झारखंड हाईकोर्ट में JPSC और JSSC-CGL से जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर आज, 18 सितंबर को 11.30 से अहम सुनवाई होनी है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने पिछली सुनवाई में सरकार को चार सप्ताह का समय देने से इनकार करते हुए 48 घंटे के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था. अदालत ने सरकार से सीआईडी जांच की प्रगति और नियुक्तियां रद्द करने के आधार से जुड़ी जानकारी भी मांगी है.
क्या है पूरा विवाद और क्यों अटका है परिणाम?
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC-CGL) की परीक्षाओं के जरिए होने वाली नियुक्तियों को लेकर राज्य में लंबे समय से गतिरोध बना हुआ है. सरकार ने कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद इन भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला लिया था, जिसके खिलाफ सफल और प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
अदालत में दाखिल याचिकाओं में अभ्यर्थियों का तर्क है कि सरकार का नियुक्तियां रद्द करने का फैसला तर्कसंगत नहीं है और इससे हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है. वहीं, राज्य सरकार का पक्ष है कि परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और कथित धांधली की निष्पक्ष जांच (CID जांच) के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी था.
आज की सुनवाई क्यों है बेहद खास?
समय सीमा की पाबंदी: पिछली सुनवाई में जब सरकार ने पक्ष रखने के लिए चार हफ्ते की मोहलत मांगी थी, तब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ताओं के हित में महज 48 घंटे का वक्त दिया था.
सीआईडी जांच का रिपोर्ट कार्ड: आज राज्य सरकार को अदालत के समक्ष यह साफ करना होगा कि सीआईडी जांच में अब तक क्या ठोस तथ्य निकलकर सामने आए हैं और किस आधार पर पूरी परीक्षा प्रक्रिया को रद्द करने का निर्णय लिया गया.
हजारों अभ्यर्थियों की नजरें: आज की सुनवाई से यह तय हो सकता है कि कोर्ट इस मामले पर कोई अंतरिम राहत देता है या फिर सरकार के जवाब के आधार पर आगे की दिशा तय करता है.
झारखंड के लाखों युवा आज हाईकोर्ट से आने वाले हर अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इस फैसले का सीधा असर राज्य की प्रमुख प्रशासनिक और सहायक स्तर की भर्तियों पर पड़ने वाला है.
सत्यजीत कुमार