5 राज्यों के चुनावी नतीजों पर अंजना ओम कश्यप के 7 बड़े Takeaways

इस चुनाव के नतीजों ने कई संदेश दिए हैं, पश्चिम बंगाल से लेकर असम और पुंडुचेरी तक नतीजे बीजेपी के पक्ष में रहे तो वहीं तमिलनाडु में विजय की ब्लॉकबस्टर जीत ने बड़े-बड़े दिग्गजों को हिलाकर रख दिया.

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पश्चिम बंगाल में बीजेपी की महाविजय (Photo-ITG) पश्चिम बंगाल में बीजेपी की महाविजय (Photo-ITG)

अंजना ओम कश्यप

  • नई दिल्ली ,
  • 05 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:07 PM IST

देश के पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने भारतीय राजनीति की नई पटकथा लिख दी है. पश्चिम बंगाल में जहां भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए पहली बार 'भगवा' परचम लहराने की तैयारी कर ली है, वहीं असम की सत्ता में बीजेपी की शानदार वापसी ने पार्टी के मजबूत संगठन पर मुहर लगा दी है.

बदलाव की यह लहर दक्षिण तक पहुंची है, जहां तमिलनाडु में थलपति विजय सबसे बड़े विजेता बनकर उभरे हैं, तो केरल से दशकों पुराने वामपंथी शासन की विदाई ने सबको चौंका दिया है. इन चुनावी परिणामों के बीच सबसे बड़े लाभ में बीजेपी नजर आ रही है. पांच राज्यों के इन ऐतिहासिक नतीजों पर पढ़ें-  TVTN की मैनेजिंग एडिटर अंजना ओम कश्यप का विश्लेषण.

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1- राष्ट्रीय राजनीति में दबदबा कायम रखते हुए भाजपा ने असम और पुडुचेरी की सत्ता पर फिर से कब्जा जमाया है, वहीं पश्चिम बंगाल के राजनीतिक मैदान में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है.

2- गंगोत्री से गंगा सागर तक भाजपा का भगवा परचम. सत्ता विरोधी लहर और तुष्टीकरण के नैरेटिव के बीच आरजी कर कांड ने महिलाओं और हिंदू वोटों को एकजुट कर बंगाल की सियासी बिसात ही पलट दी.

3- भाजपा ने 'बाहरी' होने के हमले का मुकाबला करने के लिए 'जय मां काली' और 'माछ-भात' का कार्ड बखूबी खेला. 'झालमुरी' वह नई भाषा बनी जिसने बंगालियों को भाजपा के अनुकूल बनाने में मदद की, क्योंकि उन्हें लगा कि भाजपा उनकी संस्कृति को समझती है. 

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4- तमिलनाडु की सियासत में थलपति विजय की TVK सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है. राज्य के इतिहास में यह किसी करिश्मे से कम नहीं है, क्योंकि दशकों से DMK और AIADMK के वर्चस्व को तोड़ना नामुमकिन माना जाता रहा है. ऐसी पार्टी के लिए यह ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिसने पहली बार चुनावी मैदान में कदम रखा है.

5- असम में भाजपा की चुनावी हैट्रिक ऐतिहासिक है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पार्टी ने न केवल सत्ता बरकरार रखी, बल्कि सीटों में भारी इजाफा कर एक प्रचंड जीत दर्ज की है. दूसरी ओर, कांग्रेस का पूरी तरह सफाया हो गया है और उसकी सांगठनिक कमजोरी व संघर्ष क्षमता का अभाव यहां साफ नजर आया.  विपक्षी पार्टियों के लिए मुस्लिम अपील पर फिर से सोचने का समय आ गया है.

6- दशकों बाद भारतीय राजनीति में एक ऐसा मोड़ आया है, जब किसी भी राज्य में वामपंथी सरकार नहीं होगी. केरल LDF हार गई है और अगर थोड़ा चुटीले अंदाज़ में कहें तो देश में अब कोई 'वाम' बाकी नहीं बचा है, यहां तक कि स्टालिन भी नहीं.

7- 'जनता का आदमी' वाली सुपरस्टार छवि के साथ थलपति विजय की जीत दर्शाती है कि क्षेत्रीय दिग्गजों के लिए अभी भी गुंजाइश है. उन्होंने अपने स्टारडम और भ्रष्टाचार विरोधी माहौल का बखूबी फायदा उठाया, वे एक स्पष्ट विजेता हैं.

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इन विधानसभा चुनावों के ऐतिहासिक नतीजों पर नजर डालें तो पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से भाजपा ने स्पष्ट बहुमत के साथ 206 सीटों पर जीत दर्ज की है. असम में भाजपा गठबंधन ने अपनी पकड़ मजबूत करते हुए 102 सीटें जीतकर हैट्रिक लगाई है. तमिलनाडु की 234 सीटों के रण में थलपति विजय की पार्टी TVK ने पहली बार में ही करिश्मा करते हुए 108 सीटों पर जीत दर्ज की वहीं केरल में एलडीएफ को हराकर यूडीएफ ने 99 सीटों पर जीत हासिल की है. 

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