पिता कौशल किशोर को राज्यसभा टिकट नहीं, छलका विकास का दर्द, क्या पार्टी छोड़ेंगे?

राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी उम्मीदवारों के ऐलान के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के बेटे विकास किशोर के बागी तेवर देखने को मिले हैं, जिससे पार्टी में अंदरूनी असंतोष के संकेत मिल रहे हैं. सोशल मीडिया पर 'जहां मान-सम्मान न हो वहां न रहने' का दर्द छलकाते हुए विकास किशोर ने परिवार के बीजेपी छोड़ने के कयासों को हवा दे दी है.

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कौशल किशोर और विकास किशोर (Photo-X) कौशल किशोर और विकास किशोर (Photo-X)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 06 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:25 PM IST

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने 8 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. टिकटों के ऐलान के साथ ही पार्टी के भीतर बगावत और असंतोष के संकेत मिलने लगे हैं. मोहनलालगंज के पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के बेटे विकास किशोर ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की है. बीजेपी अनुसूचित जाति (SC) मोर्चे के प्रदेश उपाध्यक्ष विकास किशोर ने एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि जहां सम्मान न हो, वहां रहना उचित नहीं है.

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बीजेपी प्रत्याशियों के नामों की घोषणा के तुरंत बाद विकास किशोर ने अपनी बात रखते हुए लिखा, "जिस परिवार में मां-बाप का मान और सम्मान न हो, उस परिवार में नहीं रहना चाहिए." उन्होंने पोस्ट के अंत में लिखा, 'जय अंबेडकर, जय संविधान, जय पारख.'

विकास किशोर का यह बयान अब यूपी के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. इसके बाद से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर का परिवार बीजेपी से किनारा कर सकता है?

क्या बीजेपी छोड़ेंगे कौशल किशोर?

मोहनलालगंज से सांसद रहे कौशल किशोर को इस बार बीजेपी ने राज्यसभा का प्रत्याशी नहीं बनाया है. वे अवध क्षेत्र में बीजेपी के प्रमुख दलित चेहरों में गिने जाते हैं और पासी समुदाय से आते हैं. वे मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में केंद्रीय राज्य मंत्री भी रह चुके हैं. उनकी पत्नी जय देवी लखनऊ की मलीहाबाद सीट से बीजेपी विधायक हैं. 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद कौशल किशोर उम्मीद लगाए बैठे थे कि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजेगी.

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कौशल किशोर ने बीते दिनों लखनऊ में एक सम्मेलन आयोजित कर कई ऐसे मुद्दे उठाए थे, जिन्हें पार्टी और सरकार की कार्यशैली से जोड़कर देखा जा रहा था. उन्होंने कहा था कि 'गेंद जितनी ऊपर जानी थी चली गई, अब नीचे आ रही है'. उनके इस बयान को बीजेपी की लोकप्रियता में आ रही गिरावट के संकेत के रूप में देखा गया. हालांकि, बाद में वे शांत हो गए थे, जिसे राज्यसभा की दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा था.

बीजेपी ने अवध बेल्ट और पासी समाज से पूर्व सांसद प्रियंका रावत को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है. प्रियंका रावत के नाम पर मुहर लगते ही कौशल किशोर के बेटे का दर्द सामने आ गया.

पार्टी में साइडलाइन किए जाने की टीस

कौशल किशोर ने हाल ही में पार्टी के अंदर अपनी अनदेखी को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि उन्हें लगता है कि पार्टी के अंदर कुछ लोग उन्हें किनारे (साइडलाइन) करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी और सरकारी के कई कार्यक्रमों में उन्हें आमंत्रित नहीं किया जाता और न ही सूचना दी जाती है.

हालांकि कौशल किशोर ने यह भी कहा था कि वे इन बातों से घबराने वाले नहीं हैं. उन्होंने कहा, "मैं छप्पर से निकलकर आया हूं और जमीन पर पैर रखकर खड़ा होने वाला व्यक्ति हूं. मैंने 15 चुनाव लड़े हैं, जिनमें से 12 हारे हैं, इसलिए हार या अनदेखी से मैं डरने वाला नहीं हूं. मैं बस यह जानना चाहता हूं कि पार्टी मेरे प्रति क्या सोचती है."

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कौशल किशोर ने कहा कि उनका मकसद किसी पद के पीछे भागना नहीं है, बल्कि वे जनता और कार्यकर्ताओं की समस्याएं उठाते हैं. अगर जनता की बात करना गलत है तो उन्हें नहीं पता कि सही क्या है.

बीजेपी के लिए खड़ी हो रही सियासी चुनौती

कौशल किशोर उस वक्त भी चर्चा में आए थे, जब अगस्त में उनकी विधायक पत्नी जय देवी लखनऊ के एक मंदिर में दर्शन करने गई थीं. कथित तौर पर दलित (पासी समाज) होने के कारण उन्हें दर्शन करने से रोक दिया गया था. इस घटना के बाद कौशल किशोर ने सम्मेलन बुलाकर अपनी बात रखी थी.

हालांकि, कौशल किशोर ने बार-बार यही कहा कि वे पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जहां कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है, वहां बोलना जरूरी हो जाता है. उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब विधायक और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की जायज शिकायतें थानों और तहसीलों में नहीं सुनी जाएंगी, तो कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरेगा.

अब बेटे विकास किशोर के सीधे बागी बयानों के बाद बीजेपी के लिए अवध क्षेत्र में अपने दलित समीकरणों को संभाले रखना एक बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है.

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