JEE छात्रा की याचिका खारिज, IIT में दाखिले पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- सहानुभूति के आधार पर नियमों में छूट नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने आईटीटी में दाखिले के लिए एक जेईई छात्रा की याचिका खारिज करते हुए फैसला सुनाया है कि सहानुभूति या शैक्षणिक कठिनाइयों के आधार पर योग्यता शर्तों में ढील नहीं दी जा सकती. 

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 JEE परीक्षा में सवालों पर  इल्जाम लगाने वाली छात्रा को हाईकोर्ट से झटका JEE परीक्षा में सवालों पर इल्जाम लगाने वाली छात्रा को हाईकोर्ट से झटका

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 03 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:19 PM IST

आईआईटी में दाखिले की कोशिश कर रही एक छात्रा को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली. कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि आईआईटी में प्रवेश के लिए तय योग्यता और पात्रता शर्तों की जगह सहानुभूति या व्यक्तिगत कठिनाइयों को आधार नहीं बनाया जा सकता. अदालत ने यह भी कहा कि मौजूदा नियमों और तय मानकों से हटकर किसी उम्मीदवार को दाखिला देने का निर्देश नहीं दिया जा सकता.

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मामला जेईई मेन 2025 के मूल्यांकन और जेईई एडवांस्ड 2026 में शामिल होने की पात्रता से जुड़ा था. याचिकाकर्ता आशी अग्रवाल ने जेईई मेन के कुछ सवालों के मूल्यांकन में गड़बड़ी के आरोप लगाया था. इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अगर मूल्यांकन की गलतियां सुधारी जाती तो वह जेईई एडवांस्ड के लिए जरूरी अंक हासिल कर सकती थीं और आईआईटी में दाखिले की पात्रता बन सकती थी.

पांच सवालों के मूल्यांकन पर उठाए सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक आशी अग्रवाल ने जेईई मेन 2025 के पांच सवालों के मूल्यांकन पर आपत्ति जताई थी. इनमें फिजिक्स के तीन और केमिस्ट्री के दो सवाल शामिल थे. छात्रा का दावा था कि इन सवालों के मूल्यांकन में गड़बड़ी के कारण उसे 20 अंकों का नुकसान हुआ और पांच अंकों की नेगेटिव मार्किंग भी हुई. उनका कहना था कि मूल्यांकन सही होने पर वह जेईई एडवांस्ड के लिए क्वालिफाई कर सकती थीं. इसके अलावा छात्रा ने जेईई मेन 2025 के दूसरे सत्र की परीक्षा में प्रवेश नहीं दिए जाने को भी चुनौती दी थी. उनका दावा था कि वह परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से पहले पहुंची थीं, लेकिन उन्हें परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिली. 

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ऑडिट लॉग में गड़बड़ी का दावा

यह मामला यहीं पर नहीं थमा. केस की पिछली सुनवाई के दौरान एनटीए ने परीक्षा से जुड़े ऑडिट लॉग अदालत के सामने पेश किए थे. छात्रा ने इन लॉग में कई गलतियों का दावा किया था. इनमें परीक्षा की तारीख, टाइमस्टैम्प, प्रश्न और विकल्पों की आईडी से जुड़ी आपत्तियां शामिल थीं. एक सवाल के मामले में ऑडिट लॉग और रिस्पॉन्स शीट में अलग-अलग विकल्प दर्ज होने का भी दावा किया गया था. मई 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने छात्रा के आरोपों के बाद जेईई एडवांस्ड 2026 के आयोजन अध्यक्ष को फैसला लेने का निर्देश दिया था. हालांकि, इसके बाद छात्रा को 17 मई 2026 को हुई जेईई एडवांस्ड परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं मिली. 18 मई को उसकी शिकायत भी खारिज कर दी गई.

कोर्ट ने क्यों नहीं दी राहत?

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि ऑडिट लॉग, परसेंटाइल और परीक्षा केंद्र में प्रवेश से जुड़े कई सवाल तथ्यात्मक विवाद हैं. इनकी जांच के लिए तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत पड़ सकती है. रिट याचिका के दायरे में अदालत ऐसी विस्तृत तकनीकी जांच नहीं कर सकती, जब तक स्पष्ट गलती या मनमानी साबित न हो. कोर्ट ने यह भी माना कि छात्रा को आईआईटी में दाखिला देने के लिए कई संभावित घटनाओं को सही मानना पड़ेगा.पहले मूल्यांकन में गलती साबित हो,फिर अंक और परसेंटाइल बदले जाएं, इसके बाद जेईई एडवांस्ड की पात्रता बने और आखिर में आईआईटी में दाखिला मिले. अदालत ने कहा कि ऐसी संभावित घटनाओं की पूरी कड़ी आईआईटी में दाखिले का आधार नहीं बन सकती.

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2026 के लिए JEE Advanced की पात्रता भी बनी वजह

कोर्ट ने जेईई एडवांस्ड 2026 की पात्रता शर्तों पर भी गौर किया. रिपोर्ट के अनुसार,इस परीक्षा के लिए उम्मीदवार का पहली बार 2025 या 2026 में कक्षा 12वीं की परीक्षा में शामिल होना जरूरी था. आशी अग्रवाल ने 2024 में 12वीं की परीक्षा पास की थी. ऐसे में वह इस पात्रता शर्त को पूरा नहीं करती थीं. कोर्ट ने कहा कि पात्रता के नियम सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू होते हैं और इस मामले में नियमों से अलग हटकर छूट देने का आधार नहीं है.

IIT दिल्ली में अतिरिक्त सीट बनाने की मांग भी खारिज

छात्रा ने आईआईटी दिल्ली में दाखिले के लिए एक अतिरिक्त यानी सुपरन्यूमरेरी सीट बनाने की मांग भी की थी. कोर्ट ने इस मांग को भी स्वीकार नहीं किया. अदालत ने कहा कि आईआईटी में दाखिला एक तय मेरिट आधारित व्यवस्था के तहत होता है, जिसमें पात्रता, कटऑफ, प्रयास और सीटों की संख्या पहले से निर्धारित होती है. अदालत के मुताबिक किसी एक उम्मीदवार के लिए अलग सीट बनाना और पूरी प्रवेश प्रक्रिया को दोबारा खोलना सामान्य राहत नहीं माना जा सकता. इन सभी पहलुओं को देखते हुए कोर्ट ने आशी अग्रवाल की याचिका खारिज कर दी. 

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