झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सीजीएल (CGL) परीक्षा रद्द करने को लेकर चल रहे हाई-प्रोफाइल विवाद में एक बहुत बड़ी खबर आई है! झारखंड हाई कोर्ट ने सभी पक्षों की ओर से दी गई तीखी बहसों और दलीलों को सुनने के बाद इस पूरे मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. अदालत का यह फैसला न केवल अभ्यर्थियों के भविष्य के लिहाज से बेहद अहम है, बल्कि यह भी तय करेगा कि परीक्षा रद्द होगी या नहीं.
जांच में अभी तक पेपर लीक साबित नहीं हुआ
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण टिप्पणी की. पीठ ने स्पष्ट किया कि अब तक की जांच रिपोर्ट में ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि परीक्षा से पहले पेपर लीक हुआ था. हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि अगर किसी परीक्षा में बहुत बड़े पैमाने पर धांधली या चीटिंग साबित होती है, तो सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक पूरी परीक्षा को रद्द किया जा सकता है.
सरकार और याचिकाकर्ताओं की ओर से जोरदार बहस
हाई कोर्ट में दोनों पक्षों के नामचीन वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए जुड़ीं वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने राज्य सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों और जजमेंट्स का हवाला देते हुए परीक्षा के पक्ष में दलीलें दीं. प्रार्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पटवालिया, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन और अमृतांश वत्स ने मोर्चा संभाला.
हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने कोर्ट को बताया कि परीक्षा का प्रश्नपत्र व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर परीक्षा से पहले ही बुरी तरह फैल चुका था, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए. अदालत ने दोनों पक्षों द्वारा पेश किए गए सुप्रीम कोर्ट के नजीरों और कानूनी दलीलों को रिकॉर्ड पर ले लिया है. हाई कोर्ट का यह सुरक्षित फैसला आने वाले दिनों में यह तय करेगा कि क्या JSSC CGL की परीक्षा दोबारा होगी या आयोग पुरानी परीक्षा के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया जारी रखेगा.
सत्यजीत कुमार