उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल को लेकर नई नीति लागू होने जा रही है. इसके लिए शासन स्तर पर दो अलग-अलग कमेटियों का गठन किया गया है. एक कमेटी AI नीति तैयार करेगी, जबकि दूसरी कमेटी इस नीति को विश्वविद्यालयों में जमीन पर लागू कराने का काम करेगी. खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय यानी CSJMU के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक को अहम जिम्मेदारी दी गई है.
उत्तर प्रदेश की AI नीति तैयार करने के लिए AI पॉलिसी एडवाइजरी कमेटी का गठन किया गया है. इस कमेटी में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों और शिक्षाविदों को शामिल किया गया है. इसमें आईआईटी खड़गपुर के पूर्व निदेशक प्रो. पार्थ प्रतिम चक्रवर्ती, बिट्स पिलानी समूह के कुलपति प्रो. वीरमगोपाल राव, बोरलॉग इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशिया के डॉ. बीएम प्रसन्ना, एम्स दिल्ली की प्रो. कृतिका रंगराजन और CSJMU के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक सदस्य बनाए गए हैं.
इस कमेटी की जिम्मेदारी प्रदेश के लिए AI नीति तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ी है. यानी विश्वविद्यालयों में AI के इस्तेमाल को लेकर बनने वाली नीति में प्रो. विनय कुमार पाठक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. नीति तैयार करने के बाद उसे अलग-अलग क्षेत्रों में लागू कराने की जिम्मेदारी AI पॉलिसी इंप्लीमेंटेशन कमेटी को दी गई है. इस कमेटी में तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, कृषि शिक्षा और सामान्य विश्वविद्यालयों से जुड़े अधिकारियों को शामिल किया गया है.
AI के सुरक्षित इस्तेमाल पर राज्यपाल ने दिया जोर
तकनीकी शिक्षा के लिए एकेटीयू के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय को जिम्मेदारी दी गई है. चिकित्सा शिक्षा के लिए केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद को शामिल किया गया है. कृषि शिक्षा के लिए डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह को जिम्मेदारी दी गई है. सामान्य विश्वविद्यालयों के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला को कमेटी में शामिल किया गया है. वहीं, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह को सदस्य संयोजक बनाया गया है.
कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय AI मंथन 2.0 के समापन समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने AI के इस्तेमाल से जुड़ी अहम बात कही. उन्होंने कहा कि AI तकनीक का सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल सबसे बड़ी चुनौती है. राज्यपाल ने वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों से AI के इस्तेमाल में सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता देने की अपील की. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि AI का गलत इस्तेमाल छात्रों, शिक्षकों या समाज के लिए नुकसानदायक साबित नहीं होना चाहिए.
CSJMU कुलपति को मिली अहम भूमिका
उत्तर प्रदेश में AI नीति तैयार करने और उसे लागू कराने के लिए बनाई गई दोनों कमेटियों के गठन के साथ प्रदेश के विश्वविद्यालयों में AI के इस्तेमाल को लेकर एक व्यवस्थित प्रक्रिया शुरू हो गई है. AI पॉलिसी एडवाइजरी कमेटी में शामिल किए जाने के साथ ही CSJMU के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक को उत्तर प्रदेश की AI नीति तैयार करने की प्रक्रिया में अहम भूमिका मिली है. वहीं, दूसरी कमेटी अलग-अलग क्षेत्रों और विश्वविद्यालयों में इस नीति को लागू कराने की जिम्मेदारी संभालेगी.
सिमर चावला