महाराष्ट्र में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट को लेकर हुए विवाद के बाद अब राज्य की MH CET परीक्षा भी सवालों के घेरे में आ गई है. इस बार विवाद परीक्षा के परिणामों को लेकर है. आरोप लगाया जा रहा है कि 12वीं विज्ञान में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले कई छात्र MH CET में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए, जबकि 12वीं में औसत अंक हासिल करने वाले कई छात्र CET के टॉपर बन गए. इस असामान्य स्थिति को लेकर शिक्षक, छात्र और राजनीतिक दल परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं. इसी वजह से MH CET के पहले 150 टॉपर्स की नियंत्रित माहौल में दोबारा परीक्षा कराने की मांग भी उठ रही है.
MH CET यानी महाराष्ट्र स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट राज्य की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं में से एक है. सरकारी और निजी कॉलेजों में बीई, बीटेक, एमबीए समेत कई अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए यह परीक्षा अनिवार्य है. साल 2009 से महाराष्ट्र में इसी परीक्षा के आधार पर प्रवेश दिए जा रहे हैं. परीक्षा का संचालन स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट सेल करता है, जिसके प्रमुख फिलहाल दिलीप सरदेसाई हैं.
इस पूरे विवाद की शुरुआत पुणे के प्रतिष्ठित COEP कॉलेज से पढ़ाई कर चुके अद्वय जोशी के विश्लेषण से हुई. अद्वय जोशी कई सालों से स्वयंम फिजिक्स नाम से कोचिंग चलाते हैं और 10वीं के बाद के छात्रों को फिजिक्स पढ़ाते हैं. फिलहाल वो बेंगलुरु में रहते हैं और उन्होंने पिछले कई वर्षों के परिणामों का विश्लेषण करने के बाद दावा किया कि MH CET परीक्षा के नतीजों में कई ऐसी बातें सामने आई हैं जो संदेह पैदा करती हैं.
MH CET के नतीजों पर छात्रों और शिक्षकों ने उठाए सवाल
अद्वय जोशी ने इस विषय पर 29 मिनट का एक वीडियो भी अपने यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किया है. वीडियो में उन्होंने दावा किया कि 12वीं विज्ञान में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स यानी PCM विषयों में 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले कई छात्र CET में केवल 40, 50 या 60 पर्सेंटाइल तक ही पहुंच पाए. वहीं दूसरी तरफ 12वीं में PCM में 45 से 60 प्रतिशत अंक पाने वाले कई छात्र CET में 95 से 100 पर्सेंटाइल तक पहुंच गए.
अद्वय जोशी का कहना है कि वर्ष 2022 से पहले ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिलती थी. उनके मुताबिक 2022 से पहले जो छात्र 12वीं विज्ञान में टॉप करते थे, वही CET में भी बेहतर प्रदर्शन करते थे. लेकिन 2022 के बाद यह पैटर्न धीरे-धीरे बदलने लगा. अब 12वीं में औसत अंक पाने वाले कई छात्र CET में टॉप कर रहे हैं, जबकि अच्छे अंक लाने वाले कई छात्र पीछे रह जा रहे हैं.
दिलचस्प बात यह है कि CET सेल के आयुक्त दिलीप सरदेसाई भी मानते हैं कि सामान्य तौर पर 12वीं में PCM विषयों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्र CET में भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं. उनके अनुसार CET सेल के पास मौजूद डेटा में भी ऐसा सकारात्मक संबंध दिखाई देता है. लेकिन 2025-26 के परिणामों ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2025-26 के CET टॉपर को 12वीं में PCM विषयों में केवल 51.67 प्रतिशत अंक मिले थे, जबकि 10वीं में उसके कुल अंक 50 प्रतिशत थे. इसी तरह दूसरे टॉपर को 12वीं में 51 प्रतिशत और 10वीं में सिर्फ 44 प्रतिशत नंबर मिले थे. इन आंकड़ों को लेकर कई लोग परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं. CET सेल के आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष महाराष्ट्र में करीब 4 लाख 60 हजार छात्रों ने MH CET परीक्षा दी. इनमें से लगभग 2 लाख 40 हजार छात्रों ने सेंट्रलाइज्ड एडमिशन प्रोसेस के लिए आवेदन किया. पहली मेरिट सूची सोमवार को जारी की गई.
डेटा के अनुसार 98 से 100 पर्सेंटाइल हासिल करने वाले छात्रों में करीब 200 ऐसे छात्र हैं, जिन्हें 12वीं के PCM विषयों में सिर्फ 40 से 50 प्रतिशत अंक मिले थे. दूसरी तरफ 12वीं में PCM में 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले करीब 50 छात्र ऐसे भी हैं, जो CET में केवल 30 पर्सेंटाइल तक ही पहुंच सके. इसी अंतर को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उठाए जा रहे हैं.
इस मामले को लेकर विपक्षी दल भी सरकार और CET सेल पर निशाना साध रहे हैं. एनसीपी के रोहित पवार, शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे और कांग्रेस ने परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस लगातार सोशल मीडिया पर इस मामले में संभावित गड़बड़ी की आशंका जता रही है. विपक्ष का कहना है कि 12वीं में अच्छे अंक लाने वाले छात्रों का CET में पिछड़ना और औसत अंक पाने वालों का टॉप करना सामान्य सकारात्मक संबंध को नहीं दिखाता, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
रोहित पवार, आदित्य ठाकरे और कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
हालांकि CET सेल के प्रमुख दिलीप सरदेसाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि 12वीं के अंकों और CET में मिले पर्सेंटाइल की सीधे तुलना करना सही नहीं है. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सामान्य तौर पर दोनों के बीच सकारात्मक संबंध देखने को मिलता है. फिलहाल MH CET के नतीजों को लेकर उठे सवालों के बीच बहस तेज हो गई है और पहले 150 टॉपर्स की नियंत्रित माहौल में दोबारा परीक्षा कराने की मांग लगातार उठ रही है.
अभिजीत करंडे