विनोद तावड़े के तौर पर उत्तर प्रदेश को संगठन का एक महारथी मिल गया है. सुनील बंसल के संगठन महामंत्री पद से जाने के बाद उत्तर प्रदेश में संगठन का कोई बड़ा चेहरा पिछले कुछ सालों से नहीं था. ऐसे में संगठन में एक ऐसे चेहरे की कमी महसूस की जा रही थी, जो सबको साथ लेकर चल सके और किसी के लिए पक्षपाती न हो.
उत्तर प्रदेश में एक कुशल संगठनकर्ता की कमी काफी समय से महसूस की जा रही थी. राधा मोहन सिंह के बाद उत्तर प्रदेश में बीजेपी के प्रभारी का पद खाली था. हालांकि, पिछले कुछ समय से अनौपचारिक तौर पर विनोद तावड़े उत्तर प्रदेश में समन्वय का काम देख रहे थे. मंत्रिमंडल बंटवारे के वक्त भी तावड़े उत्तर प्रदेश में अपनी भूमिका निभा चुके हैं.
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विनोद तावड़े बिहार के भी प्रभारी रह चुके हैं. बिहार में NDA की जीत और सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने तक में उनकी भूमिका मानी जाती है. संगठन के स्तर पर बिहार में उनके काम को अहम माना गया.
महाराष्ट्र सरकार में 16 विभागों के मंत्री रह चुके विनोद तावड़े
महाराष्ट्र से आने वाले विनोद तावड़े महाराष्ट्र सरकार में 16 विभागों के मंत्री रह चुके हैं. संगठन में भी उनका बड़ा नाम है. सभी की बात सुनने और किसी एक खेमे के खास नहीं होने की उनकी पहचान रही है. यही वजह है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है.
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ओबीसी बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं विनोद तावड़े
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर तावड़े के सामने चुनौतियां भी बड़ी हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उत्तर प्रदेश में बड़ा झटका लगा था. ऐसे में पार्टी के सामने संगठन को दोबारा मजबूत करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने की चुनौती है. ओबीसी बिरादरी से आने वाले तावड़े के संगठन कौशल पर बीजेपी ने अपना भरोसा जताया है.
माना जा रहा है कि तावड़े की नियुक्ति से उत्तर प्रदेश में शीर्ष स्तर की खेमेबंदी पर भी विराम लग सकता है. साथ ही संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाने की कोशिश होगी. ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले तावड़े की भूमिका बीजेपी के लिए बेहद अहम रहने वाली है.
कुमार अभिषेक