अशोक सिद्धार्थ के सियासी संन्यास के बावजूद मायावती ने आकाश आनंद को BSP से क्यों निकाला? Inside story

BSP के पूर्व नेता अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के बाद भी मायावती का गुस्सा शांत नहीं हो रहा. उन्होंने आकाश आनंद की सिसायी दूर्दशा के लिए भी अशोक सिद्धार्थ को ही जिम्मेदार ठहराया है.

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क्यों हुआ BSP से आकाश आनंद का निष्कासन क्यों हुआ BSP से आकाश आनंद का निष्कासन

कुमार अभिषेक

  • लखनऊ,
  • 11 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:24 PM IST

BSP सुप्रीमो मायावती का गुस्सा आकाश आनंद के ससुर और BSP के पूर्व नेता अशोक सिद्धार्थ पर अब तक शांत नहीं हुआ है. लगातार सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए मायावती अशोक सिद्धार्थ पर निशाना साध रही हैं. साथ ही, मायावती ने आकाश की सिसायी दूर्दशा के लिए भी अशोक सिद्धार्थ को ही जिम्मेदार ठहराया है. 

आज एक बार फिर मायावती ने X पर लंबा चौड़ा पोस्ट कर अशोक सिद्धार्थ पर निशाना साधा है. उन्होंने दावा किया है कि जब अशोक सिद्धार्थ को तुरंत संन्यास लेने को कहा गया तो उन्होंने पूरी रात इससे बचने की कोशिश की. और जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो सुबह संन्यास लेने का पोस्ट किया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी.

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मायावती ने यह भी कहा कि अशोक सिद्धार्थ के बारे में अभी और भी बातें हैं तो धीरे-धीरे सामने आएंगी. इसके साथ ही, मायावती ने इशारों में ही उन लोगों को भी चेतावनी दी जो बसपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में गए हैं. मायावती ने कहा कि बसपा छोड़कर इन पार्टियों में जाने वालों का हश्र सभी जानते हैं.   

आकाश को अखिलेश का ऑफर?

वहीं, आकाश आनंद कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं. दूसरी तरफ, विपक्षी दलों की ओर से आकाश आनंद को लेकर सियासी ऑफस की बात भी सामने आ रही है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी आकाश आनंद को लेकर इशारों-इशारों में संदेश दिया है. 

यह भी पढ़ें: कौन रोकता रहा रातभर अशोक सिद्धार्थ का संन्यास? मायावती ने सपा-कांग्रेस को लिया निशाने पर

ऐसे में चर्चा है कि क्या बसपा में एक्शन के बाद आकाश आनंद सपा या कांग्रेस की ओर रुख करेंगे? और इसके बाद यूपी की सियासत में क्या समीकरण बदलेंगे.

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BSP सुप्रीमो मायावती द्वारा आकाश आनंद को दोबारा पदमुक्त किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया उबाल आ गया है. इस पूरे घटनाक्रम के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का एक बयान भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है. 

दरअसल, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने अखिलेश यादव से पूछा कि क्या वे आकाश आनंद को अपनी पार्टी में शामिल करेंगे, तो अखिलेश ने इस पर चुटकी लेते हुए रिपोर्टर से कहा 'अगर तुम लेकर आओगे तो ले लेंगे.'

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव की दलित वोट बैंक पर नजर है. हालांकि यह बात साफ है कि आकाश आनंद न तो BSP छोड़ेंगे और न ही सपा का दामन थामेंगे. लेकिन अखिलेश यादव का यह बयान सीधे तौर पर दलित मतदाताओं को अपनी तरफ आकर्षित करने की एक सोची-समझी रणनीतिक चाल मानी जा रही है.

ससुर के संन्यास के बाद भी नहीं पिघलीं मायावती

आकाश आनंद के ससुर और पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ ने मायावती को पत्र लिखकर सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन से पूरी तरह संन्यास लेने का ऐलान कर दिया. उन्होंने अपने पत्र में साफ किया कि पार्टी पर कब्जे या आकाश को गुमराह करने के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं. लेकिन उनके इस पत्र के बाद भी बसपा सुप्रीमो नहीं पिघलीं.

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मायावती ने आकाश आनंद को पदमुक्त करने के पीछे की वजह यह बताई जा रही है कि मायावती के ट्वीट करने के बाद भी आकाश ने उसे री-ट्वीट नहीं किया. उनका कहना है कि इससे साफ है कि वे पार्टी की नीतियों से पूरी तरह सहमत नहीं हैं.

आकाश आनंद का अगला कदम

सूत्रों के मुताबिक, आकाश आनंद ने अपने मोबाइल से X हटा दिया है. आकाश आनंद को हटाने से पहले पार्टी से मिले इशारे के बाद बसपा के बड़े नेताओं ने आकाश आनंद को अनफॉलो करना शुरू कर दिया था. हालांकि, पदमुक्त किए जाने के बाद फिलहाल आकाश आनंद ने खुद ही सोशल मीडिया से दूरी बनाई है. 

जानकारों का मानना है कि आकाश आनंद फिलहाल सोशल मीडिया से दूर रहेंगे और पार्टी में वापसी के लिए सही समय और मायावती के रुख के नरम होने का इंतजार करेंगे. 

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