उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में कांग्रेस ने अतिपिछड़ा वर्ग यानी EBC को लेकर एक खास प्रस्ताव तैयार किया है. पार्टी का कहना है कि OBC की बड़ी आबादी के भीतर कई ऐसी छोटी जातियां हैं, जो सामाजिक और आर्थिक तौर पर अब भी पीछे हैं. इन्हीं लोगों के लिए कांग्रेस ‘अतिपिछड़ा अत्याचार निवारण अधिनियम’ लाने के प्रस्ताव पर काम कर रही है. यह प्रस्ताव कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को भेजा गया है. इसमें SC/ST एक्ट की तर्ज पर अतिपिछड़ों को कानूनी सुरक्षा देने की बात कही गई है. साथ ही 25 करोड़ रुपये तक के सरकारी ठेकों में OBC और EBC के लिए 50 प्रतिशत हिस्सेदारी का प्रस्ताव भी रखा गया है.
इसे समझने के लिए पहले EBC का मतलब समझना जरूरी है. OBC एक बड़ा वर्ग है, जिसके भीतर कई जातियां आती हैं. कांग्रेस का यह प्रस्ताव OBC की उन जातियों पर केंद्रित है, जिन्हें पार्टी अतिपिछड़ा मानती है. इनमें कई ऐसी जातियां हैं, जो जमीन और आर्थिक संसाधनों के मामले में पीछे हैं. कांग्रेस के OBC विभाग के चेयरमैन अनिल जयहिंद ने इस प्रस्ताव को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के पास मंजूरी के लिए भेजा है. प्रस्ताव में इन्हीं समुदायों को अलग कानूनी सुरक्षा देने की बात कही गई है. यानी प्रस्तावित कानून पूरे OBC वर्ग के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ अतिपिछड़ी जातियों के लिए होगा.
बिहार से आया UP का आइडिया
इस प्रस्ताव की कहानी बिहार से शुरू होती है. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने ‘अति पिछड़ा न्याय संकल्प’ के नाम से 110 वादे किए थे. इसमें SC/ST कानून की तर्ज पर EBC अत्याचार निवारण कानून बनाने की बात थी. इसके अलावा, सरकारी ठेकों में 25 करोड़ रुपये तक 50 प्रतिशत आरक्षण, भूमिहीन परिवारों को आवासीय जमीन देने और आरक्षण की सीमा बढ़ाने जैसे वादे भी इसमें शामिल थे.
अब कांग्रेस उसी अनुभव से जुड़े कुछ प्रस्तावों को उत्तर प्रदेश में भी लाने पर विचार कर रही है. अनिल जयहिंद के मुताबिक, बिहार में नेतृत्व की मंजूरी से अतिपिछड़ों के लिए यह पहल की गई थी. UP में भी इसे चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा बनाने पर विचार चल रहा है. फिलहाल प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है.
सिर्फ कानून नहीं, हिस्सेदारी की भी बात
कांग्रेस के UP प्रस्ताव में अतिपिछड़ों की बात सिर्फ सुरक्षा कानून तक सीमित नहीं है. इसमें आबादी के अनुपात में OBC आरक्षण बढ़ाने का मुद्दा भी है. 25 करोड़ रुपये तक के सरकारी ठेकों में OBC-EBC को 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का प्रस्ताव रखा गया है. इसमें भूमिहीन अतिपिछड़े परिवारों को घर बनाने के लिए आवासीय जमीन देने की बात भी शामिल है.
एक और बड़ा प्रस्ताव आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा से जुड़ा है. कांग्रेस विधानसभा से इस सीमा को बढ़ाने के लिए प्रस्ताव पास कराने की बात कर रही है. इसके बाद इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र को भेजने का प्रस्ताव है.
सवर्ण समीकरण साधने की चुनौती
कांग्रेस इस बड़े सामाजिक वादे के जरिए एक नया वोट बैंक तैयार करने की फिराक में है, लेकिन पार्टी की राह में चुनौतियां भी कम नहीं है.। अजय राय के नेतृत्व में पार्टी लगातार सवर्ण मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश कर रही है. ऐसे में EBC पर इतना आक्रामक फोकस सवर्ण और ताकतवर ओबीसी तबके को नाराज न कर दे, इस पर भी पार्टी के भीतर गहरा मंथन चल रहा है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शीर्ष नेतृत्व से इस प्रस्ताव को हरी झंडी कब मिलती है.
राहुल गौतम