आधी सैलरी से कैसे चले घर? पंजाब में ETT टीचर्स ने घेरी सिसोदिया की कोठी, बच्चे भी बैठे धरने पर

शिक्षकों का कहना है कि वे अपनी मांग को लेकर बार-बार अधिकारियों और मंत्रियों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्हें चंडीगढ़ के वीआईपी इलाके में आकर मंत्रियों की कोठियों का घेराव करने पर मजबूर होना पड़ा.

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आधे वेतन पर गुजारा करने को मजबूर पंजाब के शिक्षक, बच्चे भी पेरेंट्स के साथ धरने पर आधे वेतन पर गुजारा करने को मजबूर पंजाब के शिक्षक, बच्चे भी पेरेंट्स के साथ धरने पर

असीम बस्सी

  • चंडीगढ़ ,
  • 02 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:12 PM IST

पंजाब के सरकारी स्कूलों में बच्चों का भविष्य संवार रहे शिक्षकों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है. अपनी वाजिब मांगों और पूरी सैलरी की गुहार लगाने के लिए करीब 180 ईटीटी (Elementary Teacher Training) शिक्षक शुक्रवार को चंडीगढ़ के हाई-सिक्योरिटी वाले सेक्टर-39 में जा पहुंचे.

यह वही सेक्टर है जहां पंजाब सरकार के बड़े-बड़े मंत्रियों के सरकारी आवास हैं. पूरे पर‍िवार के साथ प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने यहां हाउस नंबर 960 के बाहर डेरा जमाया और पंजाब सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की. (आरोप है कि इस मकान में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया रहते हैं.)

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आधा वेतन... पूरा शोषण!

ग्राउंड जीरो पर मौजूद aajtak.in से बात करते हुए प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने अपना दर्द बयां किया. प्रदर्शनकारियों ने बताया कि कुल 180 ईटीटी शिक्षक ऐसे हैं, जिन्हें पिछले लंबे समय से आधा वेतन दिया जा रहा है. महंगाई के इस दौर में आधे वेतन पर परिवार चलाना नामुमकिन हो गया है.

शिक्षकों का कहना है कि वे अपनी मांग को लेकर बार-बार अधिकारियों और मंत्रियों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्हें चंडीगढ़ के वीआईपी इलाके में आकर मंत्रियों की कोठियों का घेराव करने पर मजबूर होना पड़ा.

'शिक्षा क्रांति' के दावों के बीच शिक्षकों का 'हल्ला बोल'

एक तरफ पंजाब सरकार राज्य में 'शिक्षा क्रांति' और शिक्षकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने का दावा करती है, तो दूसरी तरफ राजधानी चंडीगढ़ की सड़कों पर अपनी पूरी तनख्वाह के लिए प्रदर्शन करते ये शिक्षक उन दावों पर सीधे सवाल खड़े कर रहे हैं. खबर लिखे जाने तक प्रदर्शनकारी शिक्षक कोठी के बाहर डटे हुए हैं और प्रशासन से लिखित आश्वासन की मांग कर रहे हैं.

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