दिल्ली यूनिवर्सिटी का हिंदू कॉलेज... जिसे देश के सबसे बेहतरीन कॉलेजों में गिना जाता है, आज वही हिंदू कॉलेज घोटालों और गड़बड़ियों के संगीन आरोपों के घेरे में आ खड़ा हुआ है.
हालत यह हो गई है कि कॉलेज के अपने ही प्रोफेसर्स और स्टाफ (हिंदू कॉलेज स्टाफ एसोसिएशन) ने मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने डीयू के कुलपति (VC) को एक चिट्ठी सौंपी है, जिसमें मांग की गई है कि हिंदू कॉलेज का कंट्रोल तुरंत दिल्ली यूनिवर्सिटी अपने हाथ में ले और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए. आखिर देश के इस मशहूर कॉलेज के अंदर ऐसा क्या पक रहा है? आइए जानते हैं प्रोफेसर्स ने अपनी शिकायत में क्या-क्या सनसनीखेज आरोप लगाए हैं.
बिना नियमों के एडमिशंस और फर्जी बैठकें
स्टाफ एसोसिएशन का आरोप है कि कॉलेज में सुपरन्यूमरेरी (अतिरिक्त सीटों) के एडमिशन में जम कर धांधली हुई है. एडमिशन कमेटी और डिपार्टमेंट हेड्स के कड़े ऐतराज के बावजूद 20% की तय लिमिट और डीयू के नियमों को दरकिनार कर मनमर्जी से एडमिशन दिए गए.
यही नहीं एडमिशन पर मुहर लगाने के लिए बुलाई गई एक आम बैठक को कागजों पर 'स्टाफ काउंसिल' की फर्जी बैठक बताकर पेश कर दिया गया, जबकि चुने हुए सेक्रेटरी उसमें मौजूद ही नहीं थे.
प्रोफेसर्स को परेशान करने और तानाशाही के आरोप
कॉलेज प्रशासन की तानाशाही से परेशान शिक्षकों का कहना है कि उनके छुट्टियां और प्रमोशन रोके गए. प्रोफेसर्स की स्टडी लीव, बच्चों की देखभाल वाली छुट्टियां और हक के प्रमोशन को बेवजह रोका या अटकाया जा रहा है. कॉलेज की आधिकारिक 'स्टाफ काउंसिल' को साइडलाइन करके समानांतर (पैरेलल) कमेटियां बनाकर मनमाने फैसले लिए जा रहे हैं.
टेंडर में झोल, पैसों का हेरफेर और प्राइवेट कमर्शियल काम
वित्तीय मामलों को लेकर तो आरोप और भी तीखे हैं. आरोप है कि कॉलेज के संसाधनों और जमीन का इस्तेमाल निजी कमाई वाले व्यावसायिक कामों के लिए किया जा रहा है. हॉस्टल की मैस का टेंडर नियमों को ताक पर रखकर दिया गया. वहीं सालों से सिक्योरिटी और सफाई कर्मचारियों का ठेका बिना खुला टेंडर निकाले ही आगे बढ़ाया जा रहा है. सीएजी (CAG) की रिपोर्ट, ऑडिट के कागजात और टेंडर की शर्तें सार्वजनिक नहीं की जा रही हैं.
छात्रों की जेब पर डाका और नई बिल्डिंग की सीलन!
बात सिर्फ शिक्षकों तक सीमित नहीं है, छात्रों के हक पर भी मार पड़ रही है. आरोप है कि हर साल फीस में अनाप-शनाप बढ़ोतरी की जा रही है, लेकिन कोई हिसाब नहीं दिया जाता. स्कॉलरशिप देने में भी कोई पारदर्शिता नहीं है. कॉलेज की नई बनी इमारतों में सीलन आ रही है और बार-बार आग लगने की घटनाएं हो रही हैं, जिसकी जांच की सख्त मांग की गई है. वाइस प्रिंसिपल और बाकी अधिकारी अपने तय समय (टैन्योर) के खत्म होने के बाद भी कुर्सियों पर जमे हुए हैं.
प्रिंसिपल और चेयरमैन को तुरंत हटाओ
हिंदू कॉलेज स्टाफ एसोसिएशन के प्रेसिडेंट रतन लाल और सेक्रेटरी शंकर कुमार के दस्तखत वाली इस चिट्ठी में साफ कहा गया है कि जब तक हिंदू कॉलेज के गवर्निंग बॉडी चेयरमैन और प्रिंसिपल को उनके पद से हटाया नहीं जाता, तब तक निष्पक्ष जांच मुमकिन नहीं है. प्राइवेटाइजेशन की कोशिशों को रोकने के लिए डीयू तुरंत कॉलेज का अधिग्रहण करे!
आजतक एजुकेशन डेस्क