झारखंड में JSSC CGL परीक्षा के अचानक रद्द होने और जांच के घेरे में आने के बाद एक ऐसा प्रशासनिक और मानवीय संकट खड़ा हो गया है, जिसने दर्जनों परिवारों की जिंदगी रातों-रात अंधकार में धकेल दी है. जो युवा कल तक झारखंड मंत्रालय (प्रोजेक्ट भवन) के भीतर बतौर सहायक प्रशाखा अधिकारी (ASO) और फूड सेफ्टी ऑफिसर जैसी जिम्मेदार कुर्सियां संभाल रहे थे, आज वे ही अधिकारी मंत्रालय के बंद दरवाजों के बाहर खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठने को मजबूर हैं.
जांच के नाम पर 'ईमानदार और धांधली के आरोपियों' को एक ही पलड़े में तोले जाने से नाराज इन अभ्यर्थियों का दर्द अब आक्रोश बनकर सड़कों पर छलक रहा है.
घर जाकर क्या मुंह दिखाएंगे?
मंत्रालय के गेट के बाहर डटे अभ्यर्थियों की कहानियां सिर्फ एक नौकरी जाने का किस्सा नहीं हैं, बल्कि यह टूटते सपनों की पूरी दास्तान है. जल संसाधन विभाग में ASO रहे जमशेदपुर के ललन कुमार पांडे ने कहा कि घर में बूढ़े मां-बाप, पत्नी और एक छोटा बेटा है. अक्टूबर में दूसरे बच्चे का जन्म एक्सपेक्टेड है. घरेलू जरूरतों के लिए कर्ज लिया था, अब नौकरी चली गई तो कर्ज कैसे चुकाएंगे? समझ नहीं आ रहा कि घर जाकर क्या मुंह दिखाएं.
झारखंड मंत्रालय के पूर्व ASO राजीव रंजन का कहना है कि कल तक हम इसी मंत्रालय में बैठकर सरकार की फाइलें निपटाते थे, आज हमें इसके अंदर घुसने तक नहीं दिया जा रहा. शांतिपूर्ण सांकेतिक विरोध के लिए प्रशासन जगह तक अलॉट नहीं कर रहा. टेंट लगाने की इजाजत नहीं है, पूरा परिवार भयंकर मानसिक तनाव में है. शिवराज कुमार साहू (पूर्व ASO, MVI बिल्डिंग, शिक्षा विभाग) ने कहा कि प्रशासन को आधिकारिक चिट्ठी देकर धरने के लिए स्थान मांगा गया था, लेकिन कोई जगह नहीं दी गई. मजबूरी में खुले आसमान के नीचे रातें काटनी पड़ रही हैं.
गोद में मासूम बच्चा, आंखों में उम्मीद...
आंदोलन का सबसे भावुक मंजर तब देखने को मिला जब जेपीएससी (JPSC) के जरिए चुनी गईं पूर्व फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) अपनी गोद में दूधमुंहे बच्चे को लेकर पलामू से रांची पहुंचीं. महिला ने कहा कि घर पर बच्चे की दादी बीमार हैं और नानी के पास पहले से दो छोटे बच्चे हैं.
मेड के भरोसे इतने छोटे बच्चे को छोड़ना मुमकिन नहीं था, इसलिए इसे गोद में लेकर ही धरने पर बैठना पड़ा. आशा राज (पूर्व फूड सेफ्टी ऑफिसर, गुमला) ने कहा कि अपनी बर्खास्तगी और अनिश्चितता के खिलाफ अब इन महिला अधिकारियों ने हाईकोर्ट (न्यायालय) का दरवाजा खटखटाया है.
सत्यजीत कुमार