बिना थीसिस के मिलेगी PhD की डिग्री! देश में पहली बार इस IIT ने शुरू क‍िया अनोखा मॉडल

इस IIT ने डॉक्टरेट (PhD) की पढ़ाई में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव किया है. इस अनोखे बदलाव में छात्रों को सालों-साल लंबी थीसिस लिखने की जरूरत नहीं होगी. इसके बजाय संस्थान ने 'प्रोडक्ट/स्टार्टअप-ड्रिवन पीएचडी' मॉडल शुरू किया है, आइए जानते हैं इस नये ट्रेंड के बारे में...

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ऋषभ चौहान

  • नई द‍िल्ली ,
  • 27 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:17 AM IST

देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में 'डिग्री से ज्यादा स्किल्स और प्रैक्टिकल काम की अहमियत' पर लंबे समय से बहस चल रही है. इसी बीच आईआईटी रोपड़ ने इस सोच को हकीकत में बदलते हुए डॉक्टरेट (PhD) शिक्षा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है. अब यहां के स्कॉलर्स को वर्षों तक मोटी-मोटी थीसिस लिखने की मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी. इसके बजाय, रियल-वर्ल्ड इंडस्ट्री प्रॉब्लम्स को हल करके प्रोडक्ट बनाने या स्टार्टअप खड़ा करने पर ही PhD की डिग्री दे दी जाएगी.   

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IIT रोपड़ ने 'प्रोडक्ट/स्टार्टअप-ड्रिवन पीएचडी' पाथवे की शुरुआत की है. भारत के किसी भी आईआईटी (IIT) में इस तरह का यह पहला और अनोखा प्रोग्राम है.   

'10 लाख रुपये कमाओ और ले जाओ PhD की डिग्री' 

इंडिया टुडे से बातचीत में आईआईटी रोपड़ के डायरेक्टर प्रोफेसर राजीव आहूजा ने स्पष्ट किया कि इस नए मॉडल के तहत शोधकर्ता को कोई भी पीएचडी थीसिस लिखने की जरूरत नहीं है.    संस्थान के एसोसिएट डीन (पोस्ट ग्रेजुएट एंड रिसर्च) सारंग गुंफेकर ने इस अनोखे नियम को बेहद सरल शब्दों में समझाते हुए कहा, 'आपके पास पूरी आजादी है और केवल एक ही टारगेट है. एक प्रोडक्ट बनाइए, उसे बेचिए, 10 लाख रुपये कमाकर मुझे दिखाइए और अपनी PhD ले जाइए.' 
   
प्रोफेसर गुंफेकर ने बताया कि पारंपरिक रिसर्च में 'रिसर्च पेपर' पब्लिश करने का भारी दबाव होता है, जिसकी वजह से कई बार डेटा में हेरफेर या चोरी (प्लेगेरिज्म) जैसे मामले सामने आते हैं. ये नया मॉडल इस मानसिक दबाव को खत्म करेगा और छात्रों को कुछ नया बनाने के लिए प्रेरित करेगा.   

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डिग्री पाने के 3 आसान रास्ते

IIT रोपड़ के इस मॉडल के तहत कोई भी छात्र तीन में से किसी एक तरीके से अपनी पीएचडी पूरी कर सकता है.    
1. पेटेंट: अपने आविष्कार या तकनीक का पेटेंट फाइल करके उसे मंजूर (Grant) कराएं.   
2. स्टार्टअप: अपनी खुद की कंपनी/स्टार्टअप शुरू करें, प्रोडक्ट तैयार करें और बाजार में बेचकर कमाई करें.   
3. टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: अपनी बनाई तकनीक को किसी स्थापित कंपनी (जैसे टाटा, रिलायंस या होंडा) को ट्रांसफर करें, जिससे कंपनी प्रोडक्ट बनाए और आपको उसकी रॉयल्टी मिले.   

चीन से मिली प्रेरणा, BITS पिलानी में भी ऐसा मॉडल 

चीन ने भी हाल ही में ऐसा ही कदम उठाया था, जहां फरवरी 2026 में एक सिविल इंजीनियरिंग स्कॉलर को बिना थीसिस लिखे, ब्रिज-पाइलन (पुल के खंभे का नया डिजाइन) का प्रैक्टिकल प्रोडक्ट बनाने पर पीएचडी दी गई थी. भारत में BITS पिलानी (WHILSP प्रोग्राम) के बाद IIT रोपड़ देश का पहला ऐसा आईआईटी बन गया है जो थीसिस के बजाय प्रैक्टिकल अचीवमेंट पर डिग्री दे रहा है. आईआईटी रोपड़ का यह मॉडल न केवल भारत के रिसर्च कल्चर को बदलेगा, बल्कि हजारों स्कॉलर्स को सिर्फ पन्नों की रिपोर्ट छापने के बजाय देश के लिए रोजगार और उपयोगी टेक्नोलॉजी बनाने के लिए प्रेरित करेगा.  

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