बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा 2023 में पेपर लीक के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने इस मामले में आरोपी कौशिक कुमार कर से जुड़ी पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है. इन संपत्तियों की कीमत करीब 2.01 करोड़ रुपये बताई गई है. ईडी के मुताबिक, ये संपत्तियां एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर थीं. जांच में परीक्षा के पेपर छापने का ठेका लेने, कंपनी की पहचान छिपाने और कथित तौर पर फर्जी कंपनियों के जरिए पैसों के लेन-देन में गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं.
कब हुई थी पुलिल भर्ती परीक्षा?
बता दें कि बिहार पुलिस में कांस्टेबल के 21,391 पदों पर भर्ती के लिए केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) यानी CSBC ने 9 जून 2023 को नोटिफिकेशन जारी किया था. जारी किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक, लिखित परीक्षा का आयोदन 1, 7 और 15 अक्तूबर, 2023 को तीन चरणों में किया गया था. हालांकि, 1 अक्टूबर को हुई परीक्षा के दोनों पालियों के बाद पेपर लीक और नकल को लेकर खबरें सामने आई थीं. इसके बाद 3 अक्टूबर 2023 को बोर्ड ने 1 अक्टूबर की परीक्षा रद्द कर दी और 7 व 15 अक्टूबर को होने वाली परीक्षाएं भी स्थगित कर दीं.
पेपर लीक के बाद दोबारा हुई थी परीक्षा
CSBC ने बाद में नई तारीखों पर लिखित परीक्षा करवाने का फैसला किया था. बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, दोबारा परीक्षा 7, 11, 18, 21, 25 और 28 अगस्त 2024 को आयोजित की गई. इसके बाद 14 नवंबर 2024 को लिखित परीक्षा का परिणाम जारी किया गया, जिसके आधार पर उम्मीदवारों को शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया.
पेपर लीक कैसे हुआ था?
ईडी की 30 अक्टूबर 2026 की प्रेस रिलीज के मुताबिक, बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र छापने का ठेका कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड को मिला था. ईडी का आरोप है कि कौशिक कुमार कर ने ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस प्राइवेट लिमिटेड की भूमिका छिपाने के लिए कैल्टेक्स को प्रॉक्सी कंपनी के तौर पर इस्तेमाल किया. ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस पहले कुछ अन्य परीक्षा पेपर लीक मामलों में ब्लैकलिस्टेड थी.
ईडी के मुताबिक, कैल्टेक्स के पास पहले से प्रिंटिंग का अनुभव और अपना प्रिंटिंग प्रेस नहीं था. इसके बाद भी उसे पेपर छापने का ठेका मिला. आरोप है कि कैल्टेक्स ने यह काम आगे ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को दे दिया, जो अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन था. ईडी की जांच के अनुसार, प्रश्नपत्र कोलकाता से पटना लाते समय रास्ते में ही लीक कर दिया गया था. इस मामले में ईडी ने बिहार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की एफआईआर और 22 अगस्त 2024 को दाखिल चार्जशीट के आधार पर जांच शुरू की थी.
5.90 करोड़ रुपये के भुगतान में क्या गड़बड़ी मिली?
इस मामले की जांच में सामने आया कि कैल्टेक्स को पेपर छपाई के काम के लिए 5.90 करोड़ रुपये एडवांस मिले थे. ईडी के मुताबिक, इस रकम का कुछ हिस्सा ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को भेजा गया, जबकि करीब 2.01 करोड़ रुपये अलग-अलग कथित फर्जी कंपनियों के जरिए दूसरी जगह ट्रांसफर किए गए. जांच एजेंसी का कहना है कि इन कंपनियों का वास्तविक कारोबारी कामकाज नहीं था और लेन-देन के जरिए पैसों का स्रोत छिपाने की कोशिश की गई.
ईडी के मुताबिक, कौशिक कुमार कर के नियंत्रण वाली एक अन्य कंपनी एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर पांच अचल संपत्तियां थीं. जांच में मिले अपराध से जुड़े धन के बराबर कीमत होने के आधार पर इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया गया है.
आगे भी जारी रहेगी जांच
इस मामले में अब ईडी ने भी साफ कर दिया है कि फिलहाल पांच संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है और मामले में आगे की जांच जारी है. एजेंसी अन्य आरोपियों और कंपनियों की भूमिका के साथ-साथ अपराध से जुड़े धन का पता लगाने की भी कोशिश कर रही है.
शशि भूषण कुमार