क्यों हिंदी नहीं बन पाई भारत की राष्ट्र भाषा? जानिए क्या है इसके पीछे की वजह

World Hindi Day 2024: अकसर हिंदी को भारत की राष्ट्र भाषा का दर्जा प्राप्त न होना डिबेट का मुद्दा बन जाता है. लोग पक्ष और विपक्ष में बंटे नजर आते हैं लेकिन इससे पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि आज भी हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा प्राप्त क्यों नहीं है.

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विश्व हिंदी दिवस 2024 (फोटो सोर्स: Freepik.com) विश्व हिंदी दिवस 2024 (फोटो सोर्स: Freepik.com)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 5:45 PM IST

World Hindi Day 2024: हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस (World Hindi Day) के रूप में मनाया जाता है. यह दिन दुनियाभर में हिंदी भाषी लोगों की के लिए महत्वपूर्ण दिन होता है, जो हिंदी भाषा के इतिहास और उसके प्रचार-प्रसार पर केंद्रित है. ये इंटरनेशनल लेवल पर हिंदी भाषी लोगों के एक सूत्र में बांधने का मौका होता है. इस दिन दुनियाभर में फैले भारतीय दूतावासों, विदेशों के विश्वविद्यालयों की हिंदी शिक्षण पीठों, भारत के सरकारी कार्यलायों, विश्वविद्यालयों, स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों में हिंदी पर सम्मेलन, कार्यक्रम और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है.

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विश्व हिंदी दिवस कब शुरू हुआ था?
दरअसल 10 जनवरी 1975 में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन हुआ था. विश्व हिंदी दिवस उस सम्मेलन की वर्षगांठ का प्रतीक है, जिसका उद्घाटन भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने नागपुर में किया था.इस सम्मेलन में मॉरिशस के प्रधानमंत्री सीवसागुर्ग रामगुलाम मुख्य अतिथि थे, जिसमें 30 देशों के 122 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था. इसके बाद यह सम्‍मेलन यूनाइटेड किंगडम, मॉरिशस और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे अलग-अलग देशों में आयोजित किया जाता रहा है.  बाद में साल 2006 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाने की घोषिणा की थी.

विश्व हिंदी दिवस 2024 की थीम
हर साल एक नई थीम के साथ विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है. उसी तरह 2024 में 'हिंदी- पारंपरिक ज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को जाड़ना' विश्व हिंदी दिवस की थीम रखी गई है.

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भारत की राष्ट्र भाषा क्यों नहीं है हिंदी?
भारत, विविधताओं से भरा देश है, जहां अनेक भाषाएं और बोलियां बोली, लिखी और पढ़ी जाती हैं. सभी भाषाओं और एक समान सम्‍मान और आदर मिला हुआ है. देशवासी पूरे देश में अपनी मातृभाषा बोलने, लिखने और पढ़ने के लिए स्‍वतंत्र हैं. इसलिए भारत में किसी भी एक भाषा को राष्‍ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया है. 

इसका एक बड़ा कारण नौकरियों के अवसर भी हैं, क्योंकि भारत की एक बड़ी आबादी ऐसी भी है जो न तो हिंदी बोलती है और न ही हिंदी समझती है. अगर हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया गया तो ये आबादी नौकरियों के अवसर से वंचित रह सकती है. जैसा ब्रिटिश राज में फारसी की जगह अंग्रेजी को अपनाने के दौरान हुआ था. हालांकि भारत के संविधान के भाग 17 के अनुच्‍छेद 343(1) के तहत देश में हिंदी और देवनागरी लिपि को राजभाषा का दर्जा प्राप्त है. 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया था, 1953 से राजभाषा प्रचार समिति द्वारा हर साल 14 सितंबर को हिंदी द‍िवस का आयोजन भी किया जाता है.

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