कुछ हजार या लाख रुपये के सामान्य इंटर्नशिप स्टाइपेंड के बारे में तो आपने सुना ही होगा लेकिन भारत के हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) सेक्टर में इंटर्नशिप के लिए मिलने वाली सैलरी आपको हैरान कर सकती है. ब्लूमबर्ग की इस सप्ताह पब्लिश एक रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुग्राम की क्वाडेई (Quadeye) कुछ इंटर्न को करीब 30 लाख रुपये प्रति महीने दे रही है यानी दो महीने की इंटर्नशिप के लिए कुल 60 लाख रुपये तक मिल सकते हैं.
वहीं, ग्रेविटन (Graviton) दो महीने की इंटर्नशिप के लिए करीब 50 लाख रुपये की पेशकश कर रही है. इसके अलावा, एम्स्टर्डम की IMC Trading 2026 में दो महीने की इंटर्नशिप के लिए करीब 25 लाख रुपये दे रही है. इसमें 5 लाख रुपये का साइन-ऑन बोनस भी शामिल है. वहीं, Optiver की ओर से भी दो महीने की इंटर्नशिप के लिए करीब 60 लाख रुपये तक की सैलरी दी जा रही है.
कोई नॉर्मल इंटर्नशिप नहीं
ये आम फाइनेंस इंटर्नशिप नहीं है. इन कंपनियों को ऐसे छात्रों की जरूरत होती है, जिन्हें मैथ और प्रोग्रामिंग की अच्छी समझ हो और जो अपनी समस्या सुलझाने की क्षमता का इस्तेमाल करके ट्रेडिंग मॉडल और रणनीतियां तैयार कर सकें.
केवल इंटर्न तक नहीं है सीमित
ये हाई कमाई वाला काम केवल इंटर्न तक सीमित नहीं है. क्वांट ट्रेडर्स भी लाखों-करोड़ों रुपये का पैकेज हासिल कर रहे हैं. हाल ही में रेडिट के r/quantindia पर हुई एक चर्चा में पांच साल के अनुभव वाले एक क्वांट ट्रेडर ने दावा किया कि उसकी कुल सालाना कमाई करीब 4 करोड़ रुपये है. वहीं, एक अन्य यूजर ने दावा किया कि Graviton में पांच साल काम करने के बाद वह करीब 9 करोड़ रुपये कमा रहा है. एक और व्यक्ति ने बताया कि एक छोटी HFT कंपनी में सात साल काम करने के बाद उसकी कमाई 8 करोड़ से 13 करोड़ रुपये के बीच है.
हालांकि, रेडिट पर बताए गए ये आंकड़े स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं, इसलिए इन्हें सामान्य या तय सैलरी नहीं माना जाना चाहिए. HFT सेक्टर में कुल कमाई का बड़ा हिस्सा बोनस और ट्रेडिंग प्रदर्शन पर निर्भर करता है. यही वजह है कि हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग को इतना खास और असाधारण करियर विकल्प माना जाता है.
क्या करना होता है काम?
अब सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि आखिर ये काम कैसे करते हैं? तो बता दें कि ऐसी कंपनियां बाजार में मिलने वाले छोटे-छोटे ट्रेडिंग मौकों को पहचानने और बहुत तेज गति से ऑर्डर पूरा करने के लिए टेक्नोलॉजी, गणित और मार्केट डेटा का इस्तेमाल करती हैं. इस पूरे काम में अलग-अलग भूमिकाएं होती हैं. क्वांट ट्रेडर संभावनाओं, कीमतों, ऑर्डर बुक और बाजार के व्यवहार का विश्लेषण करता है. क्वांट रिसर्चर नई ट्रेडिंग रणनीतियां तैयार करता है और उनका टेस्ट करता है. वहीं, क्वांट डेवलपर या इंजीनियर ऐसे सिस्टम और सॉफ्टवेयर बनाता है, जो इन रणनीतियों को तेजी और बेहतर तरीके से लागू कर सकें.
इस क्षेत्र में काम करने के लिए यह जरूरी नहीं है कि आप पूरा दिन शेयर बाजार के चार्ट देखते रहें. उदाहरण के लिए, IMC के मौजूदा ग्रेजुएट क्वांट ट्रेडर पद के लिए वित्तीय बाजार की पहले से जानकारी जरूरी नहीं है. कंपनी ऐसे छात्रों को मौका देती है जिनके पास क्वांटिटेटिव डिग्री, अच्छी विश्लेषणात्मक क्षमता और प्रोग्रामिंग का अनुभव हो. इसी तरह, IMC के इंडिया ट्रेडिंग इंटर्नशिप प्रोग्राम में मैथ, साइंस, इंजीनियरिंग, सांख्यिकी, वित्त और अर्थशास्त्र जैसे विषयों के छात्र आवेदन कर सकते हैं.
कैसे कर सकते हैं प्रवेश?
HFT में करियर बनाने को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आती हैं. लोगों को लगता है कि केवल स्टॉक ट्रेडिंग सीख लेना काफी होता है लेकिन ये गलत है. इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए कई तरह की स्किल की जरूरत होती है.
मैथ: प्रोबेबिलिटी, सांख्यिकी, कैलकुलस, लीनियर अलजेब्रा और लॉजिकल रीजनिंग की अच्छी समझ जरूरी होती है.
प्रोग्रामिंग: Python काफी उपयोगी है, जबकि ट्रेडिंग टेक्नोलॉजी से जुड़ी कई नौकरियों में C++ की नॉलेज बेहद अहम होती है.
समस्या हल करने की क्षमता: उम्मीदवारों से कठिन पहेलियां, प्रायिकता से जुड़े सवाल और कोडिंग टेस्ट पूछे जा सकते हैं. कई बार ऐसी परिस्थितियां भी दी जाती हैं, जहां अधूरी जानकारी के आधार पर सही फैसला लेना होता है.
मार्केट की समझ: बाजार की माइक्रोस्ट्रक्चर, ऑर्डर बुक, ट्रेडिंग एग्जीक्यूशन और डेरिवेटिव्स की जानकारी भी फायदेमंद होती है. खासकर अनुभवी ट्रेडिंग पदों के लिए यह समझ ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है.
उदाहरण के तौर पर, IMC के मौजूदा पदों में क्वांटिटेटिव बैकग्राउंड के साथ मजबूत प्रोग्रामिंग और डेटा-एनालिसिस स्किल्स की मांग की गई है. अनुभवी क्वांट ट्रेडिंग भूमिकाओं में मार्केट माइक्रोस्ट्रक्चर, ऑर्डर-बुक डायनेमिक्स, मार्केट इम्पैक्ट और टिक-लेवल डेटा की समझ को भी अहम माना गया है.
क्या IIT से न पढ़ने वाले HFT में बना सकता है करियर?
अब सवाल ये है कि अगर आपने IIT से पढ़ाई नहीं की है, तो क्या आप इस क्षेत्र में करियर बना सकते हैं? तो इसका जवाब है हां. लेकिन इसके लिए रास्ता आसान नहीं होगा. केवल छोटा सा कोई कोर्स कर लेने से कोई 60 लाख रुपये की इंटर्नशिप या 4 करोड़ का सालाना पैकेज नहीं पा सकता है. बड़ी HFT कंपनियों में भर्ती प्रक्रिया काफी कठिन होती है. उम्मीदवारों के टेस्ट में यह देखा जाता है कि वे क्वांटिटेटिव और प्रोग्रामिंग से जुड़ी मुश्किल समस्याओं को वास्तव में हल कर सकते हैं या नहीं.
हालांकि, कंप्यूटर साइंस, मैथ, फिजिक्स, सांख्यिकी, अर्थशास्त्र, इंजीनियरिंग या सॉफ्टवेयर की अच्छी जानकारी रखने वाला व्यक्ति जरूरी स्किल्स सीखकर इस क्षेत्र में आ सकता है. कामकाजी पेशेवरों के लिए शुरुआत करने का एक तरीका है कि वे पहले Python या C++, प्रायिकता, सांख्यिकी, डेटा एनालिसिस और एल्गोरिदम पर अपनी पकड़ मजबूत करें. इसके बाद बैकटेस्टिंग, मार्केट डेटा या व्यवस्थित ट्रेडिंग रणनीतियों से जुड़े प्रोजेक्ट तैयार किए जा सकते हैं.
कुछ प्रोफेशनल प्रोग्राम भी मददगार हो सकते हैं. NSE का EPAT, जिसे QuantInsti संचालित करता है, इसमें क्वांटिटेटिव ट्रेडिंग, मार्केट माइक्रोस्ट्रक्चर, Python, सांख्यिकी, मशीन लर्निंग, ट्रेडिंग टेक्नोलॉजी, बैकटेस्टिंग और रिस्क मैनेजमेंट जैसे विषय शामिल हैं. इसमें एक प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट और निगरानी में परीक्षा भी होती है. QuantInsti एक हायरिंग प्लेटफॉर्म भी चलाता है. कंपनी के अनुसार, उसके 300 से ज्यादा हायरिंग पार्टनर हैं. यहां क्वांटिटेटिव ट्रेडर, डेवलपर, क्वांटिटेटिव एनालिस्ट और रिसर्च जैसी भूमिकाओं के लिए उम्मीदवारों की भर्ती की जाती है.
आजतक एजुकेशन डेस्क