जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने फैकल्टी की भर्ती और प्रमोशन में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज करते हुए इसे प्रोपेगैंडा बताया है. उन्होंने आगे कहा कि उनके कार्यकाल में भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हुई है. यह मामला JNU छात्र संघ (JNUSU) और JNU शिक्षक संघ (JNUTA) की उन मांगों के बाद सामने आया है जिनमें कुलपति को हटाने, फैकल्टी भर्ती और प्रमोशन में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की गई है. पंडित ने एक बयान में कहा कि पिछले साढ़े चार साल में विश्वविद्यालय में खासकर SC/ST और OBC वर्गों की रिकॉर्ड संख्या में पारदर्शी भर्तियां हुई हैं. इसके बावजूद JNUSU और JNUTA की ओर से उनके खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि कोई सबूत नहीं, सिर्फ फर्जी प्रोपेगैंडा है.
JNU में 400 से ज्यादा इंटरव्यू और 200 से अधिक नियुक्तियां
JNU प्रशासन के मुताबिक, फरवरी 2022 से अब तक विश्वविद्यालय में 400 से ज्यादा इंटरव्यू हुए हैं और 200 से अधिक पदों पर नियुक्तियां की गई हैं. इनमें करीब 70 फीसदी नियुक्तियां आरक्षित और वंचित वर्गों से हुई हैं. प्रशासन ने यह भी कहा कि इंटरव्यू को लेकर किसी उम्मीदवार की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है. विश्वविद्यालय ने चयन समितियों की प्रक्रिया का भी बचाव किया. प्रशासन के अनुसार, चयन समिति में तीन विषय विशेषज्ञ, विजिटर के नामित प्रतिनिधि, संबंधित डीन और कुलपति शामिल होते हैं. चयन समिति द्वारा तय किए गए नामों को बाद में अकादमिक परिषद मंजूरी देती है.
IQAC की भूमिका पर भी JNU ने दी सफाई
प्रशासन ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय का इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (IQAC) उम्मीदवारों की योग्यता और उनके शोध प्रकाशनों से जुड़े दावों की जांच करता है. हालांकि, इंटरव्यू के दौरान अंतिम चयन में IQAC की कोई भूमिका नहीं होती है. वहीं, JNUSU ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि हाल की मीडिया रिपोर्टों में ऐसे उम्मीदवारों को दोबारा चयन प्रक्रिया में शामिल किए जाने को लेकर सवाल उठे हैं, जिन्हें विषय विशेषज्ञों ने अनिवार्य UGC पात्रता मानदंड पूरा नहीं करने के कारण खारिज कर दिया था.
7 शिक्षकों की नियुक्ति पर उठे सवाल
JNUTA ने जारी अपनी मांगों की लिस्ट में दावा किया है कि RTI से मिले जवाब, आधिकारिक रिकॉर्ड और कार्यकारी परिषद की असहमति से जुड़े नोट्स के आधार पर की गई जांच में कम से कम 7 फैकल्टी सदस्यों की नियुक्तियां UGC नियमों के खिलाफ होने की बात सामने आई है. हालांकि, JNU प्रशासन ने इसका जवाब देते हुए कहा कि स्क्रीनिंग प्रक्रिया में उम्मीदवारों के शोध प्रकाशनों के दावों की भी जांच की जाती है. खासकर मानविकी और सामाजिक विज्ञान जैसे क्षेत्रों में प्रकाशनों की जांच के लिए डेटाबेस और सत्यापन प्रक्रिया अधिक जटिल हो सकती है. प्रशासन के मुताबिक, इसी वजह से कुछ उम्मीदवारों को केंद्रों की ओर से शॉर्टलिस्ट किए जाने के बाद इंटरव्यू तक नहीं पहुंचाया गया जबकि कुछ ऐसे उम्मीदवार जिन्हें शुरुआत में चयनित नहीं किया गया था, उन्हें बाद में इंटरव्यू के लिए बुलाया गया.
प्रमोशन को लेकर क्या कहा?
प्रमोशन के मामले में विश्वविद्यालय ने बताया कि फरवरी 2022 से अब तक करीब 250 Career Advancement Scheme (CAS) आवेदन निपटाए गए हैं. इनमें कुछ ऐसे आवेदन भी शामिल हैं, जो 2006 से लंबित थे. JNU प्रशासन ने इसे विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से CAS के तहत हुई सबसे बड़ी संख्या में प्रमोशन बताया.
पारिवारिक संबंधों पर भी प्रशासन ने दी सफाई
विश्वविद्यालय ने फैकल्टी के बीच पारिवारिक या सुपरवाइजर से जुड़े संबंधों को लेकर उठाए गए सवालों को भी खारिज किया. प्रशासन ने कहा कि केवल वैवाहिक या पारिवारिक संबंध होना किसी व्यक्ति को नौकरी के लिए योग्य या अयोग्य नहीं बनाता. इसी तरह किसी उम्मीदवार का अपने सुपरवाइजर का पूर्व छात्र होना भी अपने आप में UGC के प्रकाशन संबंधी नियमों के उल्लंघन का प्रमाण नहीं है. JNU प्रशासन ने अंत में कहा कि विश्वविद्यालय में फैकल्टी की भर्ती और प्रमोशन की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से और तय नियमों के अनुसार की गई है.
आजतक एजुकेशन डेस्क