उत्तर प्रदेश के एटा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. आरोप है कि एक कोचिंग/ट्यूशन सेंटर में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों से कथित तौर पर राजनीतिक रूप से संवेदनशील, स्क्रिप्टेड और आपत्तिजनक रील्स बनवाई जा रही थीं.
रील में टीचर को बच्चे बताते हैं कि किसी की बोतल चोरी हो गई, किसी का कुछ सामान, इस पर टीचर पूछती है कि इतनी सब चोरियां कौन कर रहा है. इस पर बच्चे पीएम नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं और बाद में बच्चे खुद को छोटे कॉकरोच कहते हुए नजर आ रहे हैं. ये बच्चे मुश्किल से 6 से 10 साल के दिख रहे हैं.
इस रील को लोग मासूमों के दिमाग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नफरत भरने और उनसे आपत्तिजनक बातें बुलवाने की साजिश करार दे रहे हैं. अब इस मामले में 'राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग' (NHRC) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. आयोग ने इसे बच्चों की गरिमा, निजता, मानसिक सुरक्षा और उनके सीधे शोषण का मामला मानते हुए केंद्र सरकार से लेकर मेटा इंडिया तक को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
होम ट्यूटर पर FIR, 'प्रतिभा एडू स्क्वॉड' पर एक्शन
मामला बढ़ने पर एटा पुलिस ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि 'प्रतिभा' नाम की एक होम ट्यूटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. वो इंस्टाग्राम पर 'प्रतिभा एडू स्क्वॉड' नाम से हैंडल चलाती है. आरोप है कि यह ट्यूटर अपने यहां पढ़ने आने वाले बच्चों का ब्रेनवाश कर रही थी और उनसे पीएम मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ नफरत फैलाने वाले वीडियो शूट कराकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रही थी.
NHRC की पीठ सख्त, 2 हफ्ते के भीतर रिपोर्ट तलब
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो के नेतृत्व वाली पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल संज्ञान लिया है. आयोग ने एटा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और जिलाधिकारी (DM) मेटा इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं कंट्री हेड इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव को नोटिस जारी कर दिए हैं. NHRC ने सभी पक्षों से इस पूरे मामले में की गई कार्रवाई (ATR) की विस्तृत रिपोर्ट दो हफ्तों के भीतर दाखिल करने को कहा है.
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर
मानवाधिकार आयोग ने अपनी चिंता में स्पष्ट किया है कि राजनीतिक या वैचारिक एजेंडे के लिए बच्चों का इस तरह इस्तेमाल करना उनके बाल अधिकारों का सीधा उल्लंघन है. बिना माता-पिता की सहमति और उनकी समझ से परे जाकर मासूमों के हाथों में ऐसी स्क्रिप्ट थमाना उनके मनोवैज्ञानिक विकास और सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक है. आयोग ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी ऐसी आपत्तिजनक सामग्रियों पर लगाम लगाने के कड़े निर्देश दिए हैं.
आजतक एजुकेशन डेस्क