'मुसलमानों को मिलें 100 सीटें, उससे नीचे बात नहीं', सपा संग गठबंधन को लेकर कांग्रेस नेता की मांग

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के गठबंधन में कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के वाइस प्रेसिडेंट हसीब खान ने मुस्लिम समुदाय के लिए 100 सीटों की मांग रखी है. उनका कहना है कि अगर हिस्सेदारी की बात हो रही है, तो गठबंधन में 100 सीटों से कम पर बात नहीं होगी.

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हसीब खान ने कहा- हिस्सेदारी की बात हो तो एलायंस में सौ सीट से नीचे बात नहीं. (File Photo: ITG) हसीब खान ने कहा- हिस्सेदारी की बात हो तो एलायंस में सौ सीट से नीचे बात नहीं. (File Photo: ITG)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 22 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:19 AM IST

कांग्रेस नेता ने समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन में मुस्लिम समुदाय के लिए 100 सीटों की मांग की है. उनका कहना है कि मुसलमानों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है, इसलिए उन्हें सीटें भी अधिक मिलनी चाहिए.

कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के वाइस प्रेसिडेंट हसीब खान ने कहा कि कांग्रेस और सपा गठबंधन में 100 सीटें मुसलमानों के लिए चाहिए, जबकि बाकी सीटें अन्य वर्गों के लिए रखी जानी चाहिए.

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हसीब खान ने बताया कि वे समाजवादी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में इसलिए आए हैं क्योंकि यहां मुसलमानों सहित सभी लोगों का सम्मान है. उनका स्पष्ट मानना है कि अगर हिस्सेदारी की बात हो रही है, तो गठबंधन में 100 सीटों से कम पर कोई बात नहीं होगी.

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हमारी 20 फीसदी हिस्सेदारी सिर्फ वोट देने के लिए नहीं है, बल्कि सीट शेयरिंग भी होनी चाहिए. हसीब खान का कहना है कि मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को ही टिकट मिलना चाहिए.

इस बीच, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव रामपुर जाकर पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात करेंगे. तय शेड्यूल के अनुसार, अखिलेश दोपहर 12:20 बजे प्राइवेट हेलीकॉप्टर से जौहर यूनिवर्सिटी के हेलीपैड पर पहुंचेंगे. इसके बाद वे आजम खान से मिलने रामपुर जिला जेल जाएंगे.

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वहीं, इस मुलाकात को लेकर इस मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का कहना है कि 370 दिनों के बाद आजम खान से मिलने के लिए अखिलेश का रामपुर दौरा चुनाव से पहले मुसलमानों को लुभाने की रणनीति है, जो नाकाम रहेगी, क्योंकि आजम का प्रभाव खत्म हो चुका है. लोग कह रहे हैं, 'बहुत देर कर दी मेहरबान आते-आते.'

यूपी के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने सपा के घोषणापत्र को लकेर कहा कि सपा को पहले 2012-17 के शासन का हिसाब देना चाहिए, जिसमें केवल हत्या, लूट, दंगे, कर्फ्यू और भ्रष्टाचार था.

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