पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने दलित वोट बैंक को मजबूत करने की तैयारी तेज कर दी है. पार्टी 15 नवंबर को आगरा में बड़ा दलित सम्मेलन करने जा रही है. इस सम्मेलन में पश्चिमी यूपी के अलग-अलग जिलों से दलित समाज के लोगों को जुटाया जाएगा. इनमें जाटव समाज के साथ दूसरे दलित समुदायों को भी जोड़ने की कोशिश होगी.
सपा का मकसद दलित समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना है. पार्टी की नजर 2027 के विधानसभा चुनाव पर है. सूत्रों के मुताबिक, सम्मेलन आगरा के जीआईसी मैदान में होगा. इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से लोगों के पहुंचने की उम्मीद है.
पार्टी इस सम्मेलन के जरिए दलित समाज के बीच अपना राजनीतिक संदेश पहुंचाना चाहती है. सपा का कहना है कि दलितों के मान-सम्मान और अधिकारों के मुद्दे पर वह उनके साथ खड़ी है.
दलित वोट पर क्यों है सपा की नजर?
पश्चिमी यूपी में दलित आबादी कई जिलों में काफी अहम है. 2011 की जनगणना के मुताबिक, आगरा में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 22.43 फीसदी है. सहारनपुर में यह आंकड़ा करीब 22 फीसदी है. वहीं बिजनौर और हाथरस में भी दलित आबादी करीब 22 फीसदी के आसपास है. अलीगढ़ में यह करीब 20.56 फीसदी है.
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बदायूं में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 19.90 फीसदी है. मुजफ्फरनगर में करीब 19.56 फीसदी और बरेली में करीब 20 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति की है. मेरठ में यह करीब 14 से 15 फीसदी है. रामपुर में करीब 13 फीसदी और बागपत व शामली में करीब 11 फीसदी के आसपास है. मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी और बुलंदशहर में भी दलित वोट चुनावी लिहाज से अहम है.
हालांकि ये आंकड़े 2011 की जनगणना के हैं. इन्हें मौजूदा मतदाता सूची में दलित वोटरों का सटीक प्रतिशत नहीं माना जा सकता. फिर भी इन आंकड़ों से पश्चिमी यूपी में दलित वोट की अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है.
राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन के हाथ में कमान
सपा के इस अभियान की कमान राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन संभाल रहे हैं. सुमन पिछले काफी समय से पश्चिमी यूपी में सक्रिय हैं. वह दलित उत्पीड़न से जुड़े मामलों को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं.
जहां भी दलितों के साथ उत्पीड़न की शिकायत सामने आई, सुमन वहां पहुंचने की कोशिश करते रहे. उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. कई मामलों में उन्होंने सरकार और प्रशासन पर भी सवाल उठाए. इस सक्रियता के जरिए सपा अब दलित समाज के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है.
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आगरा का सम्मेलन इसी अभियान को बड़े राजनीतिक मंच में बदलने की कोशिश माना जा रहा है. पार्टी की कोशिश है कि अब तक की जमीन पर संगठन को मजबूत किया जाए. साथ ही दलित समाज के बीच सपा के पक्ष में माहौल बनाया जाए.
दलित सम्मेलन में अखिलेश यादव होंगे मुख्य अतिथि
सम्मेलन में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मुख्य अतिथि होंगे. उनकी मौजूदगी से कार्यक्रम का राजनीतिक महत्व बढ़ गया है. रामजीलाल सुमन जहां पश्चिमी यूपी में लगातार सक्रिय हैं, वहीं अखिलेश यादव इस अभियान को पार्टी के बड़े राजनीतिक एजेंडे से जोड़ेंगे.
सपा जाटव समाज के साथ दूसरे दलित समुदायों को भी अपने साथ जोड़ना चाहती है. पार्टी की कोशिश है कि दलित वोट को लेकर अलग-अलग इलाकों में बने समीकरणों में अपनी जगह बनाई जाए.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सपा की यह कोशिश वोट में बदल पाएगी. क्या रामजीलाल सुमन की लगातार सक्रियता 2027 में पार्टी के काम आएगी. क्या अखिलेश यादव की मौजूदगी दलित समाज के बीच सपा के लिए नया भरोसा पैदा करेगी.
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15 नवंबर को आगरा में होने वाला सम्मेलन इन सवालों के जवाब तलाशने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. पश्चिमी यूपी में दलित वोट कई सीटों पर चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है. ऐसे में सपा की नजर इस बड़े वोट बैंक पर है. अब देखना होगा कि सम्मेलन के जरिए पार्टी कितनी बड़ी राजनीतिक जमीन तैयार कर पाती है.
कुमार अभिषेक