क्या इन्टर्न का फायदा उठा रहीं कंपन‍ियां? समझ‍िए क्या होते हैं स्टाइपेंड के नियम और अध‍िकार

भारत में इंटर्नशिप युवाओं को न केवल अनुभव देती हैं बल्कि उन्हें भविष्य के करियर के लिए तैयार भी करती हैं. यह छात्रों और युवा पेशेवरों को अपने नॉलेज को सही जगह पर आजमाने का मौका देती हैं. लेकिन कई बार युवाओं को काम करने के कोई पैसे नहीं मिलते हैं तो  सवाल ये आता है कि क्या इंटर्न के लिए कोई नियम भी हैं या नहीं?

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क्या भारत में इंटर्नशिप और स्टाइपेंड के लिए है कोई नियम. (Photo : Pexels)( क्या भारत में इंटर्नशिप और स्टाइपेंड के लिए है कोई नियम. (Photo : Pexels)(

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:20 PM IST

सोशल मीड‍िया पर बीते द‍िनों एक बहस काफी गर्म रही, वो थी कि क्या इन्टर्न का फायदा उठाती हैं कंपन‍ियां. क्या इन्टर्न से फुल टाइम का काम ल‍िया जाता है, वो भी बिना उन्हें कोई स्टाइपेंड दिए. ऐसे में सवाल उठता है कि आख‍िर इन्टर्न को लेकर कोई न‍ियम या अध‍िकार हैं कि नहीं, आइए जानते हैं. 

वैसे अपने करियर की शुरुआत में ज्यादातर लोग कभी न कभी इंटर्नशिप करते ही हैं. भारत में इंटर्नशिप केवल काम करने के प्रोसेस को नहीं समझाता है बल्कि असल जिंदगी में किस तरह काम किया जाता है उसका भी अनुभव देता है. कई जगहों पर इंटर्न को बहुत कम पैसे दिए जाते हैं तो कई जगहों पर उन्हें बिल्कुल पैसे नहीं मिलते हैं. पर बात यहीं पर खत्म नहीं होती है अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इंटर्न्स के लिए कोई कानूनी अध‍िकार या स्टाइपेंड के नियम हैं? अगर नहीं हैं तो उसके पीछे की क्या वजह है? 

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बता दें कि वर्तमान में भारत में ऐसा कोई स्पष्ट कानून नहीं है जो इंटर्न्स के अधिकारों, न्यूनतम सैलरी या स्टाइपेंड या रोजगार सुरक्षा को पूरी तरह से तय करें. इस वजह से कई बार छात्र अनुभव तो पाते हैं लेकिन उनके लिए जरूरी सुरक्षा और मुआवजा सुनिश्चित नहीं हो पाता है. 

इंटर्न के कानूनी अधिकार की क्या है स्थिति? 

इंटर्न्स नहीं होते हैं कर्मचारी 

भारतीय कानूनों के तहत इंटर्न्स को कर्मचारी नहीं माना जाता है. जब तक कि वे अभ्यासधीन प्रशिक्षु (apprentice) न हों या उनके लिए कोई कानून लागू न हो. इसका मतलब है कि इंटर्नशिप के दौरान वे सामान्य रोजगार कानूनों जैसे सैलरी, हक, पेंशन समेत अन्य के लिए पात्र हों. 

नहीं है कोई नियम 

अन्य देशों की तुलना में भारत में इंटर्नशिप के लिए कोई कानूनी नियम नहीं है. जिसमें न्यूनतम स्टाइपेंड तय करे, सैलरी संरचना, काम के घंटों, छुट्टियों और रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित  निर्धारित किया हो. 

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क्या स्टाइपेंड को लेकर है कोई नियम? 

भारत में सभी इंटर्न्स को स्टाइपेंड देना अनिवार्य नहीं है.अलग-अलग कंपनियों या सरकारी योजनाओं के तहत अलग राय रहती है. हालांकि, औपचारिक अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग(Apprentices Act के अंतर्गत) स्टाइपेंड देना अनिवार्य होता है, लेकिन सामान्य इंटर्नशिप में ऐसा कोई अनिवार्य नियम नहीं है. 

सरकारी जगहों पर स्टाइपेंड का नियम 

वहीं, कुछ सरकारी इंटर्नशिप कार्यक्रमों में स्टाइपेंड निर्धारित होते हैं. राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के इंटर्नशिप प्रोग्राम में चयनित उम्मीदवारों को कुछ निर्धारित स्टाइपेंड मिलता है. वहीं, कुछ इंटर्नशिप यानी कि कोर्स के हिस्से या वर्क एक्सपीरियंस इंटर्नशिप मान्य होते हैं लेकिन उनमें स्टाइपेंड सरकार द्वारा अनिवार्य नहीं होता बल्कि संस्थान/नियोक्ता पर निर्भर होता है. कई बार उन्हें स्टाइपेंड दिया जाता है तो कई बार नहीं. 

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