'गोविंदा, आमिर खान से ज्यादा परफेक्शनिस्ट', बोलीं एक्ट्रेस शगुफ्ता, किए कई चौंकाने वाले खुलासे

हाल ही में एक इंटरव्यू में शगुफ्ता अली ने गोविंदा के साथ काम करने के अपने एक्सपीरियंस के बारे में बात की. उन्होंने यह भी बताया कि सेट पर गोविंदा के देर से आने की आदत से कादर खान अक्सर परेशान हो जाते थे.

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गोविंदा पर बोलीं शगुफ्ता (Photo: Screengrab) गोविंदा पर बोलीं शगुफ्ता (Photo: Screengrab)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 26 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:00 PM IST

एक्टर गोविंदा अपनी एक्टिंग के लिए हमेशा से पसंद किए जाते रहे हैं. हालांकि, सेट पर देर से आने की उनकी आदत अक्सर उनके साथ काम करने वाले कलाकारों के बीच चर्चा का विषय रही है. अब एक्ट्रेस शगुफ्ता अली ने गोविंदा के साथ काम करने के अपने एक्सपीरियंस के बारे में बताया. उन्होंने यह भी बताया कि सेट पर देर से आने की उनकी आदत से कादर खान अक्सर परेशान हो जाते थे.

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गोविंदा के देर से आने पर शगुफ्ता अली
 सिद्धार्थ कन्नन के साथ बातचीत में 'हीरो नंबर 1' के लिए ऊटी में हुए आउटडोर शेड्यूल को याद करते हुए शगुफ्ता अली ने कहा, 'चाहे गोविंदा या करिश्मा सेट पर हों या न हों, हम बहुत मजा करते थे. यह हमारे लिए एक पेड पिकनिक जैसा था. ऊटी में आउटडोर शूट बहुत अच्छा रहा. हम मिथुन दा के होटल में रुके थे. जब उन्हें इस बारे में पता चला, तो वे हमसे मिलने आए और हमें अपने हाथ से बना सी-फूड खिलाया.'

शगुफ्ता ने आगे बताया कि गोविंदा अक्सर तय समय से चार-पांच घंटे देरी से आते थे. उन्होंने कहा, 'गोविंदा यहां भी सेट पर देर से आते थे. अगर शिफ्ट सुबह 9 बजे की होती, तो वे दोपहर 1 या 2 बजे आते थे, उससे पहले कभी नहीं. गोविंदा के साथ बस यही एक समस्या थी; वरना वे बहुत अच्छे इंसान हैं. मैंने उनके साथ 3-4 फिल्में की हैं. वे बहुत अच्छे और मजाकिया इंसान हैं. वे 25 बार रिहर्सल करते हैं. गोविंदा, आमिर खान से भी ज्यादा परफेक्शनिस्ट हैं. डेविड सर टेक को ओके कर देते थे, लेकिन फिर भी वे जिद करते थे और दूसरों से माफी भी मांगते थे. परफेक्शन को लेकर उनकी नजर इतनी पैनी थी कि उन्हें इस बात की परवाह नहीं होती थी कि सामने वाला व्यक्ति थका हुआ है या नहीं.'

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उन्होंने यह भी बताया कि कादर खान अक्सर गोविंदा के सेट पर देर से आने की शिकायत करते थे. 'कादर खान गोविंदा के देर से आने पर बहुत गुस्सा होते थे; बाकी लोग भी चिढ़ जाते थे. हमें हर दिन उनका इंतजार करना पड़ता था. भले ही वे खुलकर गुस्सा नहीं दिखाते थे, लेकिन वे इस बारे में बड़बड़ाते ज़रूर थे.'

'गोविंदा अंधविश्वासी हैं'- शगुफ्ता अली
इंटरव्यू के दौरान, शगुफ्ता अली ने गोविंदा के आध्यात्मिक पहलू को भी याद किया और बताया कि वे अपने होटल के कमरों में छोटे-छोटे मंदिर भी बना लेते थे. उन्होंने बताया, 'गोविंदा अंधविश्वासी हैं. वे समय को लेकर बहुत पक्के थे. उनका मानना ​​था कि कोई भी काम शुभ समय पर ही करना चाहिए. एक बार हम 'बनारसी बाबू' फिल्म के लिए कोयंबटूर गए थे. हम एक होटल में रुके थे, जहां मेरे कमरे का पंखा काम नहीं कर रहा था. मैंने प्रोडक्शन टीम से शिकायत की थी और किसी तरह यह बात गोविंदा तक पहुंच गई. चूंकि वे तीन दिन के लिए मुंबई जा रहे थे, इसलिए उन्होंने मुझे अपना कमरा देने की पेशकश की. उन्होंने मुझे फोन किया और कहा कि एक बार आकर कमरा देख लूं. जब मैं उनके कमरे में गई, तो देखा कि उन्होंने कमरे के एक तरफ मंदिर बना रखा था. वह बहुत सुंदर लग रहा था. मैं उसका अनादर नहीं करना चाहती थी, इसलिए मैंने वहां रहने से मना कर दिया. लेकिन उन्होंने जिद की और मेरे बैग मंगवा लिए.'

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उन्होंने आगे कहा, 'उनके जाने के बाद, मैं वापस अपने कमरे में चली गई क्योंकि मैं उस जगह को साफ रखना चाहती थी. वे अपनी मां की बहुत बात मानते थे, उनका सम्मान करते थे और उनकी तारीफ करते थे. अगर उनकी मां कहतीं, 'तुम इस समय शूट के लिए जाओगे,' तो वे उनकी बात मानते थे. मुझे नहीं पता कि इसके पीछे कोई ज्योतिषीय कारण था या नहीं.'

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