भारत में सरकारी नौकरी और खासकर UPSC को अक्सर सुरक्षित और स्थिर करियर के तौर पर देखा जाता है. माता-पिता से लेकर छात्रों तक, बड़ी संख्या में लोग इसे करियर की सबसे भरोसेमंद रास्ता मानते हैं लेकिन इसके लिए उम्मीदवारों को रात-दिन एक करना होता है, UPSC की तैयारी करना भी इतना महंगा होता है कि कई बार लोग इसे बीच में ही छोड़ देते हैं. अब इसे लेकर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC) के सदस्य और अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने अपनी राय रखी है. उनका कहना है कि दुनिया में कोई भी करियर पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और UPSC जैसी बेहद प्रतिस्पर्धी परीक्षा की तैयारी करना भी अपने आप में एक बड़ा जोखिम है.
सबसे सुरक्षित करियर जैसी कोई चीज नहीं होती है...
दरअसल, IIT मद्रास के प्रोफेसर महेश पंचगुला के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान संजीव सान्याल से सबसे सेफ करियर के बारे में पूछा गया तो, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसा कोई करियर ही नहीं है, जो सुरक्षित हो. उन्होंने छात्रों की उस सोच पर भी सवाल उठाया जिसमें वे लंबे समय तक यह तय करने में लगे रहते हैं कि उनके लिए कौन सा एक करियर सबसे सही और सुरक्षित रहेगा. बातचीत में सान्याल ने UPSC में सालों की मेहनत और समय को लेकर भी अपनी राय रखी. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इस परीक्षा में जाने की कोशिश करना काफी जोखिम भरा है.
क्या कहते हैं आंकड़े?
रिपोर्ट में UPSC के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि 2023 की सिविल सेवा परीक्षा के लिए 10 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जबकि करीब 5.95 लाख उम्मीदवारों ने प्रारंभिक परीक्षा में हिस्सा लिया. इनमें से केवल 1,016 उम्मीदवार ही लास्ट कर पहुंचे जबकि उस साल 1,143 रिक्तियां बताई गई थीं. वहीं इंटरव्यू चरण तक पहुंचे 1,410 उम्मीदवारों का सिलेक्शन नहीं हुआ. यानी UPSC की तैयारी में कई साल लगाने के बावजूद अंतिम चयन की कोई गारंटी नहीं होती. हालांकि, सान्याल का कहना यह नहीं है कि छात्रों को UPSC की तैयारी नहीं करनी चाहिए.
AI के दौर में कैसी हो रही तैयारी
बात यहीं पर खत्म नहीं होती है. हजारों कर्मचारियों की छंटनी और नौकरी जाने की वजह बनने वाला एआई इस रोल में कितना फायदेमंद है यह जानना भी बहुत जरूरी है. सान्याल ने बातचीत के दौरान यह भी बताया कि जब AI और नई तकनीक कई क्षेत्रों में काम करने के तरीके को बदल रही हैं. आज जिस डिग्री या नौकरी को भविष्य के लिए सुरक्षित माना जा रहा है, जरूरी नहीं कि 10 या 20 साल बाद उस क्षेत्र की स्थिति बिल्कुल वैसी ही रहे. इसलिए छात्रों के लिए केवल ऐसी नौकरी खोजने के बजाय जिसमें स्थिरता दिखाई देती हो, अपनी स्किल, सीखने की क्षमता और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता पर ध्यान देना जरूरी हो सकता है.
फिर छात्रों को करियर चुनते समय क्या देखना चाहिए?
सान्याल के मुताबिक छात्रों को अपने लिए किसी एक ‘परफेक्ट’ करियर की तलाश में ज्यादा समय लगाने के बजाय यह देखना चाहिए कि वे चुने हुए रास्ते पर कितने लंबे समय तक टिक सकते हैं. उनका जोर इस बात पर है कि किसी करियर में आगे बढ़ने के लिए उसके पीछे बने रहना बहुत अहम है. ऐसे में करियर चुनते समय सिर्फ यह सवाल नहीं होना चाहिए कि सबसे सुरक्षित नौकरी कौन सी है? बल्कि यह भी सोचना चाहिए कि अगर आने वाले समय में उस क्षेत्र में बदलाव हुआ तो उनके पास कौन-सी दूसरी स्किल और विकल्प मौजूद रहेंगे.
UPSC पर पहले भी सवाल उठा चुके हैं सान्याल
लेकिन यह पहले बार नहीं है जब संजीव सान्याल ने UPSC को लेकर सवाल उठाएं हैं. इससे पहले भी वह इस विषय पर अपनी राय रख चुके हैं. दिसंबर 2025 में उन्होंने UPSC की तैयारी में सिर्फ नौकरी की सुरक्षा के लिए कई साल लगाने पर सवाल उठाया था. उनका तर्क था कि युवाओं को यह देखना चाहिए कि क्या वह वाकई में सिविल सेवा में जाना चाहते हैं या सिर्फ नौकरी की सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण इस रास्ते को चुन रहे हैं.
इसके पहले मार्च 2024 में भी उन्होंने UPSC की तैयारी में युवाओं के लंबे समय तक लगे रहने पर सवाल उठाया था. इसके अलावा जुलाई 2026 में कॉलेज की पारंपरिक शिक्षा को लेकर भी उन्होंने कहा था कि जब नॉलेज ऑनलाइन उपलब्ध है तो केवल लेक्चर आधारित सीखने के लिए कॉलेज जाना जरूरी नहीं हो सकता.
आजतक एजुकेशन डेस्क