Exclusive: अखिलेश यादव से मुलाकात के दौरान क्या बात हुई? CJP के आशुतोष रांका ने बताया

अखिलेश यादव से मुलाकात को लेकर उठ रहे सियासी सवालों पर CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आजतक से खास बातचीत की. उन्होंने कहा कि यह मुलाकात सामान्य शिष्टाचार का हिस्सा थी और अलग-अलग दलों के नेताओं से उनकी बातचीत होती रहती है. रांका ने साफ किया कि CJP चुनावी पार्टी के तौर पर नहीं, बल्कि प्रेशर ग्रुप के रूप में काम करेगी.

Advertisement
आशुतोष रांका और अखिलेश के बीच बंद कमरे में करीब डेढ घंटे तक मुलाकात हुई (File Photo- ITG) आशुतोष रांका और अखिलेश के बीच बंद कमरे में करीब डेढ घंटे तक मुलाकात हुई (File Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:52 PM IST

अखिलेश यादव और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के बीच लखनऊ में हुई डेढ़ घंटे की मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में सरगर्मियां तेज हो गई हैं. आगामी विधानसभा चुनावों से पहले हुई इस मुलाकात को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. अब आशुतोष रांका ने आजतक से खास बातचीत में इस मुलाकात के सियासी मायने पर खुलकर बात की. 

Advertisement

रांका ने कहा कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं से उनकी मुलाकात होती रहती है. उन्होंने यह भी साफ किया कि सीजेपी फिलहाल राजनीतिक पार्टी के तौर पर चुनाव लड़ने के बजाय पॉलिटिकल प्रेशर ग्रुप के रूप में काम जारी रखेगी और युवाओं के मुद्दों पर हर दल को जवाबदेह बनाएगी.

अखिलेश यादव से मुलाकात के सवाल पर रांका ने कहा कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं और सांसदों से उनकी समय-समय पर मुलाकात होती रहती है. उन्होंने कहा कि बीजेपी के कई नेताओं से भी उनकी बातचीत होती है और इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है. अखिलेश यादव से मुलाकात को लेकर जितने राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं, वह देखने वाले के नजरिए पर निर्भर करता है. यह एक शिष्टाचार मुलाकात थी.

इससे पहले सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भी कहा था कि रांका अखिलेश यादव से जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान सपा नेताओं के समर्थन के लिए आभार जताने पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान डिंपल यादव समेत सपा के कई नेताओं ने सड़क से लेकर सदन तक युवाओं की मांगों का समर्थन किया था. इसी के लिए रांका ने समाजवादी पार्टी का आभार जताया. सपा प्रवक्ता के मुताबिक, मुलाकात में किसी राजनीतिक मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई.

Advertisement

'राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं, लेकिन...'

रांका से जब पूछा गया कि उन्होंने खुद कहा है कि उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं और वह राजनीति को बदलना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा कि बदलाव की प्रक्रिया वह पहले ही शुरू कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों में CJP ने ऐसा माहौल बनाया है कि देश के प्रधानमंत्री को सोशल मीडिया पर युवाओं से बात करनी पड़ी. राजनीतिक दलों को युवाओं के साथ संवाद करना पड़ा और संसद में पेपर लीक व बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चर्चा की जरूरत महसूस हुई.

सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा का मतलब सत्ता हासिल करना नहीं है. वह देश की राजनीति को हिंदू-मुस्लिम, जाति और पहचान की राजनीति से निकालकर मुद्दों की राजनीति की तरफ ले जाना चाहते हैं. उनके मुताबिक, युवाओं से जुड़े वास्तविक मुद्दे- शिक्षा, बेरोजगारी और संस्थानों की विश्वसनीयता- राजनीति के केंद्र में होने चाहिए.

'मोदी से लेकर योगी तक, जो बुलाएगा उससे मिलेंगे'

अखिलेश यादव से मुलाकात के राजनीतिक मायने पूछे जाने पर रांका ने कहा कि CJP किसी एक राजनीतिक दल के साथ खड़े होने के लिए काम नहीं कर रही है. उन्होंने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनसे शिक्षा और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर बातचीत करना चाहते हैं तो वह उनसे भी मिलेंगे. रांका ने कहा, 'हम तो योगी जी से भी मिलने के लिए आतुर हैं. अगर वो हमें इनवाइट करें, एजुकेशन और अनएम्प्लॉयमेंट के मुद्दे पर हमसे बात करना चाहें तो हम उनसे भी मिलेंगे.'

Advertisement

उन्होंने कहा कि सीजेपी के लिए किसी राजनीतिक पार्टी से ज्यादा महत्वपूर्ण देश के युवाओं की लड़ाई है. जो भी राजनीतिक दल इन मुद्दों पर उनसे बात करना चाहता है, वह उससे मिलने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि CJP पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने और युवाओं के मुद्दों पर बातचीत करने की बात कह चुकी है.

अखिलेश से हुई बातचीत का ब्यौरा बताने से किया इनकार

जब रांका से सीधे पूछा गया कि अखिलेश यादव के साथ बंद कमरे में डेढ़ घंटे तक क्या बातचीत हुई, तो उन्होंने इसका खुलासा करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि CJP खुद को सबसे पारदर्शी राजनीतिक आंदोलन मानती है, लेकिन हर मुलाकात की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी नहीं है. कई नेताओं से उनकी मुलाकात होती रहती है और हर बातचीत का प्रचार नहीं किया जाता. उन्होंने यह भी कहा कि कई बीजेपी नेताओं से भी उनकी मुलाकात होती रहती है. हालांकि, उनके मुताबिक, कुछ नेता नहीं चाहते कि उनकी मुलाकातों की जानकारी सार्वजनिक की जाए.

उन्होंने कहा कि अगर योगी आदित्यनाथ भी उनसे मिलना चाहें तो वह उनसे मुलाकात करेंगे, क्योंकि उनके साथ CJP की कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है. योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री हैं और अगर वह शिक्षा या बेरोजगारी के मुद्दे पर बात करना चाहेंगे तो सीजेपी उनसे जरूर बातचीत करेगी.

Advertisement

उत्तर प्रदेश में CJP की आगे की रणनीति पर रांका ने कहा कि पार्टी या आंदोलन का एजेंडा वही रहेगा जो देशभर में है. उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहतर होनी चाहिए, कॉलेजों का ढांचा और सुविधाएं सुधरनी चाहिए, शिक्षा व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए और शिक्षकों की स्थिति में सुधार होना चाहिए. इसके अलावा बेरोजगारी के मुद्दे पर भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है. CJP चाहे चुनाव हों या नहीं, इन्हीं मुद्दों को लेकर काम करती रहेगी.

'हम किसी के खिलाफ नहीं, युवाओं के लिए दबाव बनाएंगे'

उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर जब रांका से पूछा गया कि CJP किस राजनीतिक दल के पक्ष या खिलाफ दबाव बनाएगी, तो उन्होंने साफ कहा कि उनका आंदोलन किसी पार्टी के खिलाफ नहीं है. उन्होंने कहा, 'हम किसी के खिलाफ नहीं बनाएंगे, हम युवाओं के लिए बनाएंगे.'

रांका ने कहा कि CJP का फैसला जनता के हाथ में है. संगठन ने काफी सोच-विचार के बाद यह तय किया है कि वह राजनीतिक पार्टी के तौर पर काम नहीं करेगा. इसके बजाय वह पॉलिटिकल प्रेशर ग्रुप के रूप में काम जारी रखेगा, ताकि राजनीतिक दल युवाओं को गंभीरता से लें और उनके मुद्दों को अपने एजेंडे में शामिल करें. युवाओं को बेहतर शिक्षा, रोजगार और संस्थागत सुधार चाहिए. जो राजनीतिक दल इन मुद्दों को गंभीरता से उठाएंगे, युवाओं के बीच उनका समर्थन बढ़ेगा. रांका ने कहा कि यही CJP का राजनीतिक हित और उसका चुनावी हित भी है.

Advertisement

'हमारा दबाव सत्ता के लिए नहीं, मुद्दों के लिए'

रांका ने साफ किया कि सीजेपी का उद्देश्य किसी खास राजनीतिक दल को फायदा या नुकसान पहुंचाना नहीं है. उनका कहना है कि संगठन सभी राजनीतिक दलों को युवाओं के मुद्दों पर जवाबदेह बनाना चाहता है. उनके मुताबिक, सीजेपी शिक्षा, बेरोजगारी, सरकारी संस्थानों की स्थिति और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों को लेकर राजनीतिक दलों पर दबाव बनाएगी. उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान भी उसका फोकस किसी दल के समर्थन या विरोध के बजाय इन्हीं मुद्दों पर रहेगा.

इस लिहाज से अखिलेश यादव से हुई मुलाकात ने यूपी की सियासत में नई चर्चाओं को जरूर जन्म दिया है, लेकिन रांका ने फिलहाल किसी राजनीतिक गठबंधन या चुनावी साझेदारी का संकेत नहीं दिया है. उन्होंने यह जरूर स्पष्ट किया कि CJP अब खुद को सिर्फ एक आंदोलन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि एक राजनीतिक ताकत के रूप में युवाओं के मुद्दों को चुनावी राजनीति के केंद्र में लाने की कोशिश करेगी.

'स्वतंत्र भारद्वाज पर एक्शन का स्वागत, लेकिन...'

जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान निशु आजाद के पिता पर हमले के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने पर भी आशुतोष रांका ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि CJP इस कार्रवाई का स्वागत करती है, लेकिन यह कदम दो महीने पहले ही उठाया जाना चाहिए था. जंतर-मंतर पर हुई घटना के बाद से ही संगठन लगातार दिल्ली पुलिस से स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग कर रहा था.

Advertisement

रांका ने आरोप लगाया कि घटना के बाद स्वतंत्र खुलेआम घूम रहा था, वीडियो बना रहा था और लगातार धमकियां दे रहा था. हाल में सामने आए पॉडकास्ट में स्वतंत्र ने खुद संजय कुमार पर हमला करने की बात स्वीकार की. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर उसके खिलाफ इतनी गंभीर शिकायत और सबूत सामने थे तो वह अब तक खुले में क्यों घूम रहा था.

उन्होंने कहा, 'आज जो हमारी मांग थी कि स्वतंत्र को गिरफ्तार किया जाए, इस गुंडे को गिरफ्तार किया जाए, दिल्ली पुलिस ने वह मांग मानी है. लेकिन ये बहुत पहले हो जाना चाहिए था. लेकन सवाल ये है कि क्या स्वतंत्र भारद्वाज को किसी तरह का राजनीतिक संरक्षण हासिल था या दिल्ली पुलिस पर किसी तरह का दबाव था. स्वतंत्र जिस आत्मविश्वास के साथ राजनीतिक संरक्षण की बात कर रहा था, उसकी भी जांच होनी चाहिए.'

उन्होंने मांग की कि मामले में एससी-एसटी एक्ट और हत्या के प्रयास समेत जो भी गंभीर धाराएं बनती हैं, उन्हें लगाया जाना चाहिए था. 

'सरकार को हमारी मांगों का इंतजार नहीं करना चाहिए'

यह पूछे जाने पर कि क्या CJP के आंदोलनों के बाद सरकार उसकी मांगों को मान रही है, रांका ने कहा कि सरकार की ओर से कई मामलों में प्रतिक्रिया जरूर देखने को मिली है, लेकिन उनका मानना है कि सरकार को आंदोलन का इंतजार ही नहीं करना चाहिए था. उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नीट पेपर लीक के तुरंत बाद हो जाना चाहिए था और इसके लिए आंदोलन करने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए थी. इसी तरह जिन मामलों में सरकार को कार्रवाई करनी थी, उसमें भी उसे पहले से कदम उठाना चाहिए था.

Advertisement

उन्होंने कहा कि CJP जिन मुद्दों को उठा रही है, वे सिर्फ संगठन की मांगें नहीं हैं, बल्कि युवाओं से जुड़े गंभीर सवाल हैं. सरकार को इन मुद्दों पर दबाव बनने का इंतजार करने के बजाय खुद पहल करनी चाहिए.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »