यूपी में करणी सेना का 50 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान, किसकी बढ़ेगी मुश्किल?

राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में 50 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर दिया है. क्षत्रिय बहुल सीटों पर करणी सेना की इस आक्रामक एंट्री से जहां बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंधमारी का खतरा मंडरा रहा है, वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए यह सियासी दांव मुफीद साबित हो सकता है.

Advertisement
करणी सेना के अध्यक्ष सूरज पाल सिंह अम्मू (Photo-ITG) करणी सेना के अध्यक्ष सूरज पाल सिंह अम्मू (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:23 PM IST

उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. करणी सेना ने यूपी की 50 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है. करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू ने कहा कि करणी सेना पूरे दमखम के साथ यूपी के चुनाव मैदान में उतरेगी.

राजपूत समाज के मुद्दों, आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और क्षत्रिय प्रतिनिधित्व की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए करणी सेना के अध्यक्ष सूरजपाल सिंह के चुनावी एंट्री के फैसले ने राज्य के सियासी समीकरणों को गरमा दिया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीति ओबीसी केंद्रित हो गई है, सभी को सिर्फ ओबीसी की चिंता है. सवर्णों के मुद्दे पर कोई भी बोलने को तैयार नहीं है.

Advertisement

सूरजपाल सिंह ने कहा कि वे खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन करणी सेना 2027 के चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारेगी. करणी सेना के इस आक्रामक रुख के बाद यूपी में किस राजनीतिक दल की सबसे ज्यादा मुश्किलें बढ़ेंगी, यह बड़ा सवाल बन गया है.

करणी सेना लड़ेगी 50 सीटें पर चुनाव

करणी सेना ने उन सीटों को चिह्नित करने का काम शुरू कर दिया है जहां राजपूत और क्षत्रिय मतदाताओं की आबादी 15 से 25 प्रतिशत के बीच है. करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू यूपी के दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर से मुलाकात की. साथ ही उन्होंने कहा कि वे अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं से मिल रहे हैं.

उन्होंने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण को लेकर सभी दल चुप हैं, जबकि युवा लगातार मांग कर रहे हैं कि मौजूदा आरक्षण की समीक्षा होनी चाहिए. राजपूत महापुरुषों के इतिहास से कथित छेड़छाड़ हो रही है और क्षत्रिय नेताओं को राजनीति में किनारे लगाया जा रहा है. राजपूत समाज की बेचैनी को देखते हुए करणी सेना ने यूपी में विधानसभा चुनाव लड़ने की प्लानिंग की है.

Advertisement

करणी सेना ने किसी बड़े राजनीतिक दल से हाथ मिलाने पर अपना एजेंडा साफ नहीं किया है, लेकिन 'किंगमेकर' और 'वोट कटवा' क्षमता दिखाकर अपनी राजनीतिक धमक साबित करने की बात जरूर कही है.

करणी सेना के उतरने से किसकी बढ़ेगी मुश्किल?

करणी सेना का मुख्य आधार क्षत्रिय/राजपूत समाज के बीच है. यूपी में क्षत्रिय समुदाय बीजेपी का कोर वोट बैंक माना जाता है. करणी सेना अगर यूपी में 50 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारती है और आक्रामक तरीके से चुनाव लड़ती है, तो वह बीजेपी के पारंपरिक अपर-कास्ट वोट बैंक में सीधे सेंध लगाएगी.

यूपी में राजपूत (ठाकुर) समुदाय की आबादी 6 से 7 फीसदी है. वे यूपी की करीब 65 से 70 सीटों पर जीत दर्ज करते रहे हैं. आजादी के बाद यूपी को ठाकुर समुदाय से 5 सीएम मिले हैं और दो प्रधानमंत्री बने हैं. ब्राह्मणों के बाद सत्ता पर सबसे ज्यादा पकड़ ठाकुरों की ही रही है. यूपी की सत्ता की दशा और दिशा तय करने में ठाकुरों का अहम रोल रहा है.

करणी सेना ठाकुर वोटों के सहारे यूपी में अपनी धमक दिखाना चाहती है. ऐसे में यूपी की कई सीटों पर जीत-हार का अंतर 2,000 से 5,000 वोटों का होता है. ऐसे में करणी सेना द्वारा काटे गए कुछ हजार वोट भी बीजेपी उम्मीदवारों का गणित बिगाड़ सकते हैं.

Advertisement

सपा के लिए करणी सेना बनेगी मुफीद?

यूपी में करणी सेना के चुनाव मैदान में उतरने से सपा को लाभ हो सकता है. अखिलेश यादव का पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला पहले से ही गैर-सवर्ण लामबंदी पर केंद्रित है. ऐसे में सवर्ण वोटों में कोई भी विभाजन (बीजेपी बनाम करणी सेना) सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशियों को सीधा फायदा पहुंचा सकता है.

2024 के लोकसभा चुनाव में ठाकुर समुदाय की महापंचायतों और करणी सेना के विरोध का खामियाजा बीजेपी यूपी में भुगत चुकी है. मुजफ्फरनगर से लेकर पूर्वांचल तक करणी सेना की तमाम पंचायतें हुईं और वे बीजेपी का विरोध करते नजर आए थे. इसका राजनीतिक लाभ सपा को मिला था. यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से सपा 37 सीटें जीतने में सफल रही तो बीजेपी 33 सीटों पर सिमट गई थी.

2027 के चुनाव में अगर किसी सीट पर करणी सेना स्थानीय स्तर पर अन्य जातियों को साधने में सफल होती है, तो सूबे का सियासी गेम बदल जाएगा. इसके चलते यूपी में कई जगहों पर त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है. राजस्थान और मध्य प्रदेश में करणी सेना के बयानों और आंदोलनों ने पहले बड़े सियासी उलटफेर किए हैं. अब यूपी में भी करणी सेना की आक्रामक राजपूत राजनीति क्या गुल खिलाती है, यह देखना होगा.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »