चला कि वह शूट का हिस्सा नहीं था. नाना ने माफी मांगी और इसे गलतफहमी बताया. इसलिए इसे जानबूझकर फैन को मारने का मामला कहना उपलब्ध सफाई के आधार पर सही नहीं होगा.
मधु को शूटिंग में सच में थप्पड़ मारने का किस्सा
तीसरा किस्सा जून 2026 में चर्चा में आया. अभिनेत्री मधु ने 1997 की फिल्म 'Yeshwant' की शूटिंग का अनुभव साझा किया. मधु ने बताया कि एक भावुक सीन में उन्हें ग्लिसरीन लगानी थी, पर नाना ने रोक दिया और कहा कि उन्हें अपने आप रोना चाहिए. जब वह ऐसा नहीं कर पाईं, तो नाना ने सीन असली बनाने के लिए उन्हें सच में थप्पड़ मार दिया. थप्पड़ इतना तेज था कि आंखों में आंसू आ गए. इसके बाद मधु ने भी पलटकर नाना को थप्पड़ मारा. उनके मुताबिक नाना के साथ काम करने से उनके अभिनय पर असर पड़ा और उन्होंने मेथड एक्टिंग के बारे में बहुत कुछ सीखा. यह पुरानी याद है, इसलिए इसे नया आरोप या कानूनी विवाद कहना सही नहीं होगा. फिर भी नाना के असलियत के करीब जाने वाले अंदाज की चर्चा में यह किस्सा अहम है.
विवादों के साथ सामाजिक सरोकार भी
उनकी छवि का दूसरा पहलू किसानों के मुद्दों पर उनका काम रहा. 2015 में उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ नाम फाउंडेशन शुरू की, जो महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों में किसानों और उनके परिवारों की मदद करती रही. किसान विधवाओं के एक समूह ने तनुश्री विवाद के दौरान नाना के समर्थन में प्रदर्शन किया और उनके किसान हितैषी काम का हवाला दिया. किसान आंदोलन के दौरान नाना फिर किसानों के समर्थन में दिखे. नासिक में उन्होंने कहा कि किसानों को सिर्फ सरकार से मांगने के बजाय तय करना चाहिए कि वे कैसी सरकार चाहते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वह राजनीति में नहीं जा सकते, क्योंकि जो उनके पेट में है वही मुंह पर आ जाता है.
नाना का सफर सिर्फ किरदारों की कहानी नहीं है. उनकी विरासत को समझने के लिए अभिनय और सामाजिक सरोकार के साथ इन विवादों को भी देखना जरूरी है.
aajtak.in