IIT दिल्ली के निदेशक रंगन बनर्जी ने 31 वर्षीय MSc फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के विरोध में जारी प्रदर्शनों के दौरान परिसर के कामकाज में बाधा डालने वाले छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रों ने गुरुवार को आधी रात को मार्च निकाला. उन्होंने कुमार की मौत की जिम्मेदारी तय करने और मामले की पारदर्शी जांच की मांग की. इसके बाद यह चेतावनी जारी की गई. शुक्रवार शाम छात्रों को भेजे ईमेल में बनर्जी ने कहा कि गुरुवार रात हालात काफी बिगड़ गए थे. प्रदर्शनकारी रात 10:30 बजे से 12:30 बजे के बीच आवासीय इलाकों में घुस गए थे.
शिक्षकों के परिवारों की सुरक्षा पर पड़ रहा है असर
निदेशक ने आगे कहा कि कुछ संकाय सदस्यों के घरों के बाहर प्रदर्शन किए गए. इस दौरान कुछ नारे अपमानजनक और धमकी भरे थे. उनका कहना है कि ऐसे व्यवहार से शिक्षकों और उनके परिवारों की सुरक्षा, निजी जीवन और शांति प्रभावित होती है. बनर्जी ने साफ कहा कि संस्थान के शांतिपूर्ण माहौल को खराब करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. इसमें आवासीय इलाकों, कक्षाओं और शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा डालने वाले लोग भी शामिल हैं.
निकाला मार्च, रखी मांगें
आधी रात को निकाले गए मार्च के दौरान, प्रदर्शनकारी छात्र परिसर से होते हुए आगे बढ़े और शिक्षकों से बाहर आकर उनके साथ एकजुटता दिखाने का आग्रह किया. कुछ छात्रों ने चिंता व्यक्त की है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई उनके शैक्षणिक करियर और प्लेसमेंट गतिविधियों में भागीदारी को प्रभावित कर सकती है. एक छात्र ने कहा कि निदेशक का संदेश चल रहे विरोध आंदोलन को कमजोर कर सकता है.
बाहरी जांच समिति में सुधार
विरोध प्रदर्शनों के बीच आईआईटी दिल्ली ने कुमार की मौत की जांच के लिए गठित बाहरी जांच समिति का पुनर्गठन भी किया है. उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार के निजी कारणों से पद छोड़ने के बाद, दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता को नई अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. इस पैनल में एम्स दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रताप शरण, दो छात्र प्रतिनिधि और आईआईटी दिल्ली के रजिस्ट्रार भी शामिल हैं.
उठाए जा रहे हैं कदम
इस दौरान बनर्जी ने कहा कि जांच समिति ने काम शुरू कर दिया है और संस्थान के परोपकारी कोष के माध्यम से कुमार के परिवार के लिए वित्तीय सहायता स्वीकृत कर दी गई है. शिक्षकों, छात्रों और कर्मचारियों के स्वैच्छिक योगदान से एक अलग कोष भी बनाया गया है. संस्थान ने कहा कि अगले सप्ताह एक बाहरी लोकपाल नियुक्त किया जाएगा और यह भी कहा कि उसने छात्र प्रतिनिधियों के साथ बातचीत जारी रखी है.
एक वीडियो संदेश में, बनर्जी ने स्वीकार किया कि छात्रों को समर्थन देने के लिए मौजूदा उपाय पर्याप्त नहीं थे और कहा कि संस्थान को विश्वास को फिर से कायम करने के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है.
आजतक एजुकेशन डेस्क