झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को एकमुश्त रद्द करने के फैसले पर झारखंड हाई कोर्ट की रोक के बाद राहत की सांस ले रहे चयनित अधिकारियों के बयान अब सामने आने लगे हैं. रांची जिले में बतौर फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) कार्यरत सौरभ सिंह ने अदालत से मिली अंतरिम राहत के बाद सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उनके अलावा अन्य कर्मचारियों ने भी अपनी बात रखी.
दो महीने पहले मिली थी नौकरी
सौरभ सिंह उन 24 फूड सेफ्टी अफसरों में शामिल हैं, जिनकी नियुक्ति को 26 दिनों के आंदोलन के बाद सरकार ने एक झटके में रद्द कर दिया था. उन्होंने कहा कि 2 महीने से काम कर रहे थे, अचानक सड़कों पर ला दिया.
हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले याचिकाकर्ता सौरभ सिंह ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि 24 जून को नियुक्ति मिली थी. हमे 24 जून को ही नियुक्ति पत्र मिला था और हम पिछले लगभग दो महीनों से रांची जिले में पूरी निष्ठा के साथ फूड सेफ्टी ऑफिसर के पद पर काम कर रहे थे. लेकिन अचानक नियुक्ति रद्द करने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया गया, जिसके बाद हमें मजबूरी में कोर्ट जाना पड़ा.
'बिना जांच पूरी व्यवस्था को दोषी ठहराना अन्याय'
सौरभ ने साफ शब्दों में कहा कि वे किसी भी निष्पक्ष जांच के खिलाफ नहीं हैं. अगर किसी अभ्यर्थी ने कोई गलत तरीका अपनाया है, धांधली की है, तो सरकार उसकी प्रॉपर जांच कराए और दोषी पर सख्त कार्रवाई करे. लेकिन बिना किसी जांच के, मेहनत से पास हुए सभी अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद्द कर देना युवाओं के संघर्ष और ईमानदारी के साथ सरासर अन्याय है.
सुनें क्या बोले सौरभ सिंंह
अदालत ने सुनी दलील: 'काम पर लौटें, जांच में सहयोग को तैयार'
सौरभ सिंह ने बताया कि हाई कोर्ट ने अभ्यर्थियों की इस न्यायसंगत दलील को स्वीकार किया और सरकार के रद्द करने वाले आदेश पर तुरंत रोक लगाते हुए उन्हें वापस काम पर लौटने का निर्देश दिया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी चयनित अभ्यर्थी पूरी तरह से बेदाग हैं और वे सरकार या किसी भी जांच एजेंसी (CBI/SIT) के साथ हर स्तर पर सहयोग करने के लिए तैयार हैं.
सत्यजीत कुमार