बसपा से निकाले जाने के बाद अब आकाश आनंद के सामने हैं ये 3 विकल्प, किस रास्ते पर जाएंगे?

बसपा में मायावती द्वारा आकाश आनंद को सभी पदों से मुक्त किए जाने के बाद उनका राजनीतिक भविष्य अधर में लटक गया है. बहुजन राजनीति के इस युवा चेहरे के सामने अब अपनी नई पार्टी बनाने, शांत रहकर सही समय का इंतजार करने या अन्य दलों का ऑफर स्वीकार करने के तीन मुख्य विकल्प मौजूद हैं.

Advertisement
 अधर में आकाश आनंद का सियासी भविष्य (File Photo/PTI) अधर में आकाश आनंद का सियासी भविष्य (File Photo/PTI)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 14 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:59 PM IST

उत्तर प्रदेश में बसपा संस्थापक कांशीराम ने दलित राजनीतिक चेतना जगाने का काम किया था, जिसके सहारे मायावती चार बार सूबे की मुख्यमंत्री बनीं. मायावती अक्सर कांशीराम का नाम लेकर कहती हैं कि उन्होंने बहुजन आंदोलन की नींव जिस आत्म-सम्मान और परिवारमुक्त कैडर के दम पर रखी थी, उसका वे पालन करेंगी. हालांकि, यह बात कहते-कहते मायावती खुद परिवारवाद के भंवर में फंस गईं.

Advertisement

मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार के बाद अपने भतीजे आकाश आनंद को बसपा में शामिल किया. वे आकाश आनंद को सिर्फ सियासत में ही लेकर नहीं आईं, बल्कि उन्हें अपना सियासी उत्तराधिकारी तक घोषित कर दिया था. बसपा में मायावती के बाद आकाश आनंद दूसरे नंबर के नेता माने जाने लगे, लेकिन कुछ ही दिनों में हाथी से उतारकर उन्हें पैदल कर दिया गया है.

आकाश आनंद को मायावती दोबारा बसपा में लाईं और फिर उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन कुछ समय बाद फिर से बाहर का रास्ता दिखा दिया. आकाश आनंद अपने राजनीतिक जीवन में सबसे कड़े इम्तिहान से गुजर रहे हैं. मायावती के इस फैसले के बाद चर्चा तेज है कि बहुजन राजनीति के युवा चेहरे आकाश आनंद के पास आगे बढ़ने के कौन-कौन से रास्ते मौजूद हैं और वे किस दिशा में अपना कदम बढ़ाएंगे?

Advertisement

बसपा में आकाश आनंद का भविष्य क्या है?

मायावती के भाई आनंद कुमार के बेटे आकाश आनंद का सियासी चैप्टर फिलहाल बसपा में क्लोज हो चुका है. बसपा में मायावती का फैसला अंतिम और सर्वोपरि माना जाता है. इन दिनों मायावती ने आकाश आनंद को लेकर जो सियासी रुख अपना रखा है, उससे एक बात साफ है कि बसपा में उनके लिए फिलहाल कोई जगह नहीं बची है. मायावती ने उन्हें सिर्फ पदों से ही मुक्त नहीं किया, बल्कि पार्टी से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया है. इसके साथ ही आकाश आनंद को अपरिपक्व भी बताया.

मायावती ने खुद खुलासा किया था कि उनके प्रभारी आलोक कुमार को आकाश आनंद का फोन आया था, जिसमें आकाश ने पूछा कि क्या बहनजी बीमार चल रही हैं? मायावती ने इसे खारिज करते हुए बेहद तल्ख लहजे में कहा कि आकाश आनंद अभी भी अपने दिमाग से काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि अगर वे लड़की नहीं होतीं, तो किसी भाई-बहन को साथ नहीं रखतीं.

बसपा के भीतर आकाश आनंद के लिए सियासी संभावनाएं फिलहाल लगभग न के बराबर नजर आ रही हैं. बसपा के अब तक के संगठनात्मक इतिहास और कार्यशैली को देखें, तो पार्टी के भीतर उनके पास बहुत सीमित विकल्प बचे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस समय आकाश आनंद के सामने तीन प्रमुख रास्ते (विकल्प) खुले हैं...

Advertisement

पहला विकल्प: अपनी नई पार्टी का गठन करना

आकाश आनंद के पास पहला विकल्प अपनी नई पार्टी बनाने का है. बसपा से निकाले जाने के बाद आकाश आनंद बहुजन विचार और कांशीराम के मूल सिद्धांतों को आधार बनाकर एक नया राजनीतिक दल गठित कर सकते हैं, लेकिन यह आसान नहीं है.

बसपा में अपने छोटे से कार्यकाल के दौरान आकाश ने युवाओं और आक्रामक राजनीति पसंद करने वाले बहुजन कैडर के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई थी. नया दल बनाकर वे बहुजन युवाओं को अपने साथ लामबंद कर सकते हैं.

हालांकि, बसपा से अलग होकर नया सियासी दल बनाना उनके लिए आसान नहीं है. बिना किसी मजबूत संगठनात्मक ढांचे और संसाधन के उत्तर प्रदेश की जटिल राजनीति में नई पार्टी को खड़ा करना बेहद कठिन और जोखिम भरा काम होगा.

दूसरा विकल्प: 'साइलेंट' रहकर समय का इंतजार

आकाश आनंद के सामने दूसरा विकल्प साइलेंट मोड में रहना है किसी भी जल्दबाजी से बचते हुए पूरी तरह शांत हो जाना और मायावती के अगले सियासी रुख का इंतजार करना. बहुजन समाज पार्टी में पहले भी कई नेताओं की विदाई के बाद वापसी हुई है. यदि आकाश शांति बनाए रखते हैं और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ कोई बयानबाजी नहीं करते हैं, तो भविष्य में उनके लिए बसपा के दरवाजे दोबारा खुलने की संभावना बनी रहेगी.

Advertisement

हालांकि, राजनीति में ज्यादा लंबे समय तक साइलेंट रहने से समर्थक और राजनीतिक प्रासंगिकता दोनों धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं. आकाश आनंद ने हाल के दिनों में जो सियासी पहचान बनाई है, उसके खत्म होने का खतरा है. यूपी में दलित राजनीति में युवा चेहरे के तौर पर आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद उभर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस भी दलित राजनीति पर आक्रामक तरीके से लौटी है। ऐसे में दलित राजनीति का स्पेस खत्म होने के बाद आकाश आनंद के पास क्या बचेगा?

तीसरा विकल्प: सियासी दलों के ऑफर एक्सेप्ट करना

उत्तर प्रदेश में बहुजन वोटों पर नजर गड़ाए बैठे राजनीतिक दलों की नजर आकाश आनंद पर है. आकाश आनंद की दलित युवाओं में लोकप्रियता को देखते हुए सपा से लेकर कांग्रेस सहित तमाम पार्टियों ने उनके लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं. निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद से लेकर आजाद समाज पार्टी के प्रमुख व सांसद चंद्रशेखर आजाद तक उन्हें खुला ऑफर दे चुके हैं कि वे उनके साथ आएं और कांशीराम के मिशन को आगे बढ़ाएं.

सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने 'पीडीए' फॉर्मूले को धार देने में जुटे हैं. ऐसे में सपा भी इशारों-इशारों में आकाश आनंद को साथ लेने के संकेत दे चुकी है. कांग्रेस के नेता भी आकाश आनंद के पार्टी में आने की बात कह रहे हैं. आकाश इनमें से किसी दल के साथ जाते हैं, तो उन्हें तुरंत एक राजनीतिक मंच और बैकअप मिल जाएगा.

Advertisement

हालांकि, बसपा कैडर में मायावती का प्रभाव आज भी मजबूत है. किसी विरोधी दल में जाने से उन पर 'बागी' का ठप्पा लग सकता है, जिससे पारंपरिक बहुजन वोट बैंक का विश्वास हासिल करना आसान नहीं होगा. इसके अलावा वे परिवार में भी अलग-थलग पड़ सकते हैं, क्योंकि उनके पिता आनंद कुमार आज भी मायावती का बहुत सम्मान करते हैं और पार्टी में नंबर दो की पोजीशन पर हैं.

आकाश आनंद किस रास्ते पर बढ़ाएंगे कदम?

आकाश आनंद के लिए बसपा से अलग गुट बनाना लगभग असंभव है. बसपा के भीतर आकाश आनंद का राजनीतिक भविष्य पूरी तरह से मायावती के भावी रुख और उनके अपने धैर्य पर निर्भर करता है. जब तक शीर्ष नेतृत्व अपना मन नहीं बदलता, तब तक बसपा के संगठनात्मक ढांचे में उनके लिए मुख्यधारा की राजनीति के दरवाजे लगभग बंद ही माने जा रहे हैं.

मायावती के भतीजे आकाश आनंद अपने सियासी जीवन के सबसे मुश्किल मोड़ पर खड़े हैं. ऐसे में देखना होगा कि वे कौन-सा रास्ता चुनते हैं. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आकाश आनंद तात्कालिक राजनीतिक अस्तित्व बचाना चाहते हैं या लंबे समय की बहुजन राजनीति का हिस्सा बने रहना चाहते हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »