अमित बताते हैं कि ये सफर यूं ही सीधे डबिंग तक नहीं पहुंचा. शुरुआत NDA की तैयारी से हुई, फिर थिएटर, बैंक की नौकरी, रेडियो ऑडिशन, मुंबई की स्टूडियो नौकरी और फिर फ्रीलांसिंग तक बहुत कुछ किया. इस दौरान अपने स्किल को लगातार बदला और नए काम सीखें.
सीधे शब्दों में कहा जाए तो उनकी कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि करियर हमेशा एक सीधी लाइन में आगे नहीं बढ़ता. कभी नौकरी करनी पड़ सकती है, कभी कोई ऑडिशन रिजेक्ट हो सकता है और कभी किसी नए शहर में बिल्कुल शुरुआत से काम सीखना पड़ सकता है.
12वीं के बाद इस फील्ड में एंट्री का रूट
अमित कहते हैं कि डबिंग की दुनिया में कदम रखने के लिए कोई बंधा-बंधाया रास्ता या सेट फॉर्मूला नहीं है. 12वीं के बाद युवा थिएटर, एक्टिंग, मास कम्युनिकेशन या भाषा से जुड़े कोर्स चुन सकते हैं, हालांकि कोई एक खास डिग्री यहां अनिवार्य नहीं है. इस इंडस्ट्री में आपकी डिग्री से ज्यादा आपकी आवाज, टाइमिंग, एक्टिंग और भाषा पर पकड़ मायने रखती है. वैसे थिएटर का बैकग्राउंड यहां बहुत काम आता है क्योंकि यह आपको इमोशन, डायलॉग डिलीवरी और कैरेक्टर को गहराई से समझना सिखाता है. इसके साथ ही हिंदी के अलावा अंग्रेजी और अन्य भाषाओं पर जितनी मजबूत पकड़ होगी, डबिंग और लोकलाइजेशन के दरवाजे उतने ही ज्यादा खुलेंगे.
AI ने क्या डबिंग आर्टिस्ट में डर पैदा किया?
AI Voice और वॉइस क्लोनिंग के आने से डबिंग इंडस्ट्री एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. आज मशीनें पलक झपकते ही आवाज का अनुवाद और नकल करने में सक्षम हो चुकी हैं, इसलिए भविष्य में सिर्फ एक 'साफ आवाज' होना काफी नहीं होगा. अमित इस बारे में कहते हैं कि मुझे इसे लेकर जरा सी भी चिंता नहीं है, न ही डबिंग इडस्ट्री को है. हां, इतना जरूर है कि नए दौर के आर्टिस्ट्स को एक्टिंग, इमोशंस की गहरी समझ, लैंग्वेज एडेप्टेशन और टेक्निकल स्किल्स पर काम करना ही पड़ेगा. AI किसी आवाज की नकल तो कर सकता है, लेकिन किसी किरदार का दर्द, गुस्सा, डर या उसके दिल का हाल समझकर पर्दे पर उतारना एक ऐसा हुनर है जो सिर्फ इंसान ही कर सकता है.
Netflix के दौर में डबिंग का बढ़ता दायरा
आज का दर्शक सिर्फ हिंदी या लोकल कंटेंट तक सीमित नहीं है. कोरियन, चाइनीज और इंग्लिश फिल्में-सीरीज भारत के घर-घर में देखी जा रही हैं, तो वहीं भारतीय कंटेंट भी ग्लोबल हो रहा है. ऐसे में डबिंग और लोकलाइजेशन का महत्व पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है. किसी इंटरनेशनल कहानी को देसी दर्शकों के दिल तक पहुंचाने के लिए महज शाब्दिक अनुवाद काफी नहीं होता, संवादों को सांस्कृतिक रूप से ढालना पड़ता है. यही वजह है कि आज इस फील्ड में सिर्फ वॉइस ओवर आर्टिस्ट ही नहीं, बल्कि डबिंग राइटर, डायलॉग एडेप्टर, डबिंग डायरेक्टर, वॉइस कास्टिंग और ऑडियो पोस्ट-प्रोडक्शन जैसे ढेरों नए करियर ऑप्शन खुल चुके हैं.
डैमर, जोनाथन बायर्स से लेकर मोटू-पतलू तक
अमित के प्रमुख डबिंग प्रोजेक्ट्स की बात करें तो उन्होंने जूटोपिया 2 में गैरी डी 'स्नेक, एक्स-मेन और एवेंजर्स फिल्मों में क्विकसिल्वर, जेम्स बॉन्ड फिल्मों में क्यू, द लीजेंड ऑफ हनुमान में नील, गट्टू बट्टू में गट्टू, मोटू पतलू में मिकी ऑनलाइन और कीमॉन ऐचे में कीमॉन जैसे किरदारों के लिए आवाज दी है. इसके अलावा उन्होंने स्ट्रेंजर थिंग्स में जोनाथन बायर्स और डैमर में जेफरी डैमर के हिंदी वर्जन में भी आवाज दी.
वहीं जूटोपिया 2 के गैरी के हिंदी वर्जन से भी उनका जुड़ाव रहा है. उनके अंतरराष्ट्रीय काम की बात करें, तो इसमें द एडवेंचर्स ऑफ टिनटिन, में टिनटिन, हाउ टू ट्रेन योर ड्रैगन में हिकप जैसे बड़े प्रोजेक्ट का नाम शामिल है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय फिल्में जिनके हिंदी डाइलॉग्स अमित ने लिखे हैं उनमें टॉय स्टोरी 5 , अवतार -फायर एंड ऐश, फैंटास्टिक फोर, और मिशन इम्पॉसिबल: फाइनल रेकनिंग शामिल है.
बड़े टीवी शो और होस्ट के साथ भी किया काम
अमित का अनुभव सिर्फ फिल्मों और वेब सीरीज की डबिंग तक सीमित नहीं रहा है. उन्होंने कई लोकप्रिय टीवी और मनोरंजन शो के लिए भी काम किया है और अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में चर्चित होस्ट और कलाकारों के साथ जुड़े रहे हैं. उनके काम में ओएमजी! ये मेरा इंडिया, जिसमें कृष्णा अभिषेक होस्ट रहे, डगआउट दिशूम में वरुण धवन और आकाश गुप्ता, साइंस ऑफ़ स्टूपिड में मनीष पॉल, मिस्ट्री हंटर्स में रणविजय सिंघा, एनिमल्स गॉन वाइल्ड में जावेद जाफरी और क्रेजी व्हील्स में राघव जुयाल के साथ जुड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं. इतनी ही नहीं अमित ओएमजी! ये मेरा इंडिया के 11वें सीजन का लेखन कर रहे हैं. इस प्रोजेक्ट्स में उनके काम का दायरा सिर्फ़ स्क्रिप्टिंग तक सीमित नहीं था, बल्कि सभी होस्ट्स के की रिकॉर्डिंग में वॉइस डायरेक्शन भी अमित द्वारा ही किया गया.
The Odyssey
अमित के करियर में एक अहम पड़ाव The Odyssey का हिंदी अडैप्टेशन है. अमित बताते हैं कि उनके जीवन में मैनिफेस्टेशन का बहुत बड़ा रोल है. उन्होंने बातचीत के दौरान बताया कि एक साल पहले उन्होंने The Odyssey को लिखने की इच्छा अपने मन में जताई थी लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि जिसके प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए वह दिन-रात एक कर रहे थे, वह उनके पास ही आ जाएगी. इस प्रोजेक्ट के लिए उन्हें फोन आया और उन्होंने अंग्रेजी कंटेंट को हिंदी दर्शकों के लिए अडैप्ट करने के काम में हिस्सा लिया. यहां काम सिर्फ शब्दों का अनुवाद करना नहीं था. इंटरनेशनल लेवल पर चल रही उस कहानी को हिंदी दर्शकों के लिए स्वाभाविक भाषा और सही भाव में पेश करना था. यही काम दिखाता है कि डबिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने वाले लोगों के लिए लेखन और भाषा की समझ कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है.
निवेदिता गुप्ता