12वीं के एग्जाम में कैलकुलेटर ले जाने की मांग! दिल्ली हाईकोर्ट ने CBSE, केंद्र और NCERT से मांगा जवाब

कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में साधारण और गैर-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति मांगने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है. हाईकोर्ट ने सीबीएसई (CBSE), केंद्र सरकार, एनसीईआरटी और परख (PARAKH) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी 2027 को तय की गई है.

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संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 04 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:53 PM IST

कक्षा 12वीं के छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं में साधारण और गैर-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति दिए जाने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई (CBSE) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इसके अलावा, अदालत ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) और 'परख' (PARAKH) से भी इस विषय पर जवाब मांगा है.

कार्यवाहक चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्बरे और जस्टिस संजय शर्मा की पीठ ने सीबीएसई और अन्य पक्षकारों को अपना पक्ष और जवाब दाखिल करने के लिए आठ हफ्तों की मोहलत दी है. दिल्ली हाईकोर्ट में अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी 2027 को होगी.

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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ को बताया कि दिसंबर 2024 में हुई गवर्निंग बॉडी की बैठक में सीबीएसई ने कक्षा 12वीं की एकाउंटेंसी की परीक्षा में कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की थी. पाठ्यक्रम समिति ने भी दिसंबर 2024 में इस एजेंडे को मंजूरी दे दी थी, लेकिन उसके बाद से इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई.

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया है कि परीक्षाओं में लंबी और पेचीदा गणनाओं (Calculations) के कारण छात्रों का काफी कीमती समय बर्बाद होता है. यदि कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति मिलती है, तो छात्र हाथ से गणना करने में समय गंवाने के बजाय विषय के मुख्य कॉन्सेप्ट और अपनी समझ पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे.

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में यह सुविधा केवल 'डिस्कैलकुलिया' (Dyscalculia यानी गणितीय अवधारणाओं को समझने में असमर्थता) से पीड़ित चुनिंदा विशेष छात्रों को ही दी जाती है. याचिका में यह भी मांग की गई है कि इसका दायरा बढ़ाकर अन्य श्रेणियों के दिव्यांग छात्रों को भी उनकी जरूरत के अनुसार राहत प्रदान की जाए.

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