नीट-यूजी और यूजीसी-नेट समेत केंद्रीय परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठने वाली आइसा (AISA) की नेशनल प्रेसीडेंट नेहा बोरा पर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे. आलोचक और सोशल मीडिया यूजर्स पूछ रहे थे कि जब वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन का मुख्य चेहरा बनी हुई थीं, तो झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती धांधली के खिलाफ रांची के जयपाल सिंह मुंडा पार्क में चल रहे इतने बड़े छात्र आंदोलन में वे अब तक क्यों नहीं दिखीं?
इन सभी आलोचनाओं और सवालों पर AISA की JNU यूनिट प्रेसिडेंट नेहा बोरा ने aajak.in से बातचीत मेंअपनी स्थिति पूरी तरह साफ करते हुए तीखा पलटवार किया है.
7 तारीख को पहुंच रही हूं
अपने 'सेलेक्टिव प्रजेंस' के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए नेहा बोरा ने कहा कि मैं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की छात्रा हूं और आइसा (AISA) की की नेशनल प्रेसीडेंट हूं. सवाल पूछा जा रहा है कि मैं रांची में क्यों नहीं दिखी? जवाब बहुत सीधा है, मैं 7 तारीख को छात्रों द्वारा बुलाए गए विधानसभा मार्च में भाग लेने के लिए रांची पहुंच रही हूं. यह पूरी तरह AISA का आह्वान है और इसका BJP द्वारा आयोजित किए जा रहे अलग कार्यक्रम से कोई लेना-देना नहीं है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल से लेकर झारखंड के मैदान तक, आइसा का समर्थन कभी प्रतीकात्मक या चयनात्मक (selective) नहीं रहा है. रांची में आंदोलन के पहले दिन यानी 29 अप्रैल 2026 से ही AISA कार्यकर्ता जयपाल सिंह मुंडा पार्क में टेंट लगाकर अनवरत डटे हुए हैं. सुबह से रात तक रोटेटिंग शिफ्टों में आइसा के कार्यकर्ता आंदोलनकारी छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और अब वह खुद भी ग्राउंड पर शामिल हो रही हैं.
जंतर-मंतर पर कहां थे BJP और ABVP?- उल्टा दागा सवाल
आलोचकों पर हमला बोलते हुए नेहा बोरा ने भारतीय जनता पार्टी और उसकी छात्र इकाई एबीवीपी (ABVP) को ही कठघरे में खड़ा कर दिया. नेहा ने कहा कि जो लोग मेरी उपस्थिति पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें पहले यह सवाल BJP और ABVP से पूछना चाहिए. जब देश भर के छात्र परीक्षा धांधली और पारदर्शी भर्ती के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे, तब BJP और ABVP कहां थे?
यदि वे आज झारखंड में छात्रों के साथ खड़े होने का नाटक कर रहे हैं, तो राष्ट्रीय स्तर के उस बड़े विरोध प्रदर्शन से वे पूरी तरह गायब क्यों थे? अवसरवादी उपस्थिति AISA की नहीं, बल्कि BJP और ABVP की रही है.
उन्होंने अपना आगे का प्लान शेयर करते हुए कहा कि AISA की नेशनल प्रेसिडेंट के रूप में, मैं भी एकजुटता व्यक्त करने के लिए खुद रांची पहुंचकर छात्रों के इस आंदोलन में शामिल हो रही हूं. AISA इस लोकतांत्रिक आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ा है और छात्रों की सभी जायज मांगों का पूर्ण समर्थन करता है. यदि किसी संगठन की उपस्थिति चयनात्मक और अवसरवादी रही है, तो वह बीजेपी और एबीवीपी हैं, AISA नहीं.
बताया रांची प्रोटेस्ट में अपना रुख
JPSC-JSSC भर्ती विवाद पर आपका क्या रुख है, और झारखंड के छात्रों के लिए आपकी आवाज़ उतनी मुखर क्यों नहीं रही? इसके जवाब में नेहा बोरा ने कहा कि झारखंड के छात्र और युवा JPSC और JSSC परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक और बड़े पैमाने पर धांधली के खिलाफ 29 अप्रैल 2026 से रांची के जयपाल सिंह मुंडा पार्क में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं. उनका यह संघर्ष पारदर्शी परीक्षाओं, निष्पक्ष भर्ती और लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य की लड़ाई है.
नेहा ने कहा कि हमारी स्पष्ट मांगें हैं कि 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा (PT) को तुरंत रद्द कर नए सिरे से आयोजित किया जाए. JSSC की लंबित परीक्षाओं को शीघ्र कराया जाए और JPSC JET का परिणाम तुरंत घोषित हो. निजी एजेंसियों को परीक्षाओं की आउटसोर्सिंग पूरी तरह बंद की जाए और सरकार द्वारा संचालित पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा प्रणाली बनाई जाए.साथ ही एक निश्चित समय सीमा वाला वार्षिक भर्ती कैलेंडर जारी हो. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए उनसे तुरंत बातचीत करें. नेहा ने कहा कि प्रशासनिक विफलता और भ्रष्टाचार की बलि छात्रों के भविष्य को नहीं चढ़ाया जा सकता.
मानसी मिश्रा